षष्ठ ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर (महाराष्ट्र): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

कहते हैं शिव मिले वहां कोई न पहुंचे जहां!

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से छठा स्थान रखता है और भगवान शिव को पूजा जाने वाला एक नामचीन स्थल है। महाराष्ट्र के पुणे राज्य के खेत के पास पहाड़ियों में यह मंदिर उपस्थित है। मोटेश्वर महादेव अथवा भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पर जब आप दर्शन हेतु जाएंगे तो निश्चित रूप में कुंभकरण के पुत्र भीम की कथा आपके सामने आएगी। यह मंदिर भीमा नदी के उद्गम में स्थित है और अगर इसकी बनावटी शैली पर ध्यान दिया जाए तो पाएंगे कि या नागर शैली से बना है। घने जंगलों से घिरा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है। 

By: RevivingCultures
Published on: 20 April 2026 at 10:17 am / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
षष्ठ ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर (महाराष्ट्र): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से जुड़े कुछ रहस्य और जानकारी:

  • भीमाशंकर मंदिर डाकिनी जो कि पुणे में स्थित है, उससे लगभग 110– 120 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • पुराणों के उल्लेख के अनुसार यहां भगवान शिव ने कुंभकरण के पुत्र भीम का संघार किया था। साथ ही साथ त्रिपुरासुर का संघार करने के दौरान शिवजी के पसीने की बूंद से ही भीमा नदी की शुरुआत हुई।
  • इस स्थान का नाम भीमाशंकर इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह पर भीमा राक्षस का वध हुआ था। 
  • काफी लोग इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जानते है क्योंकि यह पर मौज़द शिवलिंग की चौड़ाई बहुत ज्यादा हैं। 
  • कहा जाता है कि जो भी भक्त यहां आकर दर्शन करते हैं उनके केवल इस जनम के नहीं बल्कि अगले ७ जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। 
  • श्रद्धालु यहां आकर मां पार्वती के ही एक रूप, कमलजा मां के दर्शन भी कर सकते है। यहां उनका एक अलग मंदिर हैं। 
  • इस मंदिर के शिखर का निर्माण १८ वी सदी  में नाना फड़नवीस ने किया था। 
  • यह मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और रात को 9:30 बजे तक खुला रहता हैं। 

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के मुख्य दर्शन 

काफी लोग जो भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आते है वो यह नहीं जानते की दर्शन के अधिकतर समय उसपर चांदी का एक कवच चढ़ा होता है, जो उसके श्रृंगार रूप में इस्तेमाल होता हैं। 
इसी कारण बहुत कम लोगों ने इस ज्योतिर्लिंग के मूल रूप का दर्शन किया है। यह दर्शन दिन के कुछ समय में ही हो सकता है क्योंकि तभी चांदी का यह कवच ज्योतिर्लिंग से हटाया जाता है। 

  • रोज सुबह 4:30 बजे की आरती के बाद लगभग 5 से 6 बजे तक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप के दर्शन हो सकते हैं। 
  • इस दौरान भक्ति ज्योतिर्लिंग पर फूल, गंगाजल, फल, इत्यादि भी अर्पित कर के ज्योतिर्लिंग का श्रंगार कर सकते हैं। 
  • इसके तुरंत बाद ज्योतिर्लिंग पर चांदी का कवच चढ़ा दिया जाता है।
  • दोपहर के 12:00 के बाद 20 से 30 मिनट के लिए यह चांदी का कवच हटाया जाता है और इसी दौरान भक्त ज्योतिर्लिंग के मुख्य स्वरूप का दर्शन कर सकते हैं। 
  • इस बात का खास ध्यान रखें की दोपहर में भीड़ ज्यादा होने के कारण दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं।
  • मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलकर रात 9:30 बजे तक भक्तों के दर्शन हेतु खुला रहता है और केवल दोपहर में लगभग 3:00 बजे 45 मिनट के लिए ज्योतिर्लिंग के दर्शन बंद किए जाते हैं।

अगर आप भी भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की दर्शन करने का मन बना चुके हैं तो सुबह 5:00 से पहले वहां पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा दर्शन के लाभ उठाएं, जिससे आपको भीड़ भी कब मिलेगी और दर्शन भी अच्छे हो जाएंगे।  

जाने भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के पीछे की कहानी

  • कुंभकरण का पुत्र भीम जब राजा का वध करने के लिए पहुंचा तब भगवान शिव ने वहां अचानक से प्रकट होकर उनका ओर उनकी सेना को मौत के घाट उतार दिया।
  • राजा शिवजी के कृतज्ञ हो गया और उनसे अनुरोध किया कि वह वहां पर लिंग के रूप में अवतरित हो जाए। इसी कारण यह स्थान भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कहलाया। 
  • यही वह स्थान है जहां से भीमा नदी का उद्गम हुआ था जो की पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव के पसीने से अथवा त्रिपुरासुर के वध को करने के पश्चात उसके कणों से उत्पन्न हुई थी। 

18 वीं सदी में बना यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला को दर्शाता है। यहां जाने के बाद आपको पता लगेगा कि प्राचीन विश्वकर्मा अपनी कला में कितने कौशल थे।

भीमाशंकर मंदिर कब जाना चाहिए?

  • अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु। इस दौरान यहां का मौसम आत्यंतिक सुहाना होता है और साथ ही साथ ट्रैकिंग प्रेमियों को ट्रैक करने का भी एक अवसर मिलता है। 
  •  काफी लोगों को मानसून में जाना पसंद होता है इस दौरान सड़के तो फिसलन भरी होती है पर सुंदर झरने देखने जरूर मिलते हैं। 
  • महाशिवरात्रि के दिन इस जगह के दर्शन का अत्यंत महत्व माना गया है।
  •  जिन्हें अत्यधिक सर्दी और मानसून का सीजन नहीं पसंद, वह यहां पर वसंत ऋतु अर्थात फरवरी या मार्च में आ करते हैं। इस दौरान यहां ट्रैकिंग भी कर सकते हैं और अच्छे वातावरण का मजा भी ले सकते हैं। 

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग तक कैसे पहुंचे?

  • अगर आप हवाई वाहन से यात्रा कर रहे हैं तो सबसे ज्यादा निकटतम हवाई अड्डा लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर है। 
  • ट्रेन से आने वाली यात्रियों को पुणे स्टेशन पर उतरना पड़ता है। 
  • आगे की सवारी हेतु बस या अपने वाहन से यात्री आराम पूर्वक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग तक पहुंच सकते हैं। 

जहां महादेव का वास हो वहां का वातावरण अपने आप ही मनोरम, भक्तिमय और सुहावना हो जाता है। 

जीवन का सार एक ही शब्द में छुपा है, !

भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग

नाम ज्योतिर्लिंग
प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
द्वितीय मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
तृतीय महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
चतुर्थ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
पंचम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
षष्ठ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
सप्तम काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
अष्टम त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
नवम बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग
दशम नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
एकादश रामेश्वर ज्योतिर्लिंग
द्वादश घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग