मोहिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा
हमारे सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह सभी व्रतों में श्रेष्ठ और अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में से प्रत्येक का अपना अलग महत्व होता है|
Published on: 25 April 2026 at 12:38 am / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

मोहिनी एकादशी 2026 व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा
आज हम जानेंगे वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोहिनी एकादशी के बारे में।
मोहिनी, भगवान विष्णु का अद्भुत और एकमात्र स्त्री स्वरूप है। इस रूप में भगवान इतनी आकर्षक और मोहक छवि धारण करते हैं कि कोई भी उनके प्रभाव से बच नहीं पाता। इसी दिव्य स्वरूप के कारण इस एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी पड़ा है।
मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व, पूजा विधि, मंत्र, भोग और पारण समय
• मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
• यह व्रत मन को शुद्ध करता है और मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाता है।
• मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है।
• भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा करने से सौभाग्य, आकर्षण और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
• आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है और घर में समृद्धि आती है।
• इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है—अन्न, जल, वस्त्र और फल का दान करने से कई गुना पुण्य मिलता है।
• मानसिक शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी है।
मोहिनी एकादशी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय
हिन्दू पंचांग के अनुसार मोहिनी एकादशी व्रत की:
• तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026, शाम 06:06 बजे
• तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026, शाम 06:15 बजे
• व्रत (उदय तिथि अनुसार): 27 अप्रैल 2026
• व्रत पारण का समय: 28 अप्रैल 2026, सुबह 05:43 बजे से 10:07 बजे तक
मंत्र
व्रत रखने वाले स्त्री-पुरुष को
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना चाहिए।
इसके साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भोग
मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को फल, पंचामृत, खीर और सात्विक मिठाई का भोग लगाना चाहिए। विशेष ध्यान रखें कि भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है।
मोहिनी अवतार की कथा (समुद्र मंथन प्रसंग)
पौराणिक कथा के अनुसार, जब असुरराज बलि ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, तब सभी देवता भयभीत होकर भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। भगवान ने उन्हें सलाह दी कि वे असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करें, जिससे अमृत की प्राप्ति हो सके।
असुरों को अमृत मिलने का लालच देकर इस कार्य के लिए तैयार किया गया। मंथन के अंत में जब भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, तो देवताओं और असुरों के बीच उसे पाने के लिए विवाद छिड़ गया।
स्थिति को संभालने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। इस रूप में उन्होंने अपनी मधुर वाणी और अद्भुत सौंदर्य से सभी को मोहित कर लिया।
उन्होंने कहा कि वे अमृत का निष्पक्ष वितरण करेंगी। देवता और असुर अलग-अलग बैठ गए। मोहिनी ने अपने मनमोहक रूप और भाव-भंगिमाओं से सभी को भ्रमित करते हुए अमृत केवल देवताओं को ही पिला दिया, जबकि असुर देखते रह गए।
इस प्रकार भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर देवताओं की रक्षा की।
जिस दिन भगवान ने यह मोहिनी रूप धारण किया, वह वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी, तभी से यह दिन मोहिनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मोहिनी एकादशी व्रत कथा (धृष्टबुद्धि की कथा)
एक बार धर्मराज युधिष्ठिर को धर्म का ज्ञान देते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा—
“हे धर्मराज, मैं तुम्हें एक ऐसी कथा सुनाता हूँ, जो महर्षि वशिष्ठ ने श्रीराम को सुनाई थी।”
प्राचीन काल में सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक नगर था। वहाँ धनपाल नाम का एक धनी और धार्मिक वैश्य रहता था, जो भगवान विष्णु का परम भक्त था। उसके पाँच पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटा पुत्र अत्यंत दुष्ट स्वभाव का था।
वह जुआ, मदिरा और बुरी संगति में पड़ गया। उसकी हरकतों से परेशान होकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया। वह धीरे-धीरे सब कुछ खो बैठा और जीवनयापन के लिए चोरी करने लगा।
एक दिन भटकते-भटकते वह जंगल में पहुंच गया और शिकार करके जीवन बिताने लगा।
एक बार अत्यंत भूखा-प्यासा होकर वह ऋषि कौंडिन्य के आश्रम पहुंचा। उस समय वैशाख मास चल रहा था। ऋषि गंगा स्नान करके लौट रहे थे और उनके वस्त्रों से गिरी जल की बूंदें उस व्यक्ति पर पड़ीं।
उन बूंदों के प्रभाव से उसके अंदर विवेक जागृत हुआ। वह ऋषि के चरणों में गिर पड़ा और अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछने लगा।
ऋषि कौंडिन्य ने कहा—
“तुम वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करो, इससे तुम्हारे सभी पाप समाप्त हो जाएंगे।”
उसने श्रद्धा से व्रत किया और उसके सभी पाप नष्ट हो गए। अंत में उसे विष्णुलोक की प्राप्ति हुई।
निष्कर्ष
मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत महान और कल्याणकारी माना गया है।
इस व्रत को श्रद्धा से करने और इसकी कथा सुनने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और हजार गौदान के समान फल प्राप्त होता है।
मोहिनी एकादशी व्रत कथा समाप्त हुई, बोलो
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