आध्यात्मिक कथा वाचक - Katha Vachak

 पंडित प्रदीप मिश्रा - Pandit Pradeep Mishra

पंडित प्रदीप मिश्रा - Pandit Pradeep Mishra

पंडित प्रदीप मिश्रा जी (जन्म: 16 जून 1977) भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता, कथावाचक और शिव भक्त हैं। वे शिव महापुराण पर आधारित अपने सरल, भावपूर्ण और जनसामान्य को समझ आने वाले प्रवचनों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि पंडित प्रदीप मिश्रा जी का जन्म मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता श्री रमेश्वर दयाल मिश्रा आजीविका के लिए सड़क विक्रेता थे। सीमित साधनों के बावजूद परिवार में धार्मिक संस्कार और आध्यात्मिक वातावरण रहा। शिक्षा एवं प्रारंभिक रुचि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीहोर में ही प्राप्त की और स्नातक (Graduation) तक अध्ययन किया। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म, भक्ति और शास्त्रों की ओर था, जिसने आगे चलकर उनके आध्यात्मिक जीवन की दिशा तय की। आध्यात्मिक दीक्षा एवं मार्गदर्शन पंडित प्रदीप मिश्रा जी को इंदौर में गोवर्धन नाथ जी से दीक्षा प्राप्त हुई। दीक्षा के पश्चात उन्होंने पुराणों, विशेषकर शिव महापुराण का गहन अध्ययन किया और शिव भक्ति को अपने जीवन का केंद्र बनाया। आजीविका से आध्यात्मिक सेवा तक उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षक के रूप में की। बाद में उन्होंने सांसारिक कार्य छोड़कर पूर्णकालिक रूप से धार्मिक प्रवचन और कथा वाचन को अपनाया। प्रारंभ में उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा कही, फिर पूरी तरह शिव महापुराण पर केंद्रित हो गए। कुबेरेश्वर धाम, सीहोर पंडित प्रदीप मिश्रा जी कुबेरेश्वर धाम, सीहोर के मुख्य पुजारी हैं। यह धाम आज शिव भक्तों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक आस्था केंद्र बन चुका है, जहाँ शिव महापुराण कथा और रुद्राक्ष महोत्सव जैसे विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं। “सीहोर वाले बाबा” के रूप में पहचान डिजिटल माध्यमों जैसे यूट्यूब और फेसबुक के ज़रिए वे देश-विदेश में प्रसिद्ध हुए। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान उनके प्रवचनों ने लाखों लोगों को आध्यात्मिक संबल और सकारात्मक दृष्टि प्रदान की, जिससे वे “सीहोर वाले बाबा” के नाम से लोकप्रिय हुए। सामाजिक एवं धार्मिक कार्य उन्होंने श्री विठ्ठलेश सेवा समिति की स्थापना की, जो कथा आयोजन, भंडारे, सेवा कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे सामाजिक-धार्मिक कार्यों में सक्रिय है। उनका उद्देश्य सेवा, संस्कृति और सनातन मूल्यों का संरक्षण है। सम्मान एवं उपलब्धियाँ वर्ष 2022 में, उनके एक आध्यात्मिक कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को एकसाथ लाखों लोगों द्वारा देखे जाने के कारण उनका नाम वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड्स, लंदन में दर्ज किया गया। व्यक्तित्व एवं संदेश पंडित प्रदीप मिश्रा जी की पहचान उनकी सादगी, स्पष्ट वाणी और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा से है। वे अपने प्रवचनों के माध्यम से अध्यात्म को जीवन से जोड़कर नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का संदेश देते हैं।

 धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री - Dheerendra Krishna Shastri

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री - Dheerendra Krishna Shastri

करीब 300 साल पहले जिस मानव कल्याण और जनसेवा की परंपरा को सन्यासी बाबा ने शुरु किया था, अब इसी परंपरा को और आगे बढ़ा रहे हैं बालाजी महाराज के कृपा पात्र, श्री दादा गुरुजी महाराज के उत्तराधिकारी पूज्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, जिसे पूरी दुनिया बागेश्वर धाम सरकार के नाम से संबोधत करती है। भक्तों का कष्ट हरने भगवान खुद इस धरती पर नहीं विराजते बल्कि अपने किसी दूत को भेजते हैं। बागेश्वर धाम सरकार, बालाजी के वो भक्त हैं जिनपर उनकी असीम कृपा है। यहां जो भी बालाजी महाराज की शरण में अपनी मनोकामना लेकर आता है, बालाजी महाराज अपने परम भक्त बागेश्वर धाम सरकार के माध्यम से उसे पूर्ण करवाते हैं। बालाजी महाराज के आशीर्वाद से महाराज श्री बागेश्वर धाम सरकार की ख्याति की गवाही तो उनकी कथाओं और उनके दरबारों में श्रद्धालुओं भारी भीड़ देती है। महाराज श्री के दर्शन और उनकी एक झलक पाने के लिए ना जाने कहां कहां से श्रद्धालुगण देशभर में हो रही इनकी कथाओं में पहुंचते हैं और उनकी दिव्यवाणी का श्रवण करते हैं। 4 जुलाई 1996 को मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम गढ़ा में सरयूपारीय ब्रह्मण परिवार में पिता श्री रामकृपाल जी महाराज और भक्तिमति माता सरोज के परिवार में जन्मे पूज्य गुरुदेव का बचपन गरीबी और  तंगहाली में बीता। कर्मकांडी ब्राह्ण का परिवार था, तो पूजा पाठ में जो दक्षिणा मिल जाती उसी से 5 लोगों का परिवार चलता। ऐसे में पूज्य महाराज श्री को अपनी शिक्षा भी अधुरी छोड़नी पड़ी। तीन भाई-बहन में सबसे बड़े गुरुदेव का पूरा बचपन अपने परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था करने में ही गुज़र गया। लेकिन एक दिन बालाजी महाराज की आज्ञा और कृपा से उन्हें उनके दादा जी श्री श्री 1008 दादा गुरु जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ और दादा गुरु के आशिर्वाद और आदेश से महाराज श्री बालाजी महाराज की सेवा में जुट गए। सन्यासी बाबा और इस धाम की महिमा को दुनिया भर में फैलाया और आज इसका नतीजा है धाम पर हर मंगलवार और शनिवार को पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़। जनकल्याण और समाज कल्याण के कार्यों के क्रम में जिस तरह से मानव जाति का कल्याण होता आया है, इसके लिए युगों युगों तक गुरुदेव के संकल्प और उनकी कीर्ति याद रखी जाएगी। अपने लिए ना जी कर दूसरों के लिए जीये, दूसरों के लिए कुछ करने के संकल्प के साथ अपना पूरा समय मानवता की सेवा में दे, ऐसे महापुरुष संत को बारम बार नमन…

देवी चित्रलेखा - Shri Devi Chitralekha

देवी चित्रलेखा - Shri Devi Chitralekha

संक्षिप्त परिचय देवी चित्रलेखा जी भारत की प्रसिद्ध युवा कथावाचिका और आध्यात्मिक वक्ता हैं। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा और भक्ति मार्ग के माध्यम से देश-विदेश में लाखों भक्तों को प्रभु भक्ति से जोड़ा और व्यापक श्रद्धा प्राप्त की। पारिवारिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि देवी चित्रलेखा जी एक संस्कारवान ब्राह्मण परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता, श्री टीकाराम शर्मा और श्रीमती चमेली देवी, उन्हें बचपन से ही धर्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देते रहे। दादा-दादी से उन्हें गहरे आध्यात्मिक संस्कार विरासत में मिले, और ब्रज क्षेत्र की दिव्य संस्कृति ने उनके व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही आध्यात्मिक दिशा दी। उनका एक भाई प्रत्यक्ष शर्मा है। दीक्षा और प्रारंभिक प्रवचन केवल 4 वर्ष की आयु में उन्हें गौड़ीय वैष्णव परंपरा में दीक्षा प्राप्त हुई। 6 वर्ष की उम्र में बरसाना में दिया गया उनका पहला सार्वजनिक प्रवचन सभी को मंत्रमुग्ध कर गया। इसके बाद वृंदावन के समीप तपोवन में उनकी पहली 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसने उनके कथा जीवन की मजबूत नींव रखी। विशेष प्रतिभा और शिक्षा देवी चित्रलेखा जी ने औपचारिक रूप से कहीं से कथा या संगीत का प्रशिक्षण नहीं लिया, फिर भी वे कथा वाचन, भजन गायन और हारमोनियम वादन में अद्भुत निपुणता रखती हैं। वे शिक्षा के महत्व को भी समझती हैं और उन्होंने सामान्य पब्लिक स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी कर सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखा। विवाह और पारिवारिक जीवन 23 मई 2017 को देवी चित्रलेखा जी का विवाह माधव प्रभु जी (माधव तिवारी) से हरियाणा के पलवल में संपन्न हुआ। माधव प्रभु जी मूल रूप से बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और आध्यात्मिकता में गहरी आस्था रखते हैं। यह दंपति मिलकर समाज और धर्म सेवा में सक्रिय योगदान दे रहा है। सेवा कार्य और जीवन उद्देश्य देवी चित्रलेखा जी ने गौ सेवा धाम की स्थापना कर बीमार और घायल गायों की सेवा का कार्य प्रारंभ किया। इसके साथ-साथ वे संकीर्तन यात्राओं के माध्यम से भारत सहित अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और अफ्रीका जैसे देशों में भी भक्ति कार्यक्रम आयोजित करती हैं। उनका जीवन उद्देश्य राधा-कृष्ण भक्ति और हरे कृष्ण महामंत्र को पूरे विश्व में फैलाना है, जिसे वे गुरु आज्ञा के अनुसार पूर्ण समर्पण भाव से निभा रही हैं।

