पद्मिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा
अधिकमास( मलमास) में आने वाली एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते है जो की इस बार 27 मई को आ रही हैं। मलमास के संयोग से पद्मिनी एकादशी का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है और साथ ही व्रती को एकादशी के नियमों का पालन भी करना पड़ता है अन्यथा एकादशी व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।
Published on: 25 May 2026 at 7:44 am / Updated on: 1 June 2026 at 9:20 pm

पद्मिनी एकादशी का विशेष महत्व, पूजा विधि विधान, मंत्र, भोग और पारण का समय एवं कथा !
पद्मिनी एकादशी जिसे (कमला) एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पद्मिनी एकादशी सभी एकादशियों में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखती है और इस एकादशी के ख़ास मायने भी हैं क्यूंकि यह तीन साल में एक बार आती है अधिकमास (पुरषोतम मास ) में और यह मास और एकादशी दोनों ही भगवान् विष्णु को समर्पित है इसलिए इस एकादशी का महत्व अन्य एकादशी से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया की जो पद्मिनी एकादशी का व्रत रखता है उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है और उसे अश्वमेध यज्ञ के सामान फल प्राप्त होता है। जो पुण्य फल तीर्थ यात्रा करने से, यज्ञ आदि करने से और तपस्या करने से नहीं मिलता वह फल सिर्फ पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है।
पद्मिनी एकादशी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय
हिन्दू पंचांग के अनुसार वरुथिनी एकादशी व्रत की -
- तिथि प्रारंभ : 26 मई 2026, 5 :10 AM
- एकादशी तिथि समाप्त : 27 मई 2026, 06:21 AM
- व्रत पारण का समय : 28 मई - 05:25 AM से 7:56 AM
पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे और स्नान आदि से निवृत होकर साफ़ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- भगवान् विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा - अर्चना करें।
- धूप, दीप, गंध, और पीले पुष्पों से पूजा करें।
- भगवान् विष्णु की पूजा में तुलसी का होना बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि इसके बिना भगवान् भोग स्वीकार नहीं करते।
- व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- अगले दिन द्वादशी पर समय के अनुसार पारण करें अन्यथा यदि आपने समयानुसार व्रत का पारण नहीं किया तो आपका व्रत सम्पूर्ण नहीं माना जायेगा ।
क्या करें और क्या नहीं करना चाहिए
- इस दिन दान पुण्य अवश्य करें भगवान् को मिट्टी का जल से भरा घड़ा अर्पित करें।
- गरीबों को वस्त्र, जल , धन और अन्न का दान अवश्य करें।
- इस माह में दीप दान अवश्य करें।
- इस दिन एकादशी व्रत केवल अन्न त्यागने का नाम नहीं है। इस दिन मन, वचन और कर्म की पवित्रता का भी ध्यान रखना चाहिए. झूठ बोलने, विवाद करने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
मंत्र
व्रत रखने वाले पुरुष या स्त्री को "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय " का और महा मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए और तुलसी दल लेकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान् के नाम का जाप अवश्य करें, और रात्रि में शयन ना करके भगवान् का संकीर्तन करना चाहिए।
भोग
पद्मिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को सात्विक और शुद्ध शाकाहारी भोग अर्पित किया जाता है। मुख्य भोग में खीर, पंचामृत, ताज़ा फल, और मिश्री युक्त मक्खन शामिल हैं। भोग शुद्ध देसी घी और सेंधा नमक से बना होना चाहिए और कोई भी सात्विक मिठाई पीले रंग में हो उसका भोग जरूर लगाएं और विशेष ध्यान रखें की उसमे तुलसी दल अवश्य हो अन्यथा भगवान आपका भोग स्वीकार नहीं करेंगे क्यूंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिये हैं।
व्रत कथा
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा : अर्जुन ने पूछा- जनार्दन ! ज्येष्ठ माह के अधिकमास में कौन सी एकादशी आती है ? मैं उसका माहात्म्य सुनना चाहता हूं। उसे बताने की कृपा कीजिये ।
श्री भगवान बोले, हे राजन्! अधिकमास में शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है। वैसे तो प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।
अधिकमास या मलमास को जोड़कर वर्ष में 26 एकादशियां होती हैं। अब आगे की कथा कहता हूं यह त्रेता युग की बात है कि राजा कीतृवीर्य की कई रानियां थीं, परंतु उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। संतानहीन होने के कारण राजा और रानियाँ बहुत दुखी रहते थे। फिर एक दिन संतान की कामना से राजा अपनी सबसे प्रिये रानी पद्मिनी के साथ जंगल में तपस्या करने चले गए। कहते हैं कि तपस्या करने से राजा की हड्डियां ही शेष रह गयी परंतु तपस्या का कोई परिणाम नहीं निकला। तब रानी ने अनुसूया मां से इसका उपाय पूछा।
माता अनुसूया ने रानी से अधिकमास में शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। रानी ने पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा। व्रत की समाप्ति पर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने भगवान से कहा कि हे प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे बदले मेरे पति को वरदान दीजिये। तब भगवान ने राजा से वरदान मांगने के लिए कहा। राजा ने प्रमाण करने के बाद कहा कि आप मुझे ऐसा पुत्र प्रदान करें जो सर्वगुण सम्पन्न हो, आपके अतिरिक्त किसी से पराजित न हो और जो तीनों लोकों में आदरणीय हो। यह सुनकर भगवान ने कहा तथास्तु।
कुछ समय पश्चात रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया जो कार्तवीर्य अर्जुन के नाम से जाना गया। कालान्तर में यह बालक अत्यंत पराक्रमी राजा हुआ जिसने रावण को भी बंदी बना लिया था। इसकी तीनों लोकों में कीर्ति हो चली थी। बाद में इसे श्रीहरि विष्णु के ही अवतार परशुरामजी ने इसका वध किया था।
सो हे राजन ! जिन मनुष्यों ने मलमास शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत किया है, जो संपूर्ण कथा को पढ़ते या सुनते हैं, वे भी यश के भागी होकर विष्णुलोक को प्राप्त होते हैं। इसी के साथ पद्मिनी एकादशी व्रत कथा समाप्त होती है बोलो --
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे रांम राम राम हरे हरे