दशम ज्योतिर्लिंग नागेश्वर (द्वारका): दर्शन समय, कैसे जाएं और महत्वपूर्ण बातें
गुजरात के द्वारका शहर और बेत द्वारका द्वीप के मध्य के स्थान पर आप अगर जाओगे तो वहां आपके दर्शन होंगे अलौकिक स्वयंभू ज्योतिर्लिंग, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की। स्तब्ध रह गए ना !
कृष्ण की नगरी में, बसे है महादेव,
देखत रहे गोविंद को, निहारे महादेव।
Published on: 6 March 2026 at 5:59 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग एक भूमिगत गृभगृह है और यहां मौजूद 125 फीट लंबे और 25 फीट चौड़े शिवजी की प्रतिमा ओर एक सुंदर सा तालाब इस स्थान को और आकर्षित बनाता हैं। अगर आप शिव पुराण कों पढ़ेंगे तो इस स्थान का विशेष उल्लेख मिलेगा खास कर इस मंदिर का।
रुद्र संहिता में इस मंदिर की यह खासियत बताई गई है कि अगर किसी भी भक्त ने कोई भी विषपान कर लिया हो अथवा किसी भी सर्प ने उन्हें डस लिया हो, यह मंदिर हर भक्त को सर्प से बचाने की शक्ति रखता हैं।
कौनसी नदी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के करीब है?
जब आप यहां आयेंगे तो आपको एक वृंदावन आश्रम मिलेगा और ठीक उसके नजदीक एक पुराना मंदिर है जिसका नाम जागेश्वर है। आपको यहां से लगभग डेढ़ मील तक नीचे की तरफ जाना है और देवदार के घने जंगलों को पार कर वृक्षों के बीच नदी के किनारे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कहानियां
- अगर पुराणों की माने तो नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा महादेव द्वारा दारूक राक्षस और उनके प्रिय भक्त सुप्रिय की रक्षा से जुड़ी है।
- कहां जाता है की राक्षस दारूक और उनकी पत्नी दारूका ने महादेव की घनघोर तपस्या की। शिवजी ने प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया की वे जहां चाहे वन को उठा कर ले जा सकता है। इसी कारण वो अत्यधिक शक्तिशाली हो गए और अभिमान में चूर वह ऋषि मुनियों के यज्ञों को नष्ट करने लगे।
- उनके कारागार में एक शिव भक्त थे, सुप्रिय, जो लगातार ओम नमः शिवाय का जाप और शिवजी की पूजा करते रहते थे।
- उसकी इस भक्ति से राक्षस दारूक क्रुद्ध हो उसे मारने दौड़े। तभी भगवान शिव वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में अपने भक्त को बचाने प्रकट हुएं।
- यहां महादेव ने नागों का रूप धारण कर राक्षस का वध किया था इसीलिए वह नागेश्वर यानी की नागों के ईश्वर के रूप में जाने गए।
- इस स्थान को काफी लोग दारुकवन के नाम से भी जानते हैं क्योंकि यहां दारूक राक्षस का नाश हुआ था।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन क्यों करने चाहिए?
इस स्थान की सबसे अधिक महत्वता श्रावण मास में मानी गई है। कहा जाता है कि जो भक्त सावन मास के पहले दिन इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है वह सौभाग्यशाली होता है। यहां मौजूद नागेश्वर महादेव हर तरह के रोगों का नाश करते हैं और साथ ही उनके दर्शन से सर्प दोष से भी मुक्ति मिलती हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के पहले यह बातें जरूर जाने?
अगर आप नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन को जा रहे है तो इस बात का खास ध्यान रखे कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। आप बाहर के वातावरण की फोटो ले सकते है पर मंदिर प्रांगण की नहीं।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आरती का समय
- मंगला आरती सुबह 5:00 बज से 6:00 बजे तक
- महाभोग आरती दोपहर 12:00 बजे से 12:30 तक
- संध्या आती शाम 7:00 बजे
- शयन आरती रात 8:30 से 9:00 बजे
- मंदिर बंद होते वक्त रात 9:00 बजे से 9:30 तक मंदिर बंद की आरती
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर खुलने और बंद होने का समय
- सुबह मंदिर 5:30 बजे से 12:30 बजे तक खुला रहता है
- शाम 5:00 बजे से रात 9:30 तक खुला रहता है
मंदिर खुलने और आरती का समय श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दौरान बदल सकता है। इस दौरान यहां जाने से पहले किसी लोकल से पूछताछ करके जाए।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर कैसे जाए?
- द्वारका रेलवे स्टेशन से रेल द्वारा इस मंदिर की दूरी लगभग 18 किलोमीटर है।
- निकटतम हवाई अड्डा जामनगर है जो इस मंदिर से 137-145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- अन्य निकटतम हवाई अड्डा पोरबंदर है जो इस ज्योतिर्लिंग से 95 किलोमीटर की दूरी पर है।
- ट्रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पहुंच कर आप बस या टैक्सी लेकर आसानी से इस मंदिर तक पहुंच सकते है।
यहां आते वक्त मन में श्रद्धा और प्रेम का भाव रखे। भोलेनाथ बाबा के अदभुत दर्शन होना निश्चित हैं।
हर हर महादेव का नारा दूर तक सुनाई देगा।
भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग
| नाम | ज्योतिर्लिंग |
|---|---|
| प्रथम | सोमनाथ ज्योतिर्लिंग |
| द्वितीय | मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग |
| तृतीय | महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| चतुर्थ | ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| पंचम | केदारनाथ ज्योतिर्लिंग |
| षष्ठ | भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग |
| सप्तम | काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग |
| अष्टम | त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| नवम | बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग |
| दशम | नागेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| एकादश | रामेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| द्वादश | घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग |