चतुर्थ ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश): दर्शन समय, कैसे पहुँचें, नियम और पूरी यात्रा
क्या आप कभी नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर स्थित अत्यंत ही चमत्कारी और प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ पर गए हैं? जी हम बात कर रहे हैं ओंकारेश्वर की! यह प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा स्थान रखता है। इस ज्योतिर्लिंग की खास बात यह है कि यह ओम के रूप में मांधाता पर स्थित है। अगर आप यहां पर कभी गए हैं तो आप शायद जानते हो कि यह ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को मिलाकर एक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। मान्यता है कि शिव जी ने मांधाता की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया और ओंकार रूप (ॐ) में प्रकट हुए, जहां ममलेश्वर के साथ वे विराजमान हैं।
Published on: 16 February 2026 at 4:24 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में क्या आपको यह बात पता है?
बहुत सारी रोचक बातों से भरपूर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर एक अत्यंत प्रसिद्ध मान्यता यह है कि अगर आप सारे तीर्थ जाए पर ओंकारेश्वर ना आए तो आपके सारे तीर्थ अधूरे माने जाते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कहानियां
- अगर पुराणों की माने तो बहुत पुरानी बात है राजा मांधाता, जो कि इक्ष्वाकु वंश से थे, उन्होंने नर्मदा नदी के किनारे जाकर विंध्य पर्वत पर महादेव की तपस्या की। भगवान शिव उनकी आस्था से बहुत ही खुश हुए और उनके सम्मुख प्रकट हुए। जब महादेव ने उसे वरदान मांगने को कहा तो राजा ने प्रार्थना की कि महादेव वही पर बस जाए।
- महादेव राजा की तपस्या से प्रसन्न हो उनकी इस इच्छा को पूर्ण करते हुए ज्योति में परिवर्तित हो लिंग में समा गए। इसके बाद से इस ज्योतिर्लिंग का नाम ओंकारेश्वर पड़ा।
- अगर और एक कथा की माने तो विंध्व पर्वत ने महादेव के पार्थिव रूप की पूरे मन से पूजा की। शिवजी उनकी इस भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और वही ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के रूप में वहां प्रकट हुए।
- कहां जाता है कि भगवान शिव स्वयं यहां रोज विश्राम करने आते हैं और यहीं पर चौसर पास की बिसात बिछाई भी जाती है।
- एक बहुत ही आश्चर्य के बात जो यहां से संबंधित है वह यह कि यह ज्योतिर्लिंग एक न होकर दो हिस्सों में बटा है। एक जिसे ओंकारेश्वर कहते हैं और दूसरा जिसे ममलेश्वर कहा जाता है। ओंकारेश्वर अर्थात ओंकार और ममलेश्वर अर्थात अमलेश्वर। इन दोनों की पूजा एक साथ की जाती है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा स्थान रखने वाले इस ज्योतिर्लिंग की मान्यता दूर-दूर तक फैली है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कहां स्थित है?
यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में स्थित है और शिव भक्तों में अत्यंत ही लोकप्रिय है। कावेरी और नर्मदा जैसी पवित्र नदियों से घिरा यह ज्योतिर्लिंग पवित्र ओम का प्रतीक बनाता है।
इंदौर से इसकी दूरी 77– 78 किलोमीटर तक है।
ओंकारेश्वर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
अगर आप नर्मदा नदी पर स्थित ओंकारेश्वर द्वीप तक जाओगे तो वहां पर उसकी अनूठी आकृति को देखकर हक्के-बक रह जाओगे क्योंकि यह ओम के चिन्ह से मिलती-जुलती है। माना जाता है कि जब समुद्र मंथन किया गया था ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके तब यहां से कामधेनु नामक गाय प्रकट हुई थी। यह मंथन देवताओं और असुरों द्वारा किया गया था। उसे वक्त यह स्थान राजा विंध्य जो की महादेव के परम भक्त थे उनके शासन में था। महादेव ने उन्हें अपना दिव्य आशीर्वाद दिया। जिससे पृथ्वी पर उन्हीं का पवित्र प्रतीक यानी की ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से ओंकारेश्वर चालुक्य, मौर्य, और परमार जैसे राजवंशों से जुड़ा हुआ है जिन्होंने यहां पर एक लंबे समय के लिए शासन किया था।
ओंकारेश्वर मंदिर में जाकर यह दो चीज जरूर करें
इस मंदिर में मंगल आरती और जलाभिषेक में भाग लेना अत्यंत ही शुभदाई और पवित्र माना जाता है। ऐसे करने वाले लोगों की मनोकामना जरुर पूर्ण होती है।
ओंकार मांधाता मंदिर में जाने से पहले इन बातों का विशेष ध्यान रखें
- अगर आप परिक्रमा करना चाहते हैं तो कम से कम दो दिन हाथ में लेकर जरूर जाए।
- मंदिर में फोटोग्राफी करने की अनुमति नहीं है।
- अगर आप पूजा के फूल या प्रसाद का नारियल घर ले जाना चाहते हैं तो उसे शाम के 4:00 के पहले ले जाएं क्योंकि उसके बाद उन्हें मंदिर के बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है।
मंदिर में दर्शन और आरती का समय
- मंदिर सुबह 5:00 बजे से लेकर दोपहर 3:50 बजे तक खुला रहता है।
- शाम को मंदिर 4:15 से लेकर रात 9:30 तक खुला रहता है।
- मंगल आरती सुबह 5:00 बजे से 5:30 बजे तक होती है।
- जलाभिषेक सुबह 5:30 से लेकर दोपहर 12:25 तक चलता है।
- संध्या आरती रात 8:20 से लेकर 9:05 तक चलती है।
ओंकारेश्वर मंदिर के निकट अन्य आकर्षण
यहां आए हुए तीर्थ यात्री ओंकारेश्वर मंदिर के अलावा गौरी सोमनाथ मंदिर, ऋण मुक्तेश्वर मंदिर, आदिगुरु शंकराचार्य की गुफाएं और सिद्धनाथ मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं।
नर्मदा परिक्रमा की महत्वता
इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने वाल भक्तगण नर्मदा नदी की 7 किलोमीटर की परिक्रमा भी करते है। ऐस करना शुभ ओर आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक माना जाता हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कब जाए?
यूं तो आप इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन कभी भी कर सकते हैं पर अक्टूबर से फरवरी का महीना काफी अच्छा माना जाता है। इस वक्त मौसम भी सुहाना होता है और आप यहां की प्राकृतिक सुन्दरता का भी आनंद उठा सकते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने हेतु कौनसा रेलवे स्टेशन पहुंचे?
ट्रेन से सफर कर रह यात्रियों के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन हैं। इंदौर जंक्शन, ओंकारेश्वर से 77 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंच कर आप अपने वाहन या टैक्सी लेकर आराम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने हेतु कौनसे एयरपोर्ट जाए?
देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है।
ओंकारेश्वर पहुंच कर कौन से मंदिर का सबसे पहले दर्शन करें– ओंकारेश्वर या ममलेश्वर?
यहां आकर आपको दोनों ज्योतिर्लिंग के ही दर्शन करने पड़ते हैं। अगर आप मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में दर्शन के लिए जा रहे हैं तो आपको पहले ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते है। इसके बाद आप या तो झूला पुल या नौका से ओंकारेश्वर के दर्शन को जा सकते हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कितना वक्त लगता है?
यूं तो ओंकारेश्वर मंदिर छोटा है, लेकिन यहां हमेशा ही भीड़ होती है। ऐसे में यदि आप विआईपी दर्शन करना चाहते हैं तो प्रति व्यक्ति के हिसाब से ₹300 लगेंगे नहीं तो आप साधारणगया लाइन में लगकर अच्छे से दर्शन कर सकते हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर में पहुंचने के लिए कितनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है?
ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए 270 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।
क्या यह सच है ओंकारेश्वर मंदिर में स्नान करने की व्यवस्था है?
ओंकारेश्वर मंदिर के निकट अनेक घाट है जिसमें श्रद्धालु आसानी से स्नान करके शुद्ध हो सकते हैं वहां पर सुरक्षा को ध्यान में रखकर नौकाएं और लोहे की रेलिंग भी लगाई गई है। मंदिर के सामने मौजूद कोटि तीर्थ घाट का स्नान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है और यह कहा भी गया है कि यहां स्नान करने से सारे तीर्थ का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है।
क्या हम ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भस्म आरती देख सकते हैं?
ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान शिव की शयन आरती प्रसिद्ध है। भस्म आरती के लिए आपको उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में जाना पड़ेगा।
ओंकारेश्वर मंदिर के आसपास का स्थान अपने शांत और मनमोहक दृश्य के लिए भी प्रसिद्ध है और काफी पर्यटक यहां घूमने भी आते हैं। यहां पर महाशिवरात्रि का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
शांति और मोक्ष के रास्ते की शुरुआत कहां से हुई यह कहना मुमकिन नहीं, पर उसकी मंजिल ओंकारेश्वर मंदिर में ही है। हर हर महादेव!
भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग
| नाम | ज्योतिर्लिंग |
|---|---|
| प्रथम | सोमनाथ ज्योतिर्लिंग |
| द्वितीय | मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग |
| तृतीय | महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| चतुर्थ | ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| पंचम | केदारनाथ ज्योतिर्लिंग |
| षष्ठ | भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग |
| सप्तम | काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग |
| अष्टम | त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| नवम | बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग |
| दशम | नागेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| एकादश | रामेश्वर ज्योतिर्लिंग |
| द्वादश | घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग |