Jyotirling

Baidyanath Jyotirlinga Temple Deoghar
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Baidyanath Jyotirlinga Temple Deoghar

झारखंड के देवघर में स्थित श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, स्थान और धार्मिक महत्व Reviving Cultures पर।
Kedarnath Jyotirlinga Temple Rudraprayag Uttarakhand
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Kedarnath Jyotirlinga Temple Rudraprayag Uttarakhand

उत्तराखंड में स्थित श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, यात्रा विवरण, स्थान और धार्मिक महत्व Reviving Cultures पर।
Rameshwaram Jyotirlinga Temple Ramanathapuram
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Rameshwaram Jyotirlinga Temple Ramanathapuram

तमिलनाडु में स्थित श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, स्थान और धार्मिक महत्व Reviving Cultures पर।
Grishneshwar Jyotirlinga Temple Verul
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Grishneshwar Jyotirlinga Temple Verul

महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले में स्थित श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन जानकारी, आरती समय, इतिहास और धार्मिक महत्व Reviving Cultures पर पढ़ें।
रामेश्वर ज्योतिर्लिंग या धाम (तमिलनाडु) : जाने से पहले जाने यह बातें
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रामेश्वर ज्योतिर्लिंग या धाम (तमिलनाडु) : जाने से पहले जाने यह बातें

चेन्नई में रामेश्वरम सबसे बड़ा तीर्थ स्थान है और इस स्थान विशेष का नाता भी रामायण से है। मन्नार की खाड़ी के एक द्वीप पर स्थित, रामेश्वरम, श्री राम द्वारा स्थापित एक ज्योतिर्लिंग है। पुराणों की माने तो इस ज्योतिर्लिंग का संबंध रामायण से है। माना जाता है कि श्री राम ने खुद शिवलिंग बना शिवजी की उपासना की थी। यही से असल में रामसेतु की शुरुआत हुई। यहां आने वाले भक्त रामानाथ स्वामी के मंदिर के गलियारा को देखकर निश्चित ही हक्के बल्के रह जाएंगे। हो भी क्यों न यह विश्व का सबसे बड़ा गलियारा है। रामेश्वरम 4 धाम में एक माना जाता है। इसे दक्षिण का काशी के नाम से भी संबोधित किया जाता है और यह शैव और वैष्णव दोनों के लिए धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान है। राम स्वर में सार है, महादेव का वास, रामायण से शुरू हुआ, इस ज्योतिर्लिंग का प्रवास।
षष्ठ ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर (महाराष्ट्र): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें
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षष्ठ ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर (महाराष्ट्र): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

कहते हैं शिव मिले वहां कोई न पहुंचे जहां! भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से छठा स्थान रखता है और भगवान शिव को पूजा जाने वाला एक नामचीन स्थल है। महाराष्ट्र के पुणे राज्य के खेत के पास पहाड़ियों में यह मंदिर उपस्थित है। मोटेश्वर महादेव अथवा भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पर जब आप दर्शन हेतु जाएंगे तो निश्चित रूप में कुंभकरण के पुत्र भीम की कथा आपके सामने आएगी। यह मंदिर भीमा नदी के उद्गम में स्थित है और अगर इसकी बनावटी शैली पर ध्यान दिया जाए तो पाएंगे कि या नागर शैली से बना है। घने जंगलों से घिरा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है।
प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (गुजरात): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा
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प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (गुजरात): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा

गुजरात के प्रभास क्षेत्र में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है। इसके पीछे की कहानी अगर आप जानेंगे तो निश्चय ही आश्चर्यचकित हो जाएंगे।
चतुर्थ ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा
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चतुर्थ ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा

क्या आप कभी नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर स्थित अत्यंत ही चमत्कारी और प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ पर गए हैं? जी हम बात कर रहे हैं ओंकारेश्वर की! यह प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा स्थान रखता है। इस ज्योतिर्लिंग की खास बात यह है कि यह ओम के रूप में मांधाता पर स्थित है। अगर आप यहां पर कभी गए हैं तो आप शायद जानते हो कि यह ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को मिलाकर एक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। मान्यता है कि शिव जी ने मांधाता की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया और ओंकार रूप (ॐ) में प्रकट हुए, जहां ममलेश्वर के साथ वे विराजमान हैं।
नवम ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथधाम (झारखंड): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें
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नवम ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथधाम (झारखंड): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

झारखंड के देवघर में हिंदुओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, बैद्यनाथ धाम जिसे ज्यादातर लोग बाबाधाम के नाम से जानते हैं। यह स्थल 51 शक्तिपीठों और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह शिव शक्ति के मिलन का एक प्रतीक है। यहां सबसे ज्यादा भीड़ आपको श्रावण मास में कावड़ियों की देखने को मिलेगी। सुल्तानगंज से देवघर तक गंगाजल लेकर बोल बम के जयकारे के साथ कावड़िया, बाबा का जलाभिषेक करने हेतु कावड़ लेकर यात्रा करते हैं। बैठे बाबा जटाधारी, धूनी जमाए, सबकुछ समर्पित कर चलो, सारे बोलो ॐ नमः शिवाय।
तृतीय ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें
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तृतीय ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

कालों के काल महाकाल, यह तो आप सब ने सुना होगा, पर क्या आप यह जानते हैं की महाकाल असल में भगवान शिव के ही रूप है। पुराणों की माने तो वे समय के ऊपर और काल के प्रतीक है। काफी लोगों उन्हें मृत्यु के देवता के नाम से भी संबोधित करते हैं और जानकार उन्हें शिव के रूद्र रूप का प्रतीक मानते हैं।
अष्टम ज्योतिर्लिंग त्रयंबकेश्वर (महाराष्ट्र): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा
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अष्टम ज्योतिर्लिंग त्रयंबकेश्वर (महाराष्ट्र): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा

किसी ने एक ऋषि से पूछा, “अगर सब कुछ किस्मत में लिखा जा चुका है तो फिर मंदिरों में जाकर दुआ मांगने से क्या होगा?” ऋषि ने बहुत ही प्यार से जवाब दिया और कहा, “यूं तो सब किस्मत में लिखा हुआ है पर महादेव ने कुछ पन्ने खाली छोड़े हैं और वह उन्हीं चीजों से भरते हैं जिसकी दुआ मनुष्य करता है।”
सप्तम ज्योतिर्लिंग  काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें
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सप्तम ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

काशी विश्वनाथ मंदिर, शिवजी को समर्पित बनारस की भूमि पर स्थित है। यह ज्योर्तिलिंग पुराणों की माने तो शैव परंपरा का एक अनुपम प्रमाण है। मणिकर्णिका घाट पर स्थित इस मंदिर को शक्ति पीठ भी माना जाता है।  महारानी अहल्याबाई ने 1780 में वर्तमान के काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना की थी। लोग इसे विशेश्वर के नाम से भी जानते हैं। संतो की माने तो यहां दर्शन करने वाले प्रत्येक भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।
पंचम ज्योतिर्लिंग केदारनाथ (उत्तराखंड): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा
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पंचम ज्योतिर्लिंग केदारनाथ (उत्तराखंड): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा

कभी आपने महादेव की बंद आंखों को देखकर सोचा है कि ऐसा क्यों हैं? उनकी बंद आँखें पूर्ण सजगता दर्शाती है – भीतरी और बाहरी दोनों तरह से। कहते हैं की महादेव बाहरी दुनिया को अपने अंदर के ज्ञान की परछाई समझते हैं। केदारनाथ का अर्थ है खेतों के भगवान का मंदिर। केदार अर्थात खेत और नाथ अर्थात भगवान सारे देवों में पूजनीय है।
द्वितीय ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश): दर्शन समय, कैसे पहुंचे, नियम और पूरी यात्रा गाइड
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द्वितीय ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश): दर्शन समय, कैसे पहुंचे, नियम और पूरी यात्रा गाइड

मल्लिकार्जुन शब्द भगवान शिव के एक स्वरूप को दर्शाता है और यह शक्ति तथा करुणा का प्रतीक माना जाता है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है तथा भ्रमराम्बा शक्ति मंदिर के निकट स्थित होने के कारण एक शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। मल्लिकार्जुन मंदिर अत्यंत प्राचीन स्थल है और माना जाता है कि इसका निर्माण सातवीं शताब्दी में हुआ था। यहां आने पर श्रद्धालुओं को 1000 लिंगों के दर्शन होते हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें भगवान श्रीराम ने स्थापित कराया था। आगे बढ़ने पर पांच अन्य लिंग दिखाई देते हैं, जिन्हें प्रचलित कथा के अनुसार पांडवों द्वारा स्थापित माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही एक दर्पण कक्ष दिखाई देता है, जिसमें भगवान नटराज की सुंदर मूर्तियां स्थापित हैं।
दशम ज्योतिर्लिंग नागेश्वर (द्वारका): दर्शन समय, कैसे जाएं और महत्वपूर्ण बातें
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दशम ज्योतिर्लिंग नागेश्वर (द्वारका): दर्शन समय, कैसे जाएं और महत्वपूर्ण बातें

गुजरात के द्वारका शहर और बेत द्वारका द्वीप के मध्य के स्थान पर आप अगर जाओगे तो वहां आपके दर्शन होंगे अलौकिक स्वयंभू ज्योतिर्लिंग, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की। स्तब्ध रह गए ना ! कृष्ण की नगरी में, बसे है महादेव, देखत रहे गोविंद को, निहारे महादेव।
द्वादश ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) : यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें
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द्वादश ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) : यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

ॐ केवल एक उच्चारण ही नहीं असीम शांति और भक्ति का प्रतीक हैं।  अनंत काल से महादेव अपने भक्तों पर असीम कृपा बनाए रखते है और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो की 12 ज्योतिर्लिंगों में से अंतिम माना गया है, इस बात का प्रमाण है। यह ज्योतिर्लिंग की कहानी शिव जी के भक्त घुश्मा से संबंधित है। यह ज्योतिर्लिंग वेरुल गांव में स्थित है जो की महाराष्ट्र के संभाजी नगर जिले में है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस ज्योतिर्लिंग के मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है।