नवम ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथधाम (झारखंड): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

झारखंड के देवघर में हिंदुओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, बैद्यनाथ धाम जिसे ज्यादातर लोग बाबाधाम के नाम से जानते हैं। यह स्थल 51 शक्तिपीठों और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह शिव शक्ति के मिलन का एक प्रतीक है। यहां सबसे ज्यादा भीड़ आपको श्रावण मास में कावड़ियों की देखने को मिलेगी। सुल्तानगंज से देवघर तक गंगाजल लेकर बोल बम के जयकारे के साथ कावड़िया, बाबा का जलाभिषेक करने हेतु कावड़ लेकर यात्रा करते हैं।
बैठे बाबा जटाधारी, धूनी जमाए,
सबकुछ समर्पित कर चलो, सारे बोलो ॐ नमः शिवाय।

By: RevivingCultures
Published on: 9 March 2026 at 4:14 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
नवम ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथधाम (झारखंड): यहां जाने से पहले जानें ये महत्वपूर्ण बातें

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कहानियां 

  • यूं तो इस स्थान से जुड़ी अनेकों कहानियां है, पर सबसे मुख्य रूप से जो जानी जाती है वो है त्रेतायुग से।
  • कहा जाता है कि लंकापति रावण ने महादेव की अखंड तपस्या की। इस तपस्या से प्रसन्न हो बाबा ने उन्हें वर मांगने को कहा।
  • रावण से उनसे उनके आत्मलिंग की मांग की। महादेव ने अनुमति तो दे दी पर एक शर्त रखी।
  • उन्होंने कहा कि अगर वो अपने राज्य पहुंचने से पहले उन्हें कही भी ज़मीन पर रख देगा तो वो वही स्थापित हो जाएंगे।
  • रावण ने उनकी शर्त मान ली और शिवलिंग को ले जाने लगा।
  • विष्णुजी, कैसे अपने महादेव को ऐसे ही जाने देते। वे बैजू नामक ग्वाले के रूप में रास्ते में रावण से मिले।
  • रावण को लघुशंका हुई तो उन्होंने बैजू से आग्रह किया कि वो शिवलिंग को कुछ देर उठा कर रखे।
  • पर बैजू ने देवघर के रास्ते में उसे ज़मीन पर रख दिया।
  • फिर क्या था शर्त के अनुसार बाबा की शिवलिंग की स्थापना वही हो गई।
  • माना जाता है यहां मां सती का हृदय गिरा था इसीलिए यह स्थान ह्रदयपीठ के रूप में मशहूर हुआ।

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का नाम बैद्यनाथ क्यों पड़ा? 

  • रावण ने महादेव की तपस्या करते वक्त एक-एक करके अपने नो सिरों की आहुति दी। वह अपने दसवें सिर की भी आहुति देने लगा। तभी महादेव उसकी तपस्या से खुश होकर स्वयं प्रकट हुए। उन्होंने उसके 9 मस्तिष्क को दोबारा लगा दिया। इसीलिए वह वैद्य यानी कि चिकित्सक कहलाए और इस धाम का नाम बैद्यनाथ धाम भी पड़ा। 
  • ऐसा भी कहा जाता है कि वैध अश्विनी कुमार को अत्यधिक शारीरिक पीड़ा थी और जब उन्होंने इस स्थान पर महादेव की पूजा की तो उनकी यह पीड़ा समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि यहां जो शिवलिंग स्थापित है वह सभी वैद्यों से बड़े हैं यानी वैद्यों के नाथ है और शायद तभी से इस मंदिर का नाम वैद्यनाथ पड़ा। 

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व

  • बहुत कम लोग जानते होंगे कि वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को काफी लोग कामना लिंग के रूप में भी जानते हैं। 
  • सावन के महीने में जब अनेकों कावड़िया अलग-अलग ज्योतिर्लिंग पर जाते हैं, बैद्यनाथ धाम में सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर इस ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती है। 

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग किस तरह पहुंचे?

  • ट्रेन से जाने वाले यात्री बैद्यनाथधाम, देवघर जंक्शन, या जेसिडी जंक्शन पहुंच कर आसानी से जा सकते हैं।
  • देवगढ़ हवाई अड्डा से, हवाई जहाज से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सबसे अधिक निकटतम पड़ेगा। 

बैद्यनाथधाम आखिर कब जाना चाहिए?

यूं तो बाबा बैद्यनाथ के दर्शन हेतु आप कभी भी जा सकते हैं क्योंकि यह हमेशा एक आध्यात्मिक गतिविधियों का स्थान रहा है। लेकिन माना जाता है सावन के महीने यानी की जुलाई और अगस्त में यहां जाना अत्यंत ही लाभदायक होता है। यह इस जगह का सबसे बड़ा पर्व है। काफी कावड़िया 108 किलोमीटर की यात्रा तय करके यहां आते हैं और सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। 

बाबा बैद्यनाथ की पूजा करते वक्त क्या चढ़ाना चाहिए? 

कहां जाता है भक्ति में शक्ति और भक्ति करने के तरीके सभी के अपने-अपने होते हैं। पर कुछ चीज ईश्वर के पसंद अनुकूल भी चढ़ाई जाती है।

  •  जैसे कि बैद्यनाथ बाबा को संध्याकालीन श्रृंगार में एक अलग तरह का चंदन से सजाया जाता है जो की घाम चंदन के नाम से जाना जाता है।
  •  घाम जिसका अर्थ होता है पसीना और आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि यह चंदन, चंदन की लकड़ी से नहीं बल्कि बेल की लकड़ी से बनाया जाता है। 
  • शाम की आरती अनेकों मंत्र उपचार और दीपमाला से होती है। चारों ओर का उच्चारण सुनाई देता है। 
  • मंदिर जाते वक्त शालीन वेशभूषा पहन कर जाएं। 

बैद्यनाथ धाम की आरती

  • सुबह की आरती 5:00 बजे से पहले शुरू हो जाती है। 
  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से लेकर दोपहर 2:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता हैं। 
  • शाम की आरती 6:00 बजे होती है। 
  • 6:00 बजे से देर रात तक मंदिर खुला रहता है। 
  • मंदिर में आरती के दौरान पारंपरिक शिवजी की आरती और ओम का उच्चारण चारों ओर सुनाई देता है। 
  • दिव्य मंत्र ध्वनि दीपमाला और शिव और शक्ति का पाठ, आरती के माहौल को अत्यंत ही मंत्रमुग्ध बना देता है। 

 इस मंदिर में जाते वक्त आपको कुछ भी तैयारी करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि आपके मन से और मुख से हर हर महादेव की गूंज अपने आप निकल आएगी एक बार सब मन से कह दे हर हर महादेव!

भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग

नाम ज्योतिर्लिंग
प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
द्वितीय मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
तृतीय महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
चतुर्थ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
पंचम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
षष्ठ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
सप्तम काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
अष्टम त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
नवम बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग
दशम नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
एकादश रामेश्वर ज्योतिर्लिंग
द्वादश घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग