12 ज्योतिर्लिंग का रहस्य: क्यों माने जाते हैं भगवान शिव के सबसे पवित्र धाम
ज्योतिर्लिंग जाने की कामना आप सबने की होगी और आप में से काफी लोग कुछ ज्योतिर्लिंग या सारे 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए भी होंगे पर क्या आप जानते हो आखिरकार ज्योतिर्लिंग कहते किसे है?
Published on: 10 May 2026 at 10:27 am / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

ज्योतिर्लिंग किसे कहते हैं?
ज्योतिर्लिंग का शाब्दिक अर्थ प्रकाश का लिंग या प्रकाश रूपी चिन्ह होता है और यह भगवान शिव के अनंत और दिव्य रूप को दर्शाता है। यह वह चिन्ह है जो यह बताता है कि शिव यहां स्वयं प्रकाश के रूप में प्रकट हुए थेन आपने संस्कृत में ज्योति शब्द अवश्य सुना होगा जिसका अर्थ होता है प्रकाश और लिंग जो प्रतीक का चिन्ह है, ज्योतिर्लिंग उन शब्दों से मिलकर बना हैं। भारत एक ऐसा स्थान है जहां पर 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थित है।
अगर हम सही रूप में मन तो ज्योतिर्लिंग का सही अर्थ है भोलेनाथ बाबा का अद्भुत चिन्ह।
ज्योतिर्लिंग के पीछे छुपी जानी अंजानी पौराणिक कहानियां
यह सुनकर आप चकित हो जाएंगे की इंसानों की तरह एक बार भगवान ब्रह्मा जी और विष्णु जी में भी वाद विवाद हो गया। विषय यह था कि सृष्टि के सर्वोच्च और असल रचयिता कौन है? प्रश्न अत्यंत ही कठिन था पर भगवान शिव के पास तो हर मुश्किल से मुश्किल सवाल का भी हाल होता है। ऐसे में इस दुविधा को समाप्त करने के लिए शिवजी ने एक अत्यंत बड़े स्तंभ का वेश धारण कर लिया और विष्णु जी और ब्रह्मा जी से उन्होंने कहा कि वह जाएं और स्तंभ के अंतिम छोर की तलाश करें। दोनों ने बहुत प्रयत्न किया पर वह उसे स्तंभ के अंतिम छोर को खोज ना पाए।
ब्रह्मा जी जब अंतिम छोर ढूंढ नहीं पाए तो उन्होंने शिवजी से झूठ कहा जबकि विष्णु भगवान जब अंत नहीं ढूंढ पाए तो उन्होंने आकर अपनी हार मान ली। शिव जी ने ब्रह्मा जी पर नाराज होकर उन्हें श्राप दिया। यह ज्योति स्तंभ ही आगे चलकर ज्योतिर्लिंग कहलाए।
पौराणिक कथाओं की मानी तो इसी प्रकाश स्तंभों का अंश हर ज्योतिर्लिंग में पाया जाता है। यहां उपस्थित हर लिंग शिव जी के भाव में रूप और महिमा को दर्शाता है।
12 प्रमुख शिवलिंग - स्थान और उनके नाम
भगवान शिव की 12 ज्योर्तिमयलिंग अपने में अनूठे हैं। माना जाता है कि अगर इन पवित्र ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भक्तगण सच्चे मन से करते हैं तो उन्हें अपने सारे पापों से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष के भागीदार बनते हैं।
आईए जानते हैं वह कौन से ज्योतिर्लिंग है और वह कहां स्थित है–
- प्रथम - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग जो की गुजरात में स्थित है।
- द्वितीय - मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग जो आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम जिले स्थिति और अनेक अद्भुत चमत्कारों से परिपूर्ण है।
- तृतीय - महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भस्म आरती के लिए प्रसिद्ध मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित है।
- चतुर्थ - ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे।
- पंचम - केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड की गढ़वाल हिमालय जिले में स्थित है।
- षष्ठम - भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग जो कि महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है।
- सप्तम - काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग वाराणसी में स्थित विश्व प्रसिद्ध है।
- अष्टम - त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र की नासिक जिले में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है।
- नवम - बाबा बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है।
- दशम - नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका के पास स्थित है।
- एकादश - रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग चेन्नई के पवनदीप में सेतु बांध पर स्थित है, इसके बारे में अनेकों गाथाएं हैं।
- द्वादश - घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र की औरंगाबाद जिले में स्थित है।
ज्योतिर्लिंग दर्शन का जीवन में महत्व
अपमें से शायद ज्यादा लोग यह ना जानते हो की ज्योतिर्लिंग असल में भगवान शिव के स्वयं भू रूप है, अर्थात यह रूप उनके द्वारा प्रकट किए गए हैं जहां ये ज्योति के रूप में आज भी विराजमान है। इन स्थलों पर जाकर ज्योतिर्लिंगों के दर्शन शिव भक्तों के लिए अत्यंत ही लाभदाई मानी जाती है जिनसे उन्हें केवल मानसिक शांति ही नहीं मिलती पर साथ ही साथ माना जाता है कि उनकी सारी इच्छाएं भी पूर्ण होती है।
ज्योतिर्लिंग–एक सूत्रधार जिसने राष्ट्र को जोड़ा
आज कहीं पर भी जाना आपको जितना आसान लगता है कुछ वर्षों पहले ऐसा नहीं था। खासकर जहां पर ज्योतिर्लिंग स्थापित थे उन स्थानों पर जाना मुश्किल ही नहीं कुछ क्षेत्रों में नामुमकिन था। तीर्थ यात्रियों को वहां जाने के लिए अत्यंत ही दुर्गम रास्तों से गुजरना पड़ता था। जिन में घने जंगल, खतरनाक घाटियां, खंडहर, बर्फ की चोटियों इत्यादि को पार करना पड़ता था। उदाहरण स्वरूप केदारनाथ हिमालय में कितनी ऊंचाई पर स्थित है यह हम सब जानते हैं। ऐसे में हमारे संतो ने सारे ज्योतिर्लिंग की यात्रा कर समस्त भारत वर्ष को एक ही सूत्र में पिरोने का सफल कार्य किया।
ज्योतिर्लिंगों को भारत के अलग-अलग क्षेत्र में क्यों स्थापित किया गया
यह तो आपने सुना होगा भारत में अनेक बोलियां, खान-पान, रहन-सहन, रीति रिवाज, और त्योहार मनाये जाते है। अगर आप एक ज्योतिर्लिंग पर जाओगे तो वहां पर आपको लोग अलग बोलियां में बात करते हुए मिलेंगे और दूसरे ज्योतिर्लिंग में दूसरी। जैसे की नागेश्वर में इस्तेमाल की गई भाषा काशी की भाषा से अलग है। पुराने जमाने के तौर तरीकों को माने तो तीर्थ यात्री रामेश्वरम में दर्शन करके काशी धाम जाती थी जहां वह पवित्र गंगा में स्नान करते थे और फिर वहां विश्वनाथ बाबा के दर्शन करते थे। यहां से वह गंगाजल लेकर रामेश्वरम वापस लौटते थे और वह चल रामेश्वरम की ज्योतिर्लिंग पर चढ़कर उनका अभिषेक करते थे इसके पश्चात वे वहां से प्रसाद लेकर दोबारा काशी विश्वनाथ लौटते थे और उसे प्रसाद को वहां चढ़ाते।
अब आप सोच रहे होंगे ऐसा क्यों? तथ्यों की मां ने तो ऐसा करने का आशय यह था कि भक्त भगवान का दर्शन करते हुए राष्ट्रीय एकता को भी सजक करें शायद यही कारण था कि यह ज्योतिर्लिंग किसी एक स्थान पर न होकर देश के अनेकों स्थान पर स्थापित किए गए थे
शिव ही जान शिव के अनंत नाम, शिव का काम,
भोलेनाथ बाबा को सभी का प्रणाम।