श्री जगन्नाथ आरती - Shree Jagannath Aarti
यह स्तोत्र भगवान जगन्नाथ (जो श्री विष्णु या भगवान कृष्ण के ही रूप हैं) की महिमा का गुणगान करता है। 'जगन्नाथ' का अर्थ है 'जगत के नाथ' अर्थात ब्रह्मांड के स्वामी। इस स्तोत्र में भगवान के अनेक नामों एवं स्वरूपों - चतुर्भुज (चार भुजाओं वाले), पद्मनाभ (नाभि में कमल वाले), निलाद्रिह (नीलांचल या नीलगिरि पर्वत पर निवास करने वाले), दीनबंधु (दीनों के मित्र), दयासिंधु (दया के सागर), बलभद्र (बलराम), बासुदेव (वसुदेव के पुत्र), माधव, मधुसूदन, मुरारि, कृष्ण, केशव, श्रीराम, गोविंद, कपिलाचार्य (कपिल मुनि अवतार) आदि का वर्णन है। इस स्तोत्र में भगवान को सर्वव्यापी, जगत के कर्ता-धर्ता, रक्षक और लक्ष्मीपति बताया गया है।