द्वादश ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) : यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

ॐ केवल एक उच्चारण ही नहीं असीम शांति और भक्ति का प्रतीक हैं। 

अनंत काल से महादेव अपने भक्तों पर असीम कृपा बनाए रखते है और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो की 12 ज्योतिर्लिंगों में से अंतिम माना गया है, इस बात का प्रमाण है। यह ज्योतिर्लिंग की कहानी शिव जी के भक्त घुश्मा से संबंधित है।
यह ज्योतिर्लिंग वेरुल गांव में स्थित है जो की महाराष्ट्र के संभाजी नगर जिले में है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस ज्योतिर्लिंग के मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है।

By: RevivingCultures
Published on: 17 March 2026 at 11:20 am / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
द्वादश ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) : यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कथा

  • पुराणों की माने तो यह ज्योतिर्लिंग घुश्मा की अखंड भक्ति को दर्शाता है। यहां पर महादेव का आशीर्वाद पा उनके मरे हुए बेटे जिंदा हो गए थे। 
  • एक और कथा के अनुसार यहां पर मां पार्वती ने अपने हाथों में कुमकुम में पानी मिलाकर घर्षण से एक गोल शिवलिंग का निर्माण किया था। यही कारण है कि इस शिवलिंग को घृष्णेश्वर कहां जाता है। 
  • इसी स्थान पर महादेव ने घुश्मासुर राक्षस को मौत के घाट उतारा था और इसी दिव्य महत्व को बढ़ाने के लिए इस स्थान का नाम घृष्णेश्वर पड़ा। 
  • सच्ची भक्ति और विश्वास भगवान को स्वयं प्रकट होने पर मजबूत कर देता है, यह ज्योतिर्लिंग इस बात का प्रमाण है। 
  • माना जाता है जो भक्त इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते हैं उन्हें सारे ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का फल प्राप्त होता है। 
  • महाशिवरात्रि और श्रावण के महीने में यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है।

grishneshwar jyotirlinga

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से जुड़ी अनोखी बातें 

  • यह इकलौता ऐसा ज्योतिर्लिंग मंदिर है जहां पर दर्शन करते वक्त आप पाएंगे की शिवजी का पूरा परिवार एक ही मूर्ति में सम्मिलित है। 
  • इस मूर्ति में आपको महादेव, मां पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी, और नंदी जी के दर्शन हो जाएंगे। यहां भगवान शंकर अपनी जटाओं में गंगा धारण किए हुए नजर आते हैं। 
  • इस मूर्ति के दर्शन भक्तगण दक्षिण प्रवेश द्वार से साफ साफ कर सकते हैं। 
  • मंदिर के ऊपर शीर्ष भाग में सफेद पत्थर में यह मूर्ति उकेरी गई है।  
  • इस मंदिर में आपको एक स्तंभ पर नंदी जी की नक्काशीदार मूर्ति के दर्शन होंगे और साथ ही साथ उसमें हाथी भी नजर आएगा।  यह मिलन हरि का हर से अर्थात विष्णु जी की शंकर जी से दर्शाता है। 
  • अन्य 24 स्तंभों पर ध्यान देने पर आपको यक्षों की आड़ी मूर्तियों के दर्शन होंगे जो यह दर्शाता है कि इस मंदिर का भार उन्होंने अपने कंधों और पीठ पर उठा रखा हैं। 
  • घृष्णेश्वर मंदिर घृष्णेश्वर, घुश्मेश्वर, और धूमेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। 
  • इस ज्योतिर्लिंग को महिलाएं भी स्पर्श कर सकती है। 

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में कौन-कौन सी पूजा होती है?

  • रुद्राभिषेक पूजा
  • पंचामृत अभिषेक पूजा 
  • जलाभिषेक पूजा 
  • लघु रुद्र पूजा 
  • महामृत्युंजय जाप
  • कार्तिक पूर्णिमा 
  • गणेश चतुर्थी

इन मुख्य पूजाओं के अलावा भी मंदिर में और भी अनेकों पूजाएं करवाई जा सकती है। 

घृष्णेश्वर मंदिर के खुलने और बंद होने का समय 

  • हर सुबह मंदिर दर्शन हेतु 5:00 बजे खुल जाता है और रात के 9:00 बजे बंद होता है। 
  • खास दिनों में जैसे कि श्रावण का महीना और महाशिवरात्रि पर काफी बार मंदिर 24 घंटे भी खुला रहता है। 
  • विशेष अवसरों में दर्शन करने के पहले मंदिर खुलने और बंद होने के समय की जांच कर ले। 

घृष्णेश्वर मंदिर ऐतिहासिक रूप से क्यों प्रसिद्ध है? 

  • यह मंदिर एलोरा की गुफाओं के पास स्थित है और इसी कारण इसे इतिहास के जानकार, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। 
  • इस मंदिर का पूर्ण निर्माण मराठा साम्राज्य में हुआ था। 
  • यह मंदिर क्षमता भक्ति और विश्वास का प्रतीक है। 

घृष्णेश्वर मंदिर तक कैसे पहुंचे?

  • घृष्णेश्वर मंदिर जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन औरंगाबाद रेलवे स्टेशन है। 
  • घृष्णेश्वर मंदिर जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा औरंगाबाद हवाई अड्डा है जिसकी दूरी मंदिर से केवल 30 से 40 किलोमीटर है। 
  • ट्रेन या फ्लाइट से उतारकर आप अपनी निजी गाड़ी या टैक्सी या अन्य कोई साधन लेकर के भी जा सकते हैं। 
  • भिन्न-भिन्न स्थानों से यहां जाने के लिए बसें भी चलती हैं। 

कहां जाता है कि अगर आप शिवजी का अभिषेक करवा रहे हैं तो जल, दूध और अन्य तरल पदार्थ, तांबे के पात्र से ही अर्पित करें। तांबे के कलश से निकले हुए पानी का सनातन धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है।   

भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग

नाम ज्योतिर्लिंग
प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
द्वितीय मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
तृतीय महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
चतुर्थ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
पंचम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
षष्ठ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
सप्तम काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
अष्टम त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
नवम बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग
दशम नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
एकादश रामेश्वर ज्योतिर्लिंग
द्वादश घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग