विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग: शिव भक्तों के लिए नया भक्ति स्थल और अंजानी बातें
बम बम भोले की जयकार अब बिहार में चारों ओर गूंजेगी। विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, रहस्यों से ओतप्रोत, यह शिवलिंग अपनी भव्यता से सभी को आश्चर्यचकित कर देगा। 16 जनवरी 2026 को इस शिवलिंग की स्थापना के लिए पूजा आरम्भ हो गई थी।
Published on: 30 January 2026 at 12:18 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

मोतीहारी का विशेष धार्मिक आकर्षण
बिहार के मोतीहारी जिले में श्रद्धालाओं के लिए विश्व का सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना की गई हैं। इस स्थान का धार्मिक महत्व बहुत ही ज्यादा है साथ ही साथ अगर इसे कोई वास्तुकला के लहजे से भी देखे तो भी यह स्थान काफी महत्व रखता हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह जगह काफी महत्व रखता हैं।
मोतीहारी शिवलिंग के बारे में यह बात ज़रूर जाने
यह शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट है, चौड़ाई 540 फीट है, और वज़न की बात करें तो यह 2 लाख किलो से भी ज्यादा भारी है। यह एक काले ठोस पत्थर से बनाया गया हैं। इस शिवलिंग को ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया हैं। क्या आप जानते हैं इस शिवलिंग को सहस्त्र शिवलिंग की उपाधि दी गई हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आप इसे गौर से देखोगे इसमें 1008 छोटे शिवलिंग खुदे हुए नज़र आयेंगे।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| ऊंचाई | 33 फीट |
| चौड़ाई | 540 फीट |
| वजन | 2 लाख किलो से अधिक |
| पत्थर | ग्रेनाइट |
| विशेषता | 1008 शिवलिंग (सहस्त्र शिवलिंग) |
अद्भुत 45 दिन की लंबी यात्रा
क्या आपको पता है कि इस बड़े शिवलिंग को मोतीहारी से कैसे लाया गया हैं? इस शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम जिले से 25 दिनों की यात्रा करके 96 पहिए वाले ट्रक पर आखिरकार मोतिहारी लाया गया। साथ ही साथ क्या आप जानते हैं इस शिवलिंग को तराशने में 1008 कारीगरों ने 10 वर्ष लगाएं। यह एक आस्था और भक्ति का जीता जागता स्वरूप है।
रामायण मंदिर– क्या आपने इसके बारे में सुना है?
यह मंदिर तीन परंपराओं की संगम का प्रतीक है–शिव, वैष्णव, और शाक्त। कुछ लोगों को लग रहा होगा कि यह मंदिर शिवलिंग से ही जुड़ा है, पर असल में इस मंदिर का संबंध रामायण से भी है। 120 एकड़ जगह में फैले हुए इस मंदिर में मुख्य मंदिर के साथ अन्य 22 देवी देवताओं के भी मंदिर है। भव्य शिवलिंग, राम दरबार, और 10 महाविद्याओं की प्रतिमाएं भी यहां पर प्रतिष्ठित की जाएगी। अगर महावीर मंदिर ट्रस्ट की माने तो यह जगह वैष्णव, शैव और शाक्त परंपरा का एक अद्भुत संगम होगी। यहां पर कोई भी भक्त अपने आराध्य की पूजा कर सकते हैं।
क्या इस मंदिर का अयोध्या के राम मंदिर से कोई रिश्ता
यह मंदिर की जगह का चुनाव इसीलिए किया गया है क्योंकि त्रेतायुग के अनुसार इसी पथ से भगवान की भारत निकली थी, ओर मोतीहारी में जाकर वो रुके थे। यह पर एक शिवलिंग पहले से ही थी जिसकी पूजा भक्तगण आज भी करते है।
मंदिर की डिज़ाइन और बनाने का काम
अभी तो मंदिर बनने की केवल शुरुआत हुई है और उम्मीद है कि 2030 तक इस मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा। पीयूष सोमपुरा ने इस मंदिर का डिज़ाइन बनाया है। यह वो ही वास्तुशिल्प विशेषज्ञ हैं जिनका सोमनाथ मंदिर ओर राम मंदिर के डिजाइन में भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।
महावीर मंदिर ट्रस्ट इस मंदिर के निर्माण कार्य की निगरानी और समीक्षा बड़े ही ध्यान से कर रहे है ताकि शिवलिंग के धार्मिक अनुष्ठानों और सुरक्षा में कोई भी गलती न हो।
क्या आम आदमी इस विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग पर पूजा कर सकते है?
आम आदमी को पूरी तरह से छूट है कि वो इस शिवलिंग के दर्शन ओर पूजा कर सके।
मोतीहारी शिवलिंग के आरती का समय
सुबह का समय: सुबह 5 बजे से लेकर 10 बजे तक आप साधारण दिनों में यह आरती का लाभ उठा सकते हो।
शाम का समय: शाम 4 बजे से लेकर रात 9 बजे तक भक्तगण यह पर दर्शन ओर आरती का लाभ उठा सकते हैं।
आसपास की दुकानों से आप इस जगह के बारे में ओर भी जानकारी ले सकते हैं।
मोतीहारी शिवलिंग पर पूजा का सामन
- शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से किया जा सकता है।
- धतूरे का फल और फूल चढ़ा सकते हैं।
- आंक माला और बेलपत्र बाबा पर जरूर चढ़ाए।
- आप शिवजी पर अपने पसंद के फल भी प्रसाद के रूप में चढ़ा सकते है।
मोतीहारी शिवलिंग के दर्शन के दौरान क्या न करे?
वहां किसी भी नशीली वस्तुओं का सेवन न करें।
शालीन वस्त्र में पूजा करने जाते।
ॐ नाम का रतन करना न भूले।
शिव की महिमा शिव ही जाने, न जाने संसार।
ॐ नाम में सार है, भोले में भंडार।