अनिरुद्ध चर्या  - Shri Aniruddhacharya

अनिरुद्ध चर्या - Shri Aniruddhacharya

पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज – संक्षिप्त परिचय पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज सनातन धर्म की ध्वजा को लेकर देश-विदेश में लाखों-करोड़ों लोगों को गौरी-गोपाल भगवान की भक्ति, सेवा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने वाले एक प्रखर कथावाचक, आध्यात्मिक गुरु और समाजसेवी हैं। अपनी अमृतमयी वाणी, सरल शैली और गहन आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहे हैं। आध्यात्मिक झुकाव एवं शिक्षा बचपन से ही पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी का झुकाव धर्म, शास्त्रों और भक्ति की ओर रहा। उन्होंने कम आयु में ही संस्कृत, वेद-पुराण और श्रीमद्भागवत का गहन अध्ययन किया। अपने गुरु श्री गिरिराज महाराज के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया तथा भगवत आचार्य कोर्स पूर्ण कर वैदिक परंपरा को आत्मसात किया। उनका विश्वास शास्त्र वचन — “तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया” — में गहराई से निहित है, जिसके अनुसार गुरु के सान्निध्य, सेवा और विनम्र जिज्ञासा से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है। कथा शैली की विशेषता पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज श्रीमद्भागवत कथा के सरल, हास्यपूर्ण और व्यावहारिक प्रवचनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। वे जीवन की सच्चाइयों, पारिवारिक संस्कारों, भक्ति और नैतिक मूल्यों को ऐसे सहज उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं कि सामान्य व्यक्ति भी धर्म के गूढ़ संदेशों को आसानी से समझ सके। यही कारण है कि युवा, बुज़ुर्ग और बच्चे सभी उनकी कथाओं से गहराई से जुड़ते हैं। समाज सेवा और मानव कल्याण अन्नपूर्णा रसोई पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज द्वारा 30 जून 2020 को अन्नपूर्णा रसोई की स्थापना की गई। यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 3000 से 5000 गरीब और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस सेवा का उद्देश्य केवल भूख मिटाना नहीं, बल्कि समाज में करुणा, समानता और मानवता की भावना को सुदृढ़ करना है। अन्नपूर्णा रसोई उन लोगों के लिए आशा का केंद्र है, जिनके पास दो वक्त के भोजन का साधन नहीं होता। यह सेवा सामाजिक न्याय और मानव कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। डिजिटल माध्यमों से धर्म प्रचार आज पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे डिजिटल मंचों के माध्यम से भी सनातन धर्म और भक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। उनके प्रवचन करोड़ों लोगों द्वारा देखे और सुने जाते हैं, जिससे नई पीढ़ी भी आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ रही है। जीवन का उद्देश्य और प्रेरणा पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज का मुख्य उद्देश्य समाज को सदाचार, भक्ति और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करना है। उनकी सादगी, स्पष्ट विचारधारा, सेवा-भाव और निष्काम भक्ति ही उन्हें जन-जन का प्रिय संत बनाती है।

आचार्य पुंडरिक गोस्वामी - Acharya Pundarik Goswami
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आचार्य पुंडरिक गोस्वामी - Acharya Pundarik Goswami

श्री पुंडरीक गोस्वामी जी आज की पीढ़ी में एक प्रमुख आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही भगवद गीता पर प्रवचन देना शुरू किया और इसके बाद अपने गहन वैदिक ज्ञान और भक्ति संदेश के माध्यम से समाज में एक अलग पहचान बनाई। उनके प्रवचन मुख्य रूप से श्री कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं पर केंद्रित होते हैं और वे श्रीमद्भागवतम, चैतन्य चरितामृत, राम कथा और भगवद गीता को सरल भाषा में समझाते हैं, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके। वे अपनी माता सरोज गर्ग और पिता राम कृपाल गर्ग की दो संतानों में सबसे बड़े हैं। बचपन से ही धर्म, शास्त्र और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर उनकी गहरी रुचि रही है। उनका उद्देश्य युवा पीढ़ी को सनातन धर्म और नैतिक मूल्यों से जोड़ना और उन्हें आध्यात्मिक चेतना की ओर प्रेरित करना है। आध्यात्मिक नेतृत्व श्री पुंडरीक गोस्वामी जी वर्तमान में श्रीमन माधव-गौडेश्वर पीठम के 38वें आचार्य हैं। वे गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रचारक और संरक्षक हैं। गोस्वामी जी ने युवाओं के लिए गोपाल क्लब और निमाई पाठशाला जैसे मंच तैयार किए, जहाँ वैदिक शिक्षा, संस्कार और भक्ति का ज्ञान दिया जाता है। उनके प्रवचन न केवल आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होते हैं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी लोगों के जीवन में लागू करने योग्य होते हैं। सामाजिक योगदान गोस्वामी जी अपने समाज सेवा कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। वे नियमित रूप से चिकित्सा शिविरों का आयोजन करते हैं, जरूरतमंदों को नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं और वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में सक्रिय रहते हैं। उनका मानना है कि भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में संतुलन स्थापित करना आवश्यक है और इसके लिए समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों का प्रचार करना अनिवार्य है। प्रवचन और कथाएँ उनकी कथाएँ विविध विषयों और दृष्टांतों से भरपूर होती हैं। वे उपमाओं, कहानियों और प्रसंगों के माध्यम से श्रोताओं के हृदय में भक्ति और प्रेम का बीज बोते हैं। गोस्वामी जी विशेष रूप से युवाओं को कृष्ण चेतना और धार्मिक मूल्यों की ओर आकर्षित करते हैं। उनकी वाणी की मधुरता और ज्ञान की गहराई श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है और उन्हें जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने के लिए प्रेरित करती है। पारिवारिक जीवन श्री पुंडरीक गोस्वामी जी का पारिवारिक जीवन उनके आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुरूप सरल और अनुशासित है। उनका विवाह श्रीमती रेणुका पुंडरीक गोस्वामी से हुआ है। परिवार में उनके पुत्र श्री भवभूति गोस्वामी और दो बेटियाँ हैं। वे अपने परिवार के साथ संतुलित जीवन जीते हैं और यह उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि आध्यात्मिक समर्पण और पारिवारिक जिम्मेदारियों का सामंजस्य संभव है।

पूज्य राजन जी महाराज - Pujya Rajan Jee Maharaj

पूज्य राजन जी महाराज - Pujya Rajan Jee Maharaj

पूज्य राजन जी महाराज (राजन तिवारी) — संक्षिप्त जीवन परिचय पूज्य राजन जी महाराज एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रामकथा वाचक, भजन गायक और आध्यात्मिक वक्ता हैं। बिहार के सिवान ज़िले से ताल्लुक रखने वाले राजन जी ने वर्ष 2011 में अपनी आध्यात्मिक यात्रा का औपचारिक आरंभ किया। वे प्राचीन रामचरितमानस की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन की समस्याओं से जोड़कर सरल और व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत करने के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि और संस्कार राजन जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका पालन-पोषण धार्मिक वातावरण में हुआ, जहाँ उनके पिता श्री शिवजी तिवारी स्वयं एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। बचपन से ही उनके घर में साधु-संतों का आना-जाना रहा, जिससे राजन जी के जीवन में भक्ति, सेवा और धर्म के संस्कार गहराई से स्थापित हुए। गुरु परंपरा और दीक्षा राजन जी महाराज को प्रारंभिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन अपने पिता से मिला। वर्ष 2004 में पूज्य संत श्री प्रेमभूषण जी महाराज से भेंट के बाद उनके जीवन में एक निर्णायक मोड़ आया, और उनके सान्निध्य में रहकर उन्होंने कथावाचन की विधिवत शिक्षा प्राप्त की।  उन्होंने चित्रकूट में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज से दीक्षा ग्रहण की, जिसने उनके आध्यात्मिक जीवन को दृढ़ दिशा प्रदान की। शिक्षा और वैचारिक विकास राजन जी ने कोलकाता के प्रतिष्ठित स्कॉटिश चर्च कॉलेज से रसायन विज्ञान (B.Sc.) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उच्च शिक्षा के बावजूद, उनका झुकाव भौतिक उपलब्धियों से अधिक आध्यात्मिक सेवा की ओर रहा, जिसने उन्हें कथावाचन के मार्ग पर अग्रसर किया। आध्यात्मिक यात्रा सन् 2011 में कोलकाता (हावड़ा) में आयोजित उनकी पहली श्रीरामकथा से उनकी सक्रिय आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ हुई, जो आगे चलकर भारत सहित विदेशों तक पहुँची। शिक्षाओं की विशेषता पूज्य राजन जी महाराज की कथाओं की विशेषता यह है कि वे: युवाओं की समस्याओं को समझते हैं। सरल भाषा में गूढ़ शास्त्रीय ज्ञान प्रस्तुत करते हैं। धर्म को जीवन व्यवहार से जोड़ते हैं। भक्ति को सकारात्मक सोच और जीवन अनुशासन से जोड़ते हैं। इसी कारण वे युवा वर्ग में विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। जीवन दृष्टि पूज्य राजन जी महाराज के लिए आध्यात्मिकता केवल प्रवचन नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है। उनका उद्देश्य समाज में भक्ति, नैतिकता, करुणा और आत्मचिंतन को जागृत करना है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन को संतुलित और सार्थक बना सके।

अच्छर्या कौशिक महाराज - Shri Acharya Kaushik Maharaj

अच्छर्या कौशिक महाराज - Shri Acharya Kaushik Maharaj

आचार्य कौशिक महाराज जी भारत के प्रसिद्ध कथावाचक, आध्यात्मिक गुरु और धार्मिक प्रवचनकर्ता हैं। वे मुख्य रूप से श्रीमद् भागवत कथा और राम कथा के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रवचन भक्ति, संस्कार और सनातन धर्म पर आधारित होते हैं। जन्म एवं प्रारंभिक जीवन आचार्य कौशिक महाराज जी का जन्म 26 मार्च 1974 को उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले के तासौड़ गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म और साधु-संतों की ओर था। आध्यात्मिक मार्ग उन्होंने वेद-पुराण, शास्त्र और सनातन धर्म का अध्ययन किया। साधु-संतों के सान्निध्य में रहकर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन को अपनाया और कथा वाचन को अपना मार्ग बनाया। गुरु परंपरा आचार्य कौशिक महाराज जी के गुरु परम पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज हैं। वे गुरु-शिष्य परंपरा को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं। सामाजिक एवं सेवा कार्य आचार्य कौशिक महाराज जी तुलसी तपोवन गौशाला जैसी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और सेवा कार्यों में सक्रिय रहते हैं। वे सेवा को ही सच्ची भक्ति मानते हैं। कथा वाचन और पहचान आज वे देश-विदेश में श्रीमद् भागवत कथा राम कथा धार्मिक प्रवचन करते हैं। उनकी वाणी सरल, भावपूर्ण और सभी को समझ आने वाली होती है।

जया किशोरी - Jaya Kishori

जया किशोरी - Jaya Kishori

दिव्य परिचय जया किशोरी जी भारत की एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता, कथावाचिका और भजन गायिका हैं। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने भक्ति, धर्म और श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से लाखों लोगों को प्रभु भक्ति से जोड़ा। उनके प्रवचनों में सरलता, भाव और जीवन से जुड़ी गहरी आध्यात्मिक प्रेरणा देखने को मिलती है। आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत जया किशोरी जी ने बचपन से ही भक्ति और आध्यात्मिकता की ओर विशेष रुझान दिखाया। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में भजन गाना शुरू किया और 7 वर्ष की आयु में कोलकाता के बसंत महोत्सव के एक सत्संग में पहली बार सार्वजनिक रूप से भजन प्रस्तुत किया। इसके बाद 10 साल की उम्र में उन्होंने पूरा सुंदरकांड अकेले गाया, जिसे सुनकर लोग अत्यंत प्रभावित हुए और यहीं से उन्हें व्यापक पहचान मिलने लगी। शिक्षा और शैक्षिक पृष्ठभूमि जया किशोरी जी ने अपनी स्कूली शिक्षा महादेवी बिड़ला वर्ल्ड एकेडमी, कोलकाता से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की पढ़ाई ओपन एजुकेशन / डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से की। बढ़ती आध्यात्मिक गतिविधियों, प्रवचनों और कथा कार्यक्रमों के कारण नियमित कॉलेज जाना उनके लिए कठिन था, इसलिए उन्होंने ओपन लर्निंग का मार्ग चुना। इस दौरान उनके माता-पिता ने पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया और उन्हें शिक्षा व आध्यात्मिक सेवा के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता की। सेवा, संदेश और उद्देश्य आज जया किशोरी जी भारत ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में भी अपने प्रवचनों और भजनों के माध्यम से लोगों को धर्म, संस्कार और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा दे रही हैं। उनका जीवन उद्देश्य भक्ति, सदाचार और प्रभु स्मरण को जन-जन तक पहुँचाना है, इसी कारण लोग उन्हें प्रेम से “किशोरी जी” और “आधुनिक युग की मीरा” कहते हैं।

रेनुका गोस्वामी - Shri Renuka Goswami

रेनुका गोस्वामी - Shri Renuka Goswami

परिचय एवं सामाजिक पहचान वे एक भारतीय धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व हैं। वे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज की पत्नी हैं और धर्म व संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आधुनिक शिक्षा और आध्यात्मिक सोच का सुंदर संतुलन उनके व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। शैक्षिक पृष्ठभूमि एवं खेल जीवन उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट (मार्केटिंग) में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की है। उच्च शिक्षा से पहले वे राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी भी रह चुकी हैं, जिससे उनके अनुशासन, समर्पण और नेतृत्व क्षमता का परिचय मिलता है। निमाई पाठशाला की स्थापना और योगदान वे निमाई पाठशाला (Nimai Pathshala) की संस्थापक हैं, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से वैदिक शिक्षा, धर्म और नैतिक मूल्यों को सरल और प्रभावशाली ढंग से बच्चों और युवाओं तक पहुँचाती है। इस पहल के माध्यम से वे आज एक लाख से अधिक बच्चों को संस्कार आधारित शिक्षा प्रदान कर रही हैं। आध्यात्मिक कार्य और जीवन उद्देश्य वर्तमान में वे एक आध्यात्मिक वक्ता के रूप में भारत और विदेशों में सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में धर्म, संस्कार, भक्ति और नैतिक मूल्यों को अपनाए, ताकि जीवन सकारात्मक, संतुलित और सार्थक बन सके।

श्री देवकीनंदन ठाकुर - Shri Devkinandan Thakur
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श्री देवकीनंदन ठाकुर - Shri Devkinandan Thakur

श्री देवकीनंदन ठाकुर महाराज जी – संक्षिप्त परिचय श्री देवकीनंदन ठाकुर महाराज जी भारत के सुप्रसिद्ध कथावाचक, आध्यात्मिक गुरु, मधुर संकीर्तन गायक और मानवसेवी संत हैं। वे श्रीमद्भागवत कथा और श्रीकृष्ण भक्ति के भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक प्रवचनों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उनकी वाणी में भक्ति, सकारात्मकता और ऐसा आत्मीय आकर्षण होता है, जो श्रोताओं को सहज ही आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ देता है। भक्तजन उन्हें प्रेमपूर्वक “ठाकुरजी” कहकर संबोधित करते हैं। आध्यात्मिक परंपरा एवं भक्ति मार्ग श्री देवकीनंदन ठाकुर जी निंबार्क संप्रदाय से संबद्ध एक जागृत संत हैं तथा श्री राधा अरविंदेश्वर के अनन्य भक्त हैं। उनका संपूर्ण जीवन सनातन धर्म, भक्ति मार्ग और सेवा भाव को समर्पित है। उनकी कथाओं और संकीर्तन में शास्त्रीय गहराई के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन के लिए उपयोगी आध्यात्मिक संदेशों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। अल्पायु में अद्भुत साधना और तपस्या केवल 13 वर्ष की अल्पायु में, अपने सद्गुरु के सान्निध्य और आशीर्वाद से, उन्होंने संपूर्ण श्रीमद्भागवत महापुराण को कंठस्थ कर लिया था। उस समय उनका साधना-अनुशासन अत्यंत कठोर था। वे प्रतिदिन तब तक न तो प्रातःकालीन भोजन करते थे और न ही दोपहर का, जब तक निर्धारित श्लोकों को पूर्ण रूप से स्मरण न कर लें। यही तपस्या, संयम और निष्ठा उनके आध्यात्मिक जीवन की मजबूत नींव बनी। संकीर्तन और कथा शैली की विशेषता श्री देवकीनंदन ठाकुर महाराज जी की संकीर्तन शैली अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी है। उनकी कथा-वाणी में भक्ति रस, सकारात्मक ऊर्जा और श्रोताओं को आत्मिक रूप से जोड़ लेने की अद्भुत क्षमता होती है। उनकी कथाएँ हर आयु वर्ग के लोगों को धर्म और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करती हैं। मानवसेवा और समाज के प्रति योगदान वे केवल एक महान वक्ता ही नहीं, बल्कि एक विनम्र मानवसेवी भी हैं। “विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट” के माध्यम से वे समाज सेवा, धर्म प्रचार और जनकल्याण के अनेक कार्यों में सक्रिय रूप से संलग्न रहते हैं। सेवा-भाव, सरलता और करुणा उनके व्यक्तित्व की प्रमुख पहचान है। जीवन का उद्देश्य श्री देवकीनंदन ठाकुर महाराज जी का मुख्य उद्देश्य लोगों को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ना, सनातन धर्म के मूल्यों का प्रचार करना और समाज में आध्यात्मिक चेतना का जागरण करना है। उनकी साधना, सेवा और सादगी ही उन्हें जन-जन का प्रिय संत बनाती है।

प्रेमानंद जी महाराज - Premanand Ji Maharaj

प्रेमानंद जी महाराज - Premanand Ji Maharaj

परिचय श्री प्रेमानंद जी महाराज एक प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक गुरु, संत और भक्तिमार्ग के उच्च कोटि के प्रवक्ता हैं। वे राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़े रसिक संत हैं और राधा-कृष्ण प्रेम-भक्ति, नाम-स्मरण, ब्रह्मचर्य और सेवा को जीवन का मूल आधार मानते हैं। उनकी साधना, शिक्षाएँ और जीवन-शैली आज के समय में भक्ति मार्ग का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। माता-पिता एवं प्रारंभिक संस्कार श्री प्रेमानंद जी महाराज का जन्म एक संस्कारवान परिवार में माता श्रीमती रमा देवी और पिता श्री शंभू पांडे के घर हुआ। बाल्यकाल से ही उन्हें धार्मिक वातावरण, सादगी और नैतिक मूल्यों के संस्कार प्राप्त हुए। बचपन से उनका झुकाव ईश्वर-भक्ति, साधना और आत्मिक चिंतन की ओर था। संन्यास ग्रहण केवल 13 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने सांसारिक जीवन का परित्याग कर संन्यास मार्ग को अपनाया। यह निर्णय उनके भीतर विद्यमान गहरी वैराग्य भावना और ईश्वर-प्राप्ति की तीव्र आकांक्षा का परिचायक था। संन्यास पथ पर उन्हें प्रारंभ में आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी नाम प्राप्त हुआ तथा आगे चलकर महावाक्य और संन्यासी जीवन स्वीकार करने के बाद वे स्वामी आनंदाश्रम कहलाए। साधना एवं तपस्वी जीवन श्री प्रेमानंद जी महाराज ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण काल वाराणसी में गंगा तट पर कठोर साधना में व्यतीत किया। वे लंबे समय तक एक पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान, मौन और आत्मचिंतन में लीन रहे। इसी अवधि में संत पंडित स्वामी श्री राम शर्मा जी के सान्निध्य ने उनके आध्यात्मिक मार्ग को और अधिक दृढ़ किया। गुरु परंपरा एवं दीक्षा उन्हें राधावल्लभ संप्रदाय के एक गोस्वामी द्वारा “शरणागति मंत्र” के माध्यम से दीक्षित किया गया। इसके पश्चात वे अपने परम गुरु श्री हित गौरांगी शरण जी महाराज (बड़े गुरुजी) के सान्निध्य में पहुँचे। गुरुजी से उन्हें “निज मंत्र” की दीक्षा प्राप्त हुई, जो सहचरी भाव और नित्य विहार रस पर आधारित है। इसी के साथ वे रसिक संत परंपरा के आधिकारिक साधक बने। वृंदावन से विशेष आत्मिक संबंध श्री प्रेमानंद जी महाराज का वृंदावन से अत्यंत गहरा आत्मिक संबंध है। वे वृंदावन को केवल निवास स्थान नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की लीलाभूमि और साधना की पूर्ण स्थली मानते हैं। उनका विश्वास है कि वृंदावन में किया गया नाम-स्मरण और भक्ति साधना साधक के जीवन को शीघ्र आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती है। श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट वर्ष 2016 में स्थापित श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट, वृंदावन एक गैर-लाभकारी संस्था है। ट्रस्ट का उद्देश्य भक्ति के साथ-साथ सेवा के माध्यम से समाज का उत्थान करना है। ट्रस्ट द्वारा प्रमुख सेवाएँ तीर्थयात्रियों हेतु आवास निःशुल्क भोजन व्यवस्था वस्त्र एवं आवश्यक सामग्री चिकित्सा सहायता साधु एवं निर्धन सेवा शिक्षाएँ एवं दर्शन श्री प्रेमानंद जी महाराज की शिक्षाओं के प्रमुख आधार हैं: हरिनाम जप और राधा-कृष्ण प्रेम-भक्ति आडंबर से दूर, अंतःशुद्धि पर बल गुरु-निष्ठा को आध्यात्मिक जीवन की रीढ़ मानना अहंकार, ईर्ष्या और दिखावे से दूर रहना ब्रह्मचर्य और संयम को आध्यात्मिक शक्ति मानना उनका स्पष्ट संदेश है: “ईश्वर को पाने का सबसे सरल और शुद्ध मार्ग प्रेम है, न कि केवल कर्मकांड।” ब्रह्मचर्य एवं संयम का व्यावहारिक दृष्टिकोण वे ब्रह्मचर्य को केवल संन्यासियों तक सीमित नहीं मानते। उनके अनुसार गृहस्थ जीवन में भी इंद्रिय संयम विचारों की पवित्रता अनुशासित दिनचर्या आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत आवश्यक है। मौन, एकांत और सादगी श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन अत्यंत सादा, मौनप्रिय और एकांत साधनामय रहा है। वे मंचीय दिखावे, अनावश्यक प्रसिद्धि, विवादों और राजनीति से सदैव दूर रहते हैं। युवाओं के लिए संदेश युवाओं को वे विशेष रूप से प्रेरित करते हैं कि: जीवन को लक्ष्यहीन न बनाएं नशा, भोग और मोबाइल-आसक्ति से बचें कम उम्र से नाम-स्मरण और सदाचार अपनाएँ ऊर्जा को साधना और सेवा में लगाएँ

 प्रशांत मुकुंद दास - Prashant Mukund Das

प्रशांत मुकुंद दास - Prashant Mukund Das

प्रशांत मुकुंद दास (Prashant Mukund Das) इस्कॉन के एक समर्पित आध्यात्मिक मार्गदर्शक तथा महामहिम गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज (HH Gopal Krishna Goswami Maharaj) के दीक्षित शिष्य हैं। पिछले 15 वर्षों से वे भारत और विदेशों में अनगिनत व्यक्तियों व परिवारों को उनके आध्यात्मिक जीवन में दिशा प्रदान कर रहे हैं। इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री में बी.एससी. और एमबीए की उपाधियों के साथ-साथ उन्होंने नोवार्टिस जैसी प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में सेवाएँ दीं। अपने विस्तृत कॉर्पोरेट अनुभव को गहन आध्यात्मिक समझ के साथ समन्वित कर उन्होंने जीवन-उन्मुख, संतुलित और व्यावहारिक शिक्षण शैली विकसित की है। वैदिक भक्तिशास्त्री के रूप में प्रशिक्षित प्रशांत जी सुख, तनाव-प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास और जीवन-कौशल जैसे विषयों पर प्रभावशाली सेमिनार देते हैं। वे यूट्यूब  Krishna TV & Reviving Cultures पर नियमित रूप से वैदिक शास्त्रों पर प्रेरक प्रवचन भी प्रस्तुत करते हैं। वर्तमान भूमिकाएँ: अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक मार्गदर्शक सीनियर काउंसलर, इस्कॉन द्वारका, दिल्ली प्रख्यात यूट्यूबर एवं भागवत कथा वक्ता इस्कॉन द्वारका मंदिर निर्माण से संबंधित दायित्व इस्कॉन द्वारका मंदिर मीडिया अनुमोदन प्राधिकारी पैनलिस्ट: टीवी9 भारतवर्ष, इंडिया टीवी, न्यूज़X संकाय सदस्य: इस्कॉन भागवत महाविद्यालय (भारत एवं नॉर्थ अटलांटा), वेदावर्सिटी आध्यात्मिक यात्रा एवं योगदान 23+ वर्षों से इस्कॉन से जुड़े हुए उपाध्यक्ष (पूर्व) – अन्नमृत (इस्कॉन फ़ूड रिलीफ फ़ाउंडेशन) 1000+ से अधिक परिवारों को मार्गदर्शन दिया — भारत, ऑस्ट्रेलिया, फ्लोरिडा, फ़िलाडेल्फ़िया, दुबई, मस्कट, ओमान, कराची, डेनवर, लंदन, कनाडा और बर्मा में मंदिर निर्माण एवं मीडिया सलाहकार – इस्कॉन द्वारका, दिल्ली शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि बी.एससी. (इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री) – दिल्ली विश्वविद्यालय एमबीए – सिम्बायोसिस इंस्टिट्यूट डिप्लोमा इन फ़ार्मास्यूटिकल स्टडीज़ (DPS) – लंदन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट भक्तिशास्त्री – एमआईएचई (मायापुर इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन) पुरस्कार एवं सम्मान स्पिरिचुअल आइकॉन ऑफ एशिया – दिल्ली एवं दुबई (2022, 2023) (आयोजक: बिज़नेशन टीवी एवं ग्लोबल एम्पायर इवेंट्स) गैलेंट्री वॉरियर अवार्ड 2024 – धर्म संरक्षण हेतु भारतीय एयर मार्शल नगेश कपूर (SYSM, PVSM, AVSM, VM) एवं रॉबिन हिबू IPS, स्पेशल कमिश्नर, दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदान (आयोजित एवं समर्थित: एक ही रास्ता NGO) प्रमाणन – यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैदराबाद एवं ISOL फ़ाउंडेशन (2024) श्रीमद् भागवतम के वैश्विक प्रसार हेतु सम्मानित

इंद्रेश उपाध्याय - Shri Indresh Upadhyay

इंद्रेश उपाध्याय - Shri Indresh Upadhyay

श्री इंद्रेश उपाध्याय जी, श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुरजी के सुपुत्र एवं भक्तिपथ के संस्थापक हैं। वे एक विनम्र और प्रेरणादायक आध्यात्मिक प्रवक्ता हैं, जिनकी शिक्षाएँ लोगों को भक्ति, सेवा और सही जीवन मार्ग की ओर प्रेरित करती हैं। उनके माध्यम से श्रीमद्भागवत कथा का संदेश सरल भाषा में जन-जन तक पहुँच रहा है। शिक्षा उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कान्हा माखन पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। इंद्रेश उपाध्याय जी एक प्रसिद्ध और प्रतिभाशाली कथा-वाचक हैं। उनकी मधुर आवाज़ और सरल कथा शैली श्रोताओं के मन को छू जाती है और उन्हें भगवान की भक्ति से जोड़ देती है। श्री इंद्रेश उपाध्याय जी का जन्म एक धार्मिक और संस्कृतिपूर्ण परिवार में हुआ, जहाँ संस्कृत और श्रीमद्भागवत पुराण का विशेष ज्ञान परंपरा से चला आ रहा है। उनके जन्म पर अनेक संत-महात्माओं ने उनके दिव्य गुणों को देखकर उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की भविष्यवाणी की। गौ सेवा इंद्रेश जी अपने जीवन में गौ सेवा और गौ पूजा को विशेष महत्व देते हैं तथा गौ माता की महिमा का निरंतर प्रचार करते हैं। उन्होंने अपना जीवन गौ सेवा को समर्पित किया है और अपने भजनों व वाणी के माध्यम से लोगों के हृदय में वृंदावन की भावना जागृत करते हैं।

 अमोघ लीला दास - Amogh Lila Das

अमोघ लीला दास - Amogh Lila Das

लाइफ़ कोच | आध्यात्मिक दृष्टा | कॉर्पोरेट मेंटर | प्रेरणादायक नेतृत्वकर्ता | प्रभावशाली वक्ता श्री अमोघ लीला दास जी एक प्रख्यात इस्कॉन (ISKCON) भिक्षु, आध्यात्मिक गुरु और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय प्रेरक वक्ता हैं। वे इस्कॉन द्वारका, दिल्ली के उपाध्यक्ष हैं और श्रीकृष्ण भक्ति को आधुनिक जीवन से जोड़ने वाले विशिष्ट आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते हैं। आध्यात्मिक पृष्ठभूमि एवं दृष्टिकोण सांसारिक जीवन त्यागकर उन्होंने भक्ति योग का मार्ग अपनाया और स्वयं को श्रीकृष्ण तथा श्रीचैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं के प्रचार में समर्पित किया। वे भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत के गूढ़ सिद्धांतों को सरल, तर्कपूर्ण और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे आम व्यक्ति भी उन्हें अपने जीवन में लागू कर सके। आध्यात्मिकता और आधुनिक नेतृत्व का संगम अमोघ लीला दास जी की विशेषता यह है कि वे वैदिक ज्ञान को नेतृत्व विकास निर्णय क्षमता कार्यस्थल संतुलन व्यक्तिगत विकास से प्रभावी रूप से जोड़ते हैं। उनके सत्र केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि जीवन और करियर दोनों को दिशा देने वाले होते हैं। कॉर्पोरेट एवं प्रोफेशनल सत्रों की विशेषताएँ ✦ समग्र नेतृत्व (Holistic Leadership) वे बताते हैं कि सच्चा नेतृत्व बाहरी सफलता के साथ आंतरिक स्थिरता से जन्म लेता है। ✦ तनाव प्रबंधन और मानसिक मजबूती भक्ति योग आधारित उपायों से वे तनाव कम करने भावनात्मक संतुलन सकारात्मक कार्य-संस्कृति को विकसित करने की व्यावहारिक विधियाँ सिखाते हैं। ✦ नैतिक और विवेकपूर्ण निर्णय वे सिखाते हैं कि मूल्य, ईमानदारी और विवेक के साथ लिए गए निर्णय ही दीर्घकालीन सफलता का आधार होते हैं। ✦ रोचक और प्रभावशाली प्रस्तुति हास्य, तर्क और वास्तविक उदाहरणों के कारण उनकी शैली अत्यंत जीवंत और यादगार होती है। सामाजिक और डिजिटल प्रभाव उनके प्रवचन और सत्र कॉर्पोरेट लीडर्स सरकारी अधिकारियों उद्यमियों युवाओं द्वारा अत्यंत सराहे जाते हैं। सोशल मीडिया पर 100 करोड़ से अधिक का वॉच टाइम उनके व्यापक प्रभाव और लोकप्रियता को दर्शाता है। युवाओं के लिए संदेश अमोघ लीला दास जी युवाओं को प्रेरित करते हैं कि: सफलता और शांति एक साथ संभव हैं करियर के साथ चरित्र निर्माण अनिवार्य है आध्यात्मिक दृष्टि व्यक्ति को भीतर से शक्तिशाली बनाती है