अक्षय तृतीया को यह सब करने से जाग सकती है किस्मत
अक्षय तृतीया बैशाख के शुक्ल पक्ष के तृतीय को मनाया जाता हैं। यह दिन इतना ज्यादा शुभ माना जाता है कि इस दिन लोक पंचांग देखे बिना ही गृह प्रवेश, नए कार्य, विवाह, सोने की खरीदारी, और भी अन्य शुभ कार्य करते हैं। इस दिन को अलग अलग लोग अलग अलग तरीके से मनाते है।
लोग इस दिन पूजा, निवेश, दान, और साथ ही साथ अलग अलग तरह के पकवान बनाते है। इस दिन खिचड़ी खास रूप से बनाई जाती है। बच्चे इस दिन पतंग उड़ाते हैं।
Published on: 16 April 2026 at 1:51 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यताएं
- माना जाता है कि अगर इस दिन कोई सोने या चांदी की चीजें खरीदने से घर में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आता है। मां लक्ष्मी के वास से घर और जीवन में सुख और समृद्धि भी बढ़ती हैं।
- एक और मान्यता के अनुसार इस दिन हो सके तो जौ, अनाज, सत्तू, वस्त्र, जल, और फल का दान देने से बहुत पुण्य मिलता है।
अक्षय तृतीया से जुड़े पौराणिक महत्व
- परशुराम जी जो कि विष्णु भगवान के छठे अवतार के रूप में जा जात है उनके जन्म इसी दिन हुआ था।
- साथ ही साथ इस दिन से ही त्रेता युग की भी शुरुआत हुई थी।
- इस दिन धरती पर मां गंगा का भी अवतरण हुआ था।
- पांडव जब वनवास काल में थे, इसी दिन उन्हें अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी।
- भोलेनाथ के भक्त इस दिन का बहुत इंतजार करता है क्योंकि इसी दिन बद्रीनाथ धाम के द्वार भक्तों के लिए खुलते हैं।
अक्षय तृतीया और किस नाम से जाना जाता है?
- काफी लोग अक्षय तृतीया को आखातीज के नाम से भी जानते हैं।
- इस दिन को अबूझ मुहूर्त के नाम से भी जाना गया है।
इस दिन मन से पूजा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है यानी कि ऐसा फल जो कभी भी समाप्त न हो।
अक्षय तृतीया से जुड़ी पौराणिक कहानियां
- माना जाता है कि यह ही वो पावन दिन था जब श्री कृष्ण से मिलने उनके परम मित्र सुदामा द्वारका पहुंचे थे। सुदामा अपने मित्र के लिए चावल एक पोटली में बांध कर लाए थे। श्री कृष्ण ने बड़े ही प्यार से चावल को ग्रहण किया। पहली मुट्ठी में उनकी झोपड़ी की जगह आलिशान महल बन गया। दूसरी मुट्ठी खाते ही उस महल में अनेकों दास-दासी, हीरे- जवाहरात और हर तरह का वैभव भर गया। जब वो तीसरी मुट्ठी खाने तब उनकी रानी और पत्नी ने उन्हे रोक दिया। बिना मांगे ही उन्होंने अपने दोस्त के साथ दुख ओर निर्धनता को इसी दिन दूर कर दिया।
- एक और कथा के अनुसार पांडव वनवास के दौरान भूख से अत्यंत ही व्याकुल थे। ऐस में सम्राट युधिष्ठिर ने आप आराध्य भगवान सूर्य की पूजा की। उनकी पूज से खुश होकर भगवान सूर्य ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया। इस पात्र में जब तक द्रौपदी भोजन नहीं करती थी तब तक भोजन खत्म नहीं होता था।
- यह वो ही शुभ दिन है जिस दिन भगवान परशुराम ने धरती पर जन्म लिया था।
- इसी दिन मां गंगा का आगमन धरती पर हुआ था।
- इसी शुभ दिन वेद व्यास जी ने महाभारत को लिखने की शुरुआत की थी।
कौनसे मंदिरों में इस दिन खास पूजा होती है?
- वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में इस दिन दर्शन करने से विशेष लाभ होता है। इसी दिन आप बांके बिहारी जी के चरणों के दर्शन कर सकते हैं। उन्हें चंदन का लेप भी लगाया जाता है।
- पुरी के जगन्नाथ मंदिर में इस दिन भव्य पूजा होती है। इस दिन यहां रथ का निर्माण कार्य शुरू होता है।
- उत्तराखंड का बद्रीनाथ धाम इसी दिन भव्य पूजा के साथ खुलता है।
- आंध्र प्रदेश में स्थित सिम्हाचलम मंदिर में इस दिन नरसिंह भगवान की भव्य पूजा होती है और वहां चंदन उत्सव मनाया जाता है।
- मुंबई में स्थित मुंबा देवी मंदिर में इस दिन माता को आम का भोग लगाया जाता है और आम महोत्सव मनाया जाता है।
इन मंदिरों में भगवान के खास चरण दर्शन, रथ का निर्माण, और चंदन यात्रा का आरंभ होता है। कोशिश करें कि इस दिन आप दान जरूर करें ताकि इसका महाफल आपको ज़रूर प्राप्त होगा।
"अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं, तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया।”