रामेश्वर ज्योतिर्लिंग या धाम (तमिलनाडु) : जाने से पहले जाने यह बातें
चेन्नई में रामेश्वरम सबसे बड़ा तीर्थ स्थान है और इस स्थान विशेष का नाता भी रामायण से है। मन्नार की खाड़ी के एक द्वीप पर स्थित, रामेश्वरम, श्री राम द्वारा स्थापित एक ज्योतिर्लिंग है। पुराणों की माने तो इस ज्योतिर्लिंग का संबंध रामायण से है। माना जाता है कि श्री राम ने खुद शिवलिंग बना शिवजी की उपासना की थी। यही से असल में रामसेतु की शुरुआत हुई। यहां आने वाले भक्त रामानाथ स्वामी के मंदिर के गलियारा को देखकर निश्चित ही हक्के बल्के रह जाएंगे। हो भी क्यों न यह विश्व का सबसे बड़ा गलियारा है। रामेश्वरम 4 धाम में एक माना जाता है। इसे दक्षिण का काशी के नाम से भी संबोधित किया जाता है और यह शैव और वैष्णव दोनों के लिए धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान है।
राम स्वर में सार है, महादेव का वास,
रामायण से शुरू हुआ, इस ज्योतिर्लिंग का प्रवास।
Published on: 14 March 2026 at 5:44 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

रामेश्वरम जाने से पहले यह बातें ज़रूर जाने
- इस ज्योतिर्लिंग को पावन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना श्री राम ने ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए की थी।
- इस मंदिर की बनावट की बात करें तो यह 1000 फुट लंबा ओर 650 फुट चौड़ा है। इसकी वास्तुकला अद्भुत है और इसका गलियारा विश्व के सबसे बड़े गलियारे के रूप में प्रसिद्ध है। यह गलियारा 12 वि शताब्दी से शुरू होकर श्री लंका के अनेक राजाओं ओर रामनाथपुरम के शासकों द्वारा संपन्न हुआ।
- इस मंदिर के अंदर जाने पर आपको 22 पावन तीर्थ कुंड मिलेंगे। इन कुंड के जल को अत्यंत ही पवित्र ओर लाभदायक माना जाता है। कहते हैं इसमें स्नान करने से भक्तों के सारे पाप धूल जाते हैं।
- पवन ब्रिज यहां एक ऐसा ब्रिज है जो सागर के ऊपर बना है। यह अपने में अद्भुत पर बहुत ही मनमोहक है। यह वह ही सेतु है जो बानरो द्वारा लंका तक पहुंचने के लिए बनाया गया था।
- यहां पर आपको धनुषकोडी मिलेगा जहां से लंका जाने का रास्ता शुरू होता है। कहते है यह श्री राम के धनुष से बना है।
- यह जगह बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संगम पर है। आचार्य की बात lयह है कि यहां का पानी बेहद शांत है।
- मंदिर में रामालिंगम ओर विश्लिंगम नामक दो मुख्य शिवलिंग हैं।
- यहां भारत के भूतपूर्व ओर आदरणीय राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का स्मारक है।
आन तक तो आप यह समझ ही गए होंगे कि रामेश्वरम की महत्वत्ता केवल आध्यात्मिक रूप से ही नहीं बल्कि भौगोलिक दृष्टिकोण से भी है।
रामेश्वरम मंदिर कैसे पहुंचे?
- मदुरई यह का सबसे नजदीकी हवाई और रेलवे स्टेशन है। यहां से मंदिर जाने में 3–4 घंटे लगते है।
- रामेश्वरम रेलवे स्टेशन भी मंदिर के नजदीक है। चेन्नई, त्रिचि, और कोयम्बतूर से भी आप आसानी से इस मंदिर पहुंच सकते है। पवन पुल से पार करते हुए यह सफर बहुत ही सुंदर लगता है।
- बस द्वारा भी यह काफी शहरों से जुड़ा है। तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन द्वारा बसे कन्याकुमारी, चेन्नई, ओर मदुरै से लगातार रामेश्वरम के लिए चलती है।
- आप अपने निजी वाहन या टैक्सी से भी आसानी से यह पहुंच सकते है।

रामेश्वरम मंदिर में दर्शन का समय
- मंदिर हर रोज सुबह 5 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक खुला रहता है।
- दोपहर 3 बजे से लेकर रात 9 बजे तक भी मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है।
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग दर्शन हेतु कब आए?
अक्टूबर से मार्च तक का महीना इस मंदिर के दर्शन के लिए सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है।
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना श्री राम ने क्यों की थी?
- रावण ब्राह्मण थे। जब श्री राम ने रावण का वध कर दिया तब उन्हें ब्रह्महत्या का पाप लगा। ऐसे में इस पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने रेत से ही शिवलिंग का निर्माण किया और वही महादेव की पूजा की।
- ऐसा उन्होंने ऋषि मुनियों की सलाह पर किया था क्योंकि यह प्रायश्चित का एक मात्र उपाय था।
- श्री राम ने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने को भेजा था पर उन्हें लौटने में बहुत वक्त लग रहा था। ऐसे में माता सीता ने रेत से ही रामालिंगम का निर्माण किया जिसकी स्थापना श्री राम जी ने की।
- जब हनुमान जी शिवलिंग लेकर लौटे तो उन्हें बहुत दुख हुआ। श्री राम अपने प्रिय हनुमान को दुखी कैसे देखते। इसीलिए उन्होंने कहा कि हनुमानजी के लाए हुए विश्वलिंगम की पूजा पहले की जाएगी और आज भी पहले विश्वलिंगम की ही पूजा पहले होती है।
रामेश्वरम का सही रूप में अर्थ क्या है?
रामेश्वरम अर्थात रामजी के ईश्वर– यानी कि हमारे भोलेनाथ बाबा। यह स्थान इसीलिए राम ओर शिव दोनों के भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय है।
रामेश्वरम मंदिर में दर्शन के नियम?
- आप इस मंदिर में अभिषेक, स्तुति, और आरती का आनंद प्राप्त कर सकते हैं।
रामेश्वरम मंदिर में आरती का समय
- सुबह की आरती 5:00 बजे होती है जिसे पल्लियाराई दीप आराधना कह जाता है।
- स्फटिक लिंग दीप आराधना सुबह 5:10 पर होती है।
- प्रमुख आरती सुबह 5:45 पर होती है जिसे तिरुवंतल कहा जाता है।
- सुबह 7:00 बजे विला पूजा होती है।
- सुबह के लगभग 10 बजे कालाशांति पूजा की जाती है।
- दोपहर के 12 बजे उचिकला आरती होती है।
- सायंरक्ष पूजा शाम के 6:00 बजे होती है।
- रात के 8:30 पर अर्धजाम पूजा की जाती है।
- रात को 8:45 पर शयन गृह पूजा होती है।
- यहां आपको मुख्यता ओम हर हर महादेव आरती ही सुनने में आएगी।
ओम नाम में राम बसे, राम में शिव,
राम के ईश्वर बनकर, कहलाए यह स्थान रामेश्वर।
भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग
| नाम | ज्योतिर्लिंग |
|---|---|
| प्रथम | सोमनाथ ज्योतिर्लिंग |
| द्वितीय | मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग |
| तृतीय | महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| चतुर्थ | ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| पंचम | केदारनाथ ज्योतिर्लिंग |
| षष्ठ | भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग |
| सप्तम | काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग |
| अष्टम | त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| नवम | बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग |
| दशम | नागेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| एकादश | रामेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| द्वादश | घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग |