पंचम ज्योतिर्लिंग केदारनाथ (उत्तराखंड): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा
कभी आपने महादेव की बंद आंखों को देखकर सोचा है कि ऐसा क्यों हैं? उनकी बंद आँखें पूर्ण सजगता दर्शाती है – भीतरी और बाहरी दोनों तरह से। कहते हैं की महादेव बाहरी दुनिया को अपने अंदर के ज्ञान की परछाई समझते हैं।
केदारनाथ का अर्थ है खेतों के भगवान का मंदिर। केदार अर्थात खेत और नाथ अर्थात भगवान सारे देवों में पूजनीय है।
Published on: 3 March 2026 at 12:36 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

केदारनाथ कहां स्थित है?
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अगर आप हिमालय की गोद से होते हुए मंदाकिनी नदी के तट पर जाएंगे तो वहां आपको नाथों के नाथ केदारनाथ के दर्शन होंगे। भौगोलिक आंकड़ों की माने तो यह समुद्र तल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। चार धाम करने वाले यात्री अपनी यात्रा केदारनाथ होकर ही पूरी करते हैं और साथ ही साथ यह तीर्थ स्थान 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
केदारनाथ मंदिर से जुड़ी प्राचीन कहानी
- यह तो आप सभी जानते हैं की महाभारत में पांडव, कौरवों से लड़े थे पर असल में वे चचेरे भाई थे।
- युद्ध वैसे भी पतन ही लेकर आता है और इस युद्ध में तो अनेक बंधुओं और रिश्तेदारों की हत्या हुई थी।
- कुरुक्षेत्र की युद्ध के बाद पांडव इस हत्या वाले पाप से मुक्ति हेतु महादेव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय के केदार क्षेत्र में चले गए और कठिन तपस्या करने लगे।
- शिवजी ने पांडवों के सामने असली रूप में न आ कर भैंस के रूप में आने का निश्चय किया पर जब उस रूप को भी पांडवों ने पहचान लिया तो वह उस वक्त वहां से अंतर्ध्यान हो गए।
- ऐसे में पांडवों ने उनकी खोज शुरू की और भीम ने विशालकाय रूप में आकर अपने पैरों को फैलाकर भैंस रूपी महादेव को पकड़ने का प्रयास किया।
- शिवाजी उसी क्षण भूमि में समा गए पर भीम ने अपने शारीरिक बल से उनकी पीठ को पकड़ लिया।
- भोले बाबा पांडवों की आस्था से अत्यंत प्रसन्न हुए और आख़िरकार उन्हें दर्शन दिए जिससे उन्हें उनके पापों से मुक्ति मिली।
- इसके बाद शंभूनाथ ने पांडवों को कहा कि उस स्थान पर अब उनके भक्त भैंसे की पीठ के रूप में कभी भी उनके दर्शन कर सकेंगे और यह कहकर वह वहां त्रिकोणीय रूप में समा गए।
इस मंदिर को स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। मान्यता के अनुसार यह मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य जी ने बनवाया था। उत्तराखंड के चारों धाम में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण केदारनाथ धाम, पंच केदार में भी सर्वश्रेष्ठ है।
केदारनाथ मंदिर के बारे में क्या आप यह बात जानते हैं?
स्थान पर अत्यधिक बर्फबारी होती है और खास करके नवंबर से अप्रैल तक यह बर्फबारी इतनी ज्यादा होती है कि यह मंदिर बंद रहता है। इस दौरान भगवान केदारनाथ की पूजा उसे मंदिर में न होकर ऊखीमठ में की जाती है।
केदारनाथ मंदिर में किसकी पूजा की जाती है?
- मुख्यतः केदारनाथ मंदिर में महादेव की ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा की जाती है। यह ज्योतिर्लिंग बैल की पीठ के आकर के एक पिंड के रूप में है।
- मंदिर परिसर में आप आगे जाएंगे तो आपको आदि गुरु शंकराचार्य की एक प्रतिमा भी दिखेगी।
- यहां महादेव की पूजा केदारनाथ के नाम से होती है।
केदारनाथ मंदिर में शिव जी के शरीर का आखिरकार कौन सा अंग है?
केदारनाथ में बेल की कूब उठती हुई दिखाई देती है, तुंगनाथ में भुजाएं, मध्यमहेश्वर में नाभि और पेट, रुद्रनाथ में चेहरा, और कल्पेश्वर में महादेव के बाल नजर आते हैं।
केदारनाथ की कुछ मुख्य बातें:
- केदारनाथ धाम केवल अप्रैल अथवा मई से लेकर नवंबर तक ही भक्तों के लिए खुला रहता है।
- गौरीकुंड से यात्री 16 से 18 किलोमीटर की यात्रा पैदल ट्रैकिंग करते हुए या फिर हेलीकॉप्टर से करते हैं।
- माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था जिसे आगे चलकर आदि शंकराचार्य जी ने पूर्ण जीवित किया था।
केदारनाथ की यात्रा कहां से शुरू होती है?
ज्यादातर केदारनाथ की यात्रा या तो ऋषिकेश या हरिद्वार से ही शुरू होती है।
- हरिद्वार से केदारनाथ तक की दूरी 237 से 240 किलोमीटर है और भक्तों को लगभग 8 से 10 घंटे लगते हैं यहां से केदारनाथ पहुंचने में।
- यात्रा के दौरान भक्त ऋषिकेश और रुद्रप्रयाग होते हुए गौरीकुंड तक पहुंचते हैं जहां से केदारनाथ धाम की दूरी केवल 16 किलोमीटर की रह जाती है।
केदारनाथ कब घूमने जाना चाहिए?
- अगर आप केदारनाथ जाने का प्लान बना रहे हैं तो सबसे अच्छा समय गर्मियों में मई से जून का रहता है और शरद ऋतु में सितंबर से अक्टूबर तक का।
- इन महीना में मौसम तो अच्छा होता ही है साथ ही साथ रास्ता भी भक्तों के लिए खुल जाता है।
- अप्रैल में यात्रा करने वाले भक्त याद रखें कि इस वक्त बहुत ठंडी होती है लेकिन अगर आप जुलाई से सितंबर में यात्रा कर रहे हैं तो आपको बारिश मिल सकती है।
- नवंबर से लेकर मार्च तक ठंड इतनी बढ़ जाती है कि यात्रियों का यहां यात्रा करना असंभव सा हो जाता है।
केदारनाथ की चढ़ाई में कितना वक्त लगता है?
- ज्यादातर केदारनाथ की चढ़ाई में 6 से 10 घंटे लगते हैं, पर यह बात ना भूले यह आपके शारीरिक क्षमता, मनोबल, मौसम में बदलाव, और लिए गए छोटे-छोटे पड़ाव पर पूरी तरह से निर्भर करता है।
- यह यात्रा गौरीकुंड से शुरू होकर 16 से 17 किलोमीटर तक की होती है।
- चढ़ाई के कुछ हिस्से अत्यधिक कठिन होते हैं।
- मंदिर हेलीपैड से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है।
- वापसी में लोगों को 5 से 7 घंटे लग जाते हैं।
केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा भीड़ कब होती है?
अगर आप केदारनाथ जा रहे हैं तो यह मान ले की भीड़ यूं तो आपको हर महीने में ही मिलेगी पर जून के महीने में अच्छे मौसम होने के कारण भीड़ बहुत ही ज्यादा होती है। पहले से बुकिंग करवाना बिल्कुल भी ना भूले।
क्या भक्तगण केदारनाथ धाम में शिवलिंग को छू सकते हैं?
केदारनाथ में भक्तों को शिवलिंग छूने की अनुमति है और यह मशहूर तीर्थ स्थलों में से एक अनोखा तीर्थ स्थल है जहां भक्त पूजा करते वक्त शिवलिंग को छू सकते हैं।
केदारनाथ कैसे जाएं?
- यूं तो इसके आसपास कोई भी रेलवे स्टेशन नहीं है पर निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जो गौरीकुंड से लगभग 210 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से प्रतिदिन ट्रेन चलती हैं।
- यहां से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है जो की देहरादून में है। यह केदारनाथ धाम से 238 किलोमीटर की दूरी पर है।
2026 में केदारनाथ मंदिर कब खुलेगा?
हिंदू पंचांग की माने तो केदारनाथ मंदिर 22 अप्रैल 2026 को जिस दिन अक्षय तृतीया है उसके आसपास खुलेगा।
पहले दिन के दर्शन के लिए यहां पर अत्यधिक भक्तों की भीड़ लगती है। प
केदारनाथ 2026 में दर्शन के लिए कब बंद हो जाएगा?
केदारनाथ मंदिर के खुलने की तिथि भले ही निश्चित ना हो पर धाम के बंद होने की तारीख पहले से ही तय है। यह 11 नवंबर 2026, जिस दिन भाई दूज है, उसे दिन बंद हो जाएगा।
केदारनाथ मंदिर के मालिक कौन थे?
यूं तो मंदिरों के मालिक ईश्वर खुद होते हैं पर भौतिक रूप में केदारनाथ मंदिर के मालिक आदि शंकराचार्य है। यह मंदिर भगवान शिव की सेवा में बनाया गया है और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
केदारनाथ धाम में प्रसाद के रूप में क्या मिलता है?
केदारनाथ धाम में महादेव के अनुपम दर्शन के साथ भक्तों को प्रसाद के रूप में भगवान को चढ़ाई हुई बहुत सी चीज़े मिलती हैं।
- सूखा नारियल या नारियल का टुकड़ा
- मिश्री
- शिवजी का अभिमंत्रित धागा
- तुलसी
- बेलपत्र
- रुद्राक्ष
- भगवान का चित्र
- मंदिर की फोटो
केदारनाथ मंदिर में आरती का समय
- सुबह की पूजा 4:00 बजे से शुरू हो जाती है जिससे महा अभिषेक कहा जाता है।
- मंदिर आम जनता के लिए सुबह 6:00 बजे से खुल जाता है।
- शाम की आरती 6:00 बजे से 7:30 बजे तक होती है जिसे कपूर आरती कहते हैं।
- रात 8:30 बजे श्रृंगार या शयन आरती होती है इसके बाद मंदिर बंद हो जाता है।
- मंदिर दोपहर 3 से 5 बजे तक बंद रहता है।
भीड़ और मौसम के अनुसार मंदिर के खुलने, आरती का समय, और बंद होने का समय बदल सकता है तो यहां जाने से पहले पूरी तरह से पूछताछ जरूर करें। बुकिंग पहले से करना ना भूले।
जय केदारनाथ, नम केदारनाथ!
कैलाशशिखरस्थितम। गङ्गाधराय शम्भवे, भक्तानां शुभदायकम्।
भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग
| नाम | ज्योतिर्लिंग |
|---|---|
| प्रथम | सोमनाथ ज्योतिर्लिंग |
| द्वितीय | मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग |
| तृतीय | महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| चतुर्थ | ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| पंचम | केदारनाथ ज्योतिर्लिंग |
| षष्ठ | भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग |
| सप्तम | काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग |
| अष्टम | त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| नवम | बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग |
| दशम | नागेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| एकादश | रामेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| द्वादश | घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग |