कामदा एकादशी 2026 व्रत: तिथि,महात्म्य ,शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा
कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा। यह हिन्दू नववर्ष की पहली एकादशी होती है और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
Published on: 27 March 2026 at 12:25 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

शुभ मुहूर्त और समय:
एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च 2026 को सुबह 08:45 बजे।
एकादशी तिथि समाप्त: 29 मार्च 2026 को सुबह 07:46 बजे।
व्रत का पारण: 30 मार्च 2026 को सुबह 06:14 बजे से 07:09 बजे के बीच।
पूजा विधि
संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थापना: चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति रखें।
पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, फल, पंचामृत, और अक्षत अर्पित करें। विष्णु जी को तुलसी के पत्ते अत्यंत प्रिय हैं, इसे भोग में जरूर शामिल करें।
दीप और आरती: धूप-दीप जलाकर 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और अंत में विष्णु जी की आरती करें।
व्रत नियम: इस दिन सात्विक रहें और अन्न (विशेषकर चावल) का त्याग करें। अगले दिन शुभ मुहूर्त (पारण समय) में व्रत खोलें।
कामदा एकादशी का महत्व
मनोकामना पूर्ति: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, कामदा का अर्थ है इच्छाओं को पूरा करने वाली। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भक्तों की सभी अधूरी मुरादें पूरी होती हैं।
पापों का नाश: यह व्रत अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाने और कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है।
भगवान विष्णु की पूजा: इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु (श्री हरि) की पूजा की जाती है।
व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में रत्नपुर नाम के नगर में राजा पुण्डरीक का शासन था। वहां ललित नाम का एक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहते थे जो एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे।
एक दिन राजा की सभा में ललित गीत गा रहा था लेकिन उसका ध्यान अपनी पत्नी की यादों में भटक गया और सुर बिगड़ गए। इससे क्रोधित होकर राजा पुण्डरीक ने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया। ललित भयानक राक्षस बन गया और भटकने लगा।
अपने पति की इस हालत से दुखी होकर ललिता ऋष्यशृंग ऋषि के पास गई। ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने विधि-विधान से व्रत किया और उसका फल अपने पति को समर्पित कर दिया। व्रत के पुण्य प्रभाव से ललित वापस अपने दिव्य गंधर्व रूप में आ गया और दोनों को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
जो व्यक्ति भक्तिपूर्वक इस कथा को सुनता है या व्रत करता है, वह जीवन में सुख-समृद्धि पाता है और अंत में वैकुंठ धाम (मोक्ष) को प्राप्त होता है।
कामदा एकादशी व्रत कथा सम्पूर्ण हुई - बोलो हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे , हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !