प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (गुजरात): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा

गुजरात के प्रभास क्षेत्र में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है। इसके पीछे की कहानी अगर आप जानेंगे तो निश्चय ही आश्चर्यचकित हो जाएंगे।

By: RevivingCultures
Published on: 27 January 2026 at 12:01 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (गुजरात): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा

जाने क्या है सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पीछे की कहानी

  • प्राचीन कहानी के अनुसार प्रजापति दक्ष ने नाराज होकर चंद्रदीप को श्राप दे दिया था जिस कारण वे अपना पूरा तेज खो बैठे।
  • श्राप के कारण चंद्रमा क्षय रोग से पीड़ित हो गए।
  • कुछ समझ ना आने पर चंद्र देव जी ब्रह्मा जी से सलाह ली। ब्रह्मा जी की बात मान वे सोमनाथ के प्रभास क्षेत्र में आकर शिवजी की तपस्या करने लगे।
  • उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने चंद्र देव को दर्शन दिए और आख़िरकार उन्हें श्राप से मुक्त किया।
  • साथ ही साथ उन्हें दो सप्ताह बढ़ने और दो सप्ताह घटने की आज्ञा दी।
  • चंद्र देव को श्राप मुक्त करने के बाद शिवाजी सोमनाथ में ज्योतिर्लिंग के रूप में बस गए और उनका नाम सोमनाथ पड़ा।
  • सोमनाथ अर्थात सोम के भगवान अथवा चंद्रमा के भगवान।

सोमनाथ मंदिर कितना पुराना है?

अगर आप वेद–पुराणों के पन्ने पलट कर देखेंगे तो पाएंगे सोमनाथ मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद, शिव पुराण, स्कंद पुराण, और श्रीमद् भागवत गीता में सम्मिलित है, जिससे यह पता चलता है कि इस मंदिर का निर्माण कम से कम 7 करोड़ 99 लाख 25 हज़ार 105 वर्ष पूर्व हुआ था।

क्या आपको पता है सोमनाथ मंदिर में सबसे पहले पूजा किसने की थी?

अब तक आप यह तो जान ही गए होंगे की सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्र देव ने किया था। चंद्र देव जिन्हें हम सोम कहकर के भी संबोधित करते हैं। शिवजी चंद्र देव को आशीर्वाद देने के बाद वही ज्योतिर्लिंग के रूप में बस गए और उनकी पहली पूजा चंद्र देव ने ही की थी।

सोमनाथ मंदिर पर किसने आक्रमण किया?

बात कुछ 1000 वर्ष पहले की है जब महमूद गजनवी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था यह वही सोमनाथ मंदिर है जिसे एक नहीं बल्कि छह भीषण आक्रमण जिले थे पर आश्चर्य की बात यह है कि कोई भी आक्रमण उसकी भव्यता गौरव और दृढ़ता को नष्ट नहीं कर पाया।

रावण ने क्या सच में सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया था?

  • सोमनाथ मंदिर का निर्माण सत्य युग में चंद्र देव ने स्वर्ण से किया था पर उसके बाद पुराणों की माने तो त्रेता युग में रावण ने चांदी से सोमनाथ मंदिर का दोबारा निर्माण किया था।
  • आगे चलकर द्वापर युग में श्री कृष्ण ने चंदन से तथा उसके 2500 वर्ष पूर्व श्री विक्रमादित्य ने इस मंदिर का निर्माण किया था।
  • 480 से 767 ई के बीच इस मंदिर का द्वितीय निर्माण हुआ था ।

सोमनाथ मंदिर अन्य सारे पवित्र ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है क्योंकि कहां जाता है कि यह वह ज्योतिर्लिंग है जो शिव अग्नि के प्रकाश से स्तंभ के रूप में पहली बार प्रकट हुआ था।

जो मंदिर को आज सभी इतना अनुपम और भव्य मानते हैं उसका पूर्ण निर्माण 1950 में सरदार वल्लभभाई पटेल के अथक प्रयासों से हुआ। इस शिवलिंग की स्थापना डॉ राजेंद्र प्रसाद ने की थी।

सोमनाथ मंदिर में आरती का समय

  • सुबह की आरती भोर 4:00 बजे होती है।
  • अगली आरती सुबह 7:00 बजे होती है।
  • सुबह की आखिरी आरती 10:00 बजे होती है।
  • शाम को आरती केवल एक बार 7:00 बजे होती है।
  • आरती दिन में कई बार होती है।
  • याद रखें मंदिर में आरती संगीत और मंत्रोचार के साथ की जाती है।

सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की पूजा कैसे करें

  • ज्योतिर्लिंग पर जल, दूध, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरे का फूल–फल, और अन्य फल फूल चढ़ाकर पूजा करें।
  • ऑनलाइन माध्यम से भी पूजा के लिए आप बुकिंग कर सकते हैं खासकर रुद्राभिषेक या इच्छापूर्ण हेतु बेलपत्र अर्पण।
  • मंदिर में आप पुजारी के माध्यम से दूध, दही, शहद, घी, और जल चढ़ाकर शिवजी का अभिषेक कर सकते हैं।
  • रुद्राभिषेक के लिए शिव जी के अभिषेक के साथ रुद्र मित्रों का उच्चारण किया जाता है जिससे आत्मा की शुद्धि और सुरक्षा होती है।
  • मंदिर जाते वक्त मर्यादित वस्त्र पहने।
  • भीड़ से बचने के लिए बिना किसी तीज–त्यौहार वाले दिनों में जाए।
  • अगर आप अन्नदान करना चाहते हैं तो मंदिर के अन्नक्षेत्र में कर सकते हैं।

सोमनाथ यात्रा की बुकिंग प्रक्रिया और अन्य जानकारी

  • सोमनाथ मंदिर की अपनी वेबसाइट है जिस पर आप जाकर विशेष पूजा के लिए जैसे कि रुद्राभिषेक और बिलपत्र अर्पण या कमरा बुकिंग के लिए पहले से बुक कर सकते हैं। अन्य किसी ऑनलाइन वेबसाइट से बुकिंग न करें और धोखाधड़ी से बचे।
  • मंदिर में दान करने हेतू मंदिर की वेबसाइट पर ही जाएं। किसी अन्य वेबसाइट पर जाकर दान न करें और ध्यान फ्रॉड से बचे।
  • VIP दर्शन की सुविधा भी इस मंदिर में उपलब्ध है जिससे आप लंबी कतार से बच सकते हैं।

सोमनाथ मंदिर में कितनी सीढ़ियां हैं?

गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर में जाने के लिए किसी सीधी का उल्लेख अभी तक आया नहीं है वरन यह कहां गया है कि मंदिर के परिसर के आसपास और त्रिवेणी संगम पर जाकर आपको नाव की व्यवस्था जरूर मिलेगी क्योंकि मंदिर प्रमुख तक जाने के लिए आपको नाव का उपयोग करना पड़ेगा।

क्या आप जानते हैं सोमनाथ मंदिर के नीचे क्या छुपा है?

2020 में GPR स्कैनिंग की वैज्ञानिकों के द्वारा किए हुए शोध में यह पता लगा की सोमनाथ मंदिर के नीचे तीन मंजिला की पक्की इमारत है जिसकी गहराई 7.3 मीटर है और यह L–आकार का है। इसके आसपास आपको बौद्ध गुफाएं भी मिलेंगी।

बड़ा सवाल– पहले द्वारका जाए या सोमनाथ?

अपनी यात्रा शुरू करने का निर्णय आप अपने सुविधा या चयन के अनुसार कर सकते हैं जो आध्यात्मिक नियम को अपनाते हैं वह इस यात्रा को द्वारका से शुरू करके सोमनाथ पर खत्म करते हैं। यह यात्रा भक्ति और मोक्ष से परिपूर्ण होती है और अगर आप जामनगर और राजकोट से आ रहे हैं तो यह आपके लिए सुविधाजनक भी है।

  • यदि आप भगवान कृष्ण की भक्ति और एक अत्यंत ही उत्साही माहौल के साथ अपनी यात्रा शुरू करना चाहते हैं तो अपनी यात्रा द्वारका से शुरू करें।
  • यदि शिवजी की उपस्थित को आप महत्व देते हैं और शांतिपूर्ण आत्मबोध करना चाहते हैं तो अपनी यात्रा आप सोमनाथ से शुरू कर सकते हैं।

सोमनाथ मंदिर तक यात्रा कैसे करें?

सड़क मार्ग से

अगर आप द्वारका से सोमनाथ की यात्रा कर रहे हैं, तो सड़क मार्ग से लगभग 4 से 5 घंटे में सोमनाथ पहुंचा जा सकता है। जामनगर या राजकोट से आने वाले श्रद्धालु पहले द्वारका दर्शन करते हुए सोमनाथ आना अधिक सहज और लाभदायक मानते हैं। निजी वाहन, टैक्सी और बसों की सुविधा उपलब्ध है।

रेल मार्ग से

  • सोमनाथ आने वाले यात्रियों को सोमनाथ रेलवे स्टेशन (SMNH) या वेरावल जंक्शन (VRL) पर उतरना होता है।
  • सोमनाथ स्टेशन मंदिर से लगभग 0.5 किलोमीटर दूर है।
  • वेरावल जंक्शन मंदिर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित है।
  • देश के अधिकांश प्रमुख शहरों से सोमनाथ रेलवे स्टेशन और वेरावल जंक्शन के लिए नियमित ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं।

सोमनाथ स्टेशन से यात्री पैदल या ऑटो द्वारा आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं, जबकि वेरावल से ऑटो या टैक्सी द्वारा सोमनाथ मंदिर जाकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए जा सकते हैं।

ॐ नाम में सार है, भक्तों को राह दिखाए।
शिव नाम रटते ही, भवसागर मिल जाए।

भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग

नाम ज्योतिर्लिंग
प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
द्वितीय मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
तृतीय महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
चतुर्थ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
पंचम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
षष्ठ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
सप्तम काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
अष्टम त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
नवम बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग
दशम नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
एकादश रामेश्वर ज्योतिर्लिंग
द्वादश घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग