आरती - Aarti

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श्री सिद्धिविनायक मंत्र एवं आरती - Shree Siddhivinayak Mantra & Aarti

श्री सिद्धिविनायक मंत्र एवं आरती - Shree Siddhivinayak Mantra & Aarti

यह स्तोत्र भगवान श्री गणेश (गणपति) की महिमा का गुणगान है, जो 'वक्रतुंड' (टेढ़ी सूंड वाले), 'महाकाय' (विशालकाय), 'सूर्यकोटि समप्रभा' (करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी) कहे गए हैं। इसमें 'ॐ गं गणपतये नमः' बीज मंत्र है, तथा 'सिद्धिविनायक' (सिद्धि देने वाले), 'अस्तविनायक' (आठ प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के स्वामी) का स्मरण किया गया है। इस स्तोत्र में प्रसिद्ध गणेश आरती 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' का भी समावेश है, जो सर्वविदित है।

श्री जगन्नाथ आरती - Shree Jagannath Aarti

श्री जगन्नाथ आरती - Shree Jagannath Aarti

यह स्तोत्र भगवान जगन्नाथ (जो श्री विष्णु या भगवान कृष्ण के ही रूप हैं) की महिमा का गुणगान करता है। 'जगन्नाथ' का अर्थ है 'जगत के नाथ' अर्थात ब्रह्मांड के स्वामी। इस स्तोत्र में भगवान के अनेक नामों एवं स्वरूपों - चतुर्भुज (चार भुजाओं वाले), पद्मनाभ (नाभि में कमल वाले), निलाद्रिह (नीलांचल या नीलगिरि पर्वत पर निवास करने वाले), दीनबंधु (दीनों के मित्र), दयासिंधु (दया के सागर), बलभद्र (बलराम), बासुदेव (वसुदेव के पुत्र), माधव, मधुसूदन, मुरारि, कृष्ण, केशव, श्रीराम, गोविंद, कपिलाचार्य (कपिल मुनि अवतार) आदि का वर्णन है। इस स्तोत्र में भगवान को सर्वव्यापी, जगत के कर्ता-धर्ता, रक्षक और लक्ष्मीपति बताया गया है।

श्री सिद्धिविनायक आरती - Shree Siddhivinayak Aarti

श्री सिद्धिविनायक आरती - Shree Siddhivinayak Aarti

प्रस्तुत संग्रह हिंदू धर्मातील पाच प्रमुख आरती व भजनांचा आहे - श्री गणेश आरती (सुखकर्ता दुखहर्ता), श्री शंकर आरती (लवथवती विक्राळा), श्री देवी आरती (दुर्गे दुर्घट भारी), घालीन लोटांगण (संत नामदेव) व वैष्णव भजन (अच्युतं केशवं व हरे कृष्ण). यात गणपतीला विघ्नहर्ता, शंकराला संहारक व दयाळू, देवीला शक्तिस्वरूपा आणि विष्णूला पालनकर्ता म्हणून गायले आहे. ही सर्व गीते आरतीच्या वेळी, सकाळ-संध्याकाळच्या उपासनेत व विशेष सणांमध्ये गायली जातात.

श्री सूर्य देव आरती - Shree Surya Dev Aarti

श्री सूर्य देव आरती - Shree Surya Dev Aarti

सूर्यदेव की यह आरती भगवान सूर्य नारायण के तेज, करुणा, ज्ञान और लोककल्याणकारी स्वरूप का गुणगान करती है। इसमें सूर्यदेव को कश्यप ऋषि और अदिति के पुत्र, समस्त संसार के अंधकार का नाश करने वाले तथा भक्तों के हृदय को प्रकाशित करने वाले देवता के रूप में वंदित किया गया है। सनातन परंपरा में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिनकी उपासना से स्वास्थ्य, ऊर्जा, आत्मविश्वास, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। प्रातःकाल इस आरती का श्रद्धापूर्वक गायन करने से जीवन में सकारात्मकता और दिव्य चेतना का संचार होता है।

कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे - Kaisi Ye Der Lagai Maa Durge

कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे - Kaisi Ye Der Lagai Maa Durge

यह भजन माँ दुर्गा माता की शरणागति और भक्त की विनम्र प्रार्थना को दर्शाता है। इसमें भक्त अपनी कमजोरी स्वीकार करते हुए माँ से कृपा और सहारे की याचना करता है।

भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे - Bhor Bhai Din Chad Gaya Meri Ambe

भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे - Bhor Bhai Din Chad Gaya Meri Ambe

“भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे” एक प्रसिद्ध आरती भजन है, जो माता दुर्गा माता की महिमा और उनकी पूजा का वर्णन करता है। यह भजन प्रातःकालीन आरती और नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है।

श्री सरस्वती माता आरती  - Shree Saraswati Mata Aarti

श्री सरस्वती माता आरती - Shree Saraswati Mata Aarti

यह माँ सरस्वती की आरती है। सरस्वती को विद्या, ज्ञान, वाणी और कला की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे हंसवाहिनी, वीणावादिनी और श्वेतवस्त्रा रूप में पूजित हैं।

श्री धनवंतरी जी की आरती - Shri Dhanwantri Ji Ki Aarti

श्री धनवंतरी जी की आरती - Shri Dhanwantri Ji Ki Aarti

यह भगवान धन्वंतरि की आरती है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के देवता तथा भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है। समुद्र मंथन के समय वे अमृत कलश और औषधियों के ज्ञान के साथ प्रकट हुए।

श्री गंगा आरती - Shree Ganga Aarti

श्री गंगा आरती - Shree Ganga Aarti

यह माँ गंगा की आरती है। गंगा को सनातन परंपरा में पतित पावनी तथा मोक्षदायिनी माना गया है। उनका जल पवित्र और जीवनदायी है।

श्री पार्वती माता की आरती - Shree Parvati Mata Ki Aarti

श्री पार्वती माता की आरती - Shree Parvati Mata Ki Aarti

यह माँ पार्वती की आरती है। पार्वती जी को आदिशक्ति, जगजननी तथा भगवान शिव की अर्धांगिनी माना जाता है। वे सती, दुर्गा और भवानी के रूप में भक्तों का कल्याण करती हैं।

श्री तुलसी माता आरती - Shree Tulsi Mata Aarti

श्री तुलसी माता आरती - Shree Tulsi Mata Aarti

यह श्री तुलसी माता की आरती है। तुलसी को भगवान विष्णु की अति प्रिय माना गया है। सनातन परंपरा में तुलसी का स्थान अत्यंत पवित्र है तथा प्रत्येक शुभ कार्य में तुलसी का विशेष महत्व है।

श्री गायत्री माता की आरती - Shree Gayatri Mata Ki Aarti

श्री गायत्री माता की आरती - Shree Gayatri Mata Ki Aarti

यह श्री गायत्री माता की आरती है। गायत्री को वेदमाता, आदिशक्ति तथा समस्त सृष्टि की पालनकर्त्री माना गया है। वे ज्ञान, प्रकाश और आध्यात्मिक जागरण की अधिष्ठात्री देवी हैं।

श्री महाकाली आरती - Shree Mahakali Aarti

श्री महाकाली आरती - Shree Mahakali Aarti

यह माँ काली की मंगल आरती है। इसमें माता के उग्र और सौम्य दोनों रूपों का वर्णन है। भक्तजन संकट के समय माता का स्मरण कर उनकी शरण ग्रहण करते हैं।

श्री नरसिंह भगवान आरती - Shree Narasimha Bhagwan Aarti

श्री नरसिंह भगवान आरती - Shree Narasimha Bhagwan Aarti

श्री नरसिंह भगवान की यह आरती भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की महिमा का वर्णन करती है। जब असुर हिरण्यकशिपु ने अत्याचार बढ़ाए और अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान भक्ति से रोकना चाहा, तब भगवान ने आधा-मनुष्य और आधा-सिंह रूप धारण कर भक्त की रक्षा की और अधर्म का नाश किया। यह आरती उसी दिव्य लीला का स्मरण कराती है।

श्री गणेश जी की आरती - Shree Ganesh Ji Ki Aarti

श्री गणेश जी की आरती - Shree Ganesh Ji Ki Aarti

जय गणेश, जय गणेश देवा भगवान श्रीगणेश की अत्यंत प्रसिद्ध और श्रद्धापूर्ण आरती है। इसमें गणेश जी को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता के रूप में स्मरण किया गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या उत्सव की शुरुआत गणेश आरती से करने की परंपरा है, क्योंकि श्रीगणेश सभी बाधाओं को दूर कर सफलता प्रदान करते हैं।

श्री भगवत भगवान की है आरती - Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti

श्री भगवत भगवान की है आरती - Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti

श्री भगवत भगवान की यह पावन आरती भक्तों के जीवन से पापों का नाश करती है और मन को शांति प्रदान करती है। यह आरती हरि नाम, हरि धाम और प्रभु की महिमा का सुंदर वर्णन करती है।

जय जय शनि देव भक्तन हितकारी - Shani Dev Aarti

जय जय शनि देव भक्तन हितकारी - Shani Dev Aarti

श्री शनि देव आरती भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली और पावन स्तोत्र है। शनिदेव कर्मों के न्यायाधीश हैं और प्रत्येक जीव को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि आरती से साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि दोष एवं जीवन की बाधाओं में शांति प्राप्त होती है।

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन - Shree Ram Ji Ki Aarti

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन - Shree Ram Ji Ki Aarti

श्री रामचंद्र जी की आरती मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन महिमा का गान है। इस आरती के श्रद्धापूर्वक पाठ से जीवन में धर्म, सत्य, संयम और कर्तव्य का भाव जागृत होता है। भगवान श्रीराम आदर्श जीवन, त्याग, भक्ति और करुणा के प्रतीक हैं।

श्री लक्ष्मी माता की आरती - Shree Laxmi Mata Ki Aarti

श्री लक्ष्मी माता की आरती - Shree Laxmi Mata Ki Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता माँ महालक्ष्मी की अत्यंत पावन और प्रसिद्ध आरती है। इस आरती के श्रद्धापूर्वक पाठ से घर में धन, ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। माँ लक्ष्मी कृपा, वैभव और संतुलन की देवी हैं, जो अपने भक्तों को दरिद्रता और कष्टों से मुक्त करती हैं।

आरती कुंज बिहारी की - Aarti Kunj Bihari Ki

आरती कुंज बिहारी की - Aarti Kunj Bihari Ki

आरती कुंज बिहारी की भगवान श्रीकृष्ण के बाल, माधुर्य और करुणामय स्वरूप की अत्यंत पावन आरती है। इस आरती के पाठ से भक्त के हृदय में प्रेम, भक्ति और आनंद का संचार होता है। श्रीकृष्ण को कुंज बिहारी कहा जाता है, जो वृंदावन की कुंज गलियों में राधा रानी और गोपियों संग लीला करते हैं।

श्री खाटू श्याम जी की आरती - Shree Shyam Ji Aarti

श्री खाटू श्याम जी की आरती - Shree Shyam Ji Aarti

ॐ जय श्री श्याम हरे खाटू श्याम जी की अत्यंत पावन और भक्तिभाव से परिपूर्ण आरती है। खाटू श्याम जी को हारे का सहारा और कलियुग के अवतारी देवता के रूप में पूजा जाता है। इस आरती के नियमित पाठ से भक्त के जीवन के कष्ट, भय और बाधाएँ दूर होती हैं तथा मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

अहोई माता की आरती - ahoi mata ki arti

अहोई माता की आरती - ahoi mata ki arti

अहोई माता की आरती संतान की रक्षा, दीर्घायु और कल्याण के लिए की जाने वाली अत्यंत पावन आरती है। अहोई माता को मातृत्व, वात्सल्य और संतान सुख की देवी माना जाता है। इस आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से संतान से जुड़े कष्ट, भय और बाधाएँ दूर होती हैं।

आरती अम्बे तू है जगदम्बे काली - Aarti Ambe Tu Hai Jagdambe Kali

आरती अम्बे तू है जगदम्बे काली - Aarti Ambe Tu Hai Jagdambe Kali

Maa Ambe Ji Ki Aarti

जय संतोषी माता आरती - Jai Santoshi Mata Aarti

जय संतोषी माता आरती - Jai Santoshi Mata Aarti

जय संतोषी माता आरती और चालीसा माता संतोषी की करुणा, शांति और समृद्धि देने वाली पावन स्तुति है। इस आरती का श्रद्धा और भक्ति भाव से पाठ करने से जीवन के दुःख, भय और बाधाएँ दूर होती हैं।

आरती कीजे हनुमान लाला की - Aarti Kije Hanuman Lala Ki

आरती कीजे हनुमान लाला की - Aarti Kije Hanuman Lala Ki

आरती हनुमान लला की भगवान श्री हनुमान की शक्ति, भक्ति और संकट निवारण करने वाली पावन आरती है। इस आरती का श्रद्धा और भक्ति भाव से पाठ करने से जीवन के रोग, दुःख और बाधाएँ दूर होती हैं।

ओम जय शिव ओमकारा - Om Jai Shiv Omkara

ओम जय शिव ओमकारा - Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा आरती महादेव के भक्तों के लिए अत्यंत पावन और फलदायी स्तोत्र है। यह आरती भगवान शिव के त्रिगुणात्मक रूप, कैलाशधारी स्वरूप और जगपालक स्वरूप का गौरव गाती है।

श्री तुलसी आरती - Shree Tulasi Aarti

श्री तुलसी आरती - Shree Tulasi Aarti

नमो नमः तुलसी कृष्ण-प्रेयसी माता तुलसी की महिमा का अत्यंत पावन स्तोत्र है। तुलसी माता भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं और उन्हें वैष्णव भक्ति की देवी माना जाता है। इस स्तुति के माध्यम से भक्त राधा-कृष्ण की सेवा, वृंदावन वास और युगल सरकार के दिव्य दर्शन की कामना करता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती - Om Jai Jagdish Hare Aarti

ॐ जय जगदीश हरे आरती - Om Jai Jagdish Hare Aarti

ॐ जय जगदीश हरे आरती - Om Jai Jagdish Hare Aarti

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