मकर संक्रांति में गंगासागर जाने से पहले यह बातें जानना न भूले

मकर संक्रांति सनातन धर्म को मानने वाले हर इंसान के लिए एक प्रमुख त्यौहार है। तिल की खुशबू और गचक की मिठास के साथ, यह त्यौहार अपने में बहुत सारे नियम और खुशियां लेकर आता है। काफी लोग इस दिन को दान देने के लिए शुभ मानते है।

गजक और रेवड़ी की मिठास, गंगासागर में स्नान, दान का महत्व और आत्मज्ञान— यही है मकर संक्रांति का सार।

By: RevivingCultures
Published on: 2 January 2026 at 12:35 am / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
मकर संक्रांति में गंगासागर जाने से पहले यह बातें जानना न भूले

मकर संक्रांति ओर गंगासागर का स्नान

मकर संक्रांति का गंगासागर से अत्यंत गहरा संबंध है। शास्त्रों और ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार इस दिन सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन बंगाल स्थित गंगासागर में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि इस पावन दिन गंगासागर में एक बार स्नान करना दस अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गोदान के समान पुण्य प्रदान करता है। साथ ही, इस दिन गंगासागर में स्नान करने से पितरों की आत्मा को भी तृप्ति प्राप्त होती है।

गंगासागर के बारे में क्या आप यह जानते है?

  • पश्चिम बंगाल में हुगली नदी बहती है, जो गंगा नदी की ही एक शाखा है।
  • एक नियमित जगह पर जाकर वह समुद्र में मिल जाती है, जिस स्थान को हम गंगासागर कहते हैं। मकर संक्रांति के दिन यहां लगाई एक डुबकी आपको कई फायदे दिला सकती हैं।
  • हर वर्ष मकर संक्रांति में यहां एक विशाल मेला लगता है जहां दुनिया भर के लोग आते है।
  • संत– महात्मा, श्रद्धालु, तीर्थयात्री, और टूरिस्ट यहां दूर दूर से इस दिन आते है और गंगा मैया में स्नान के बाद सूर्य भगवान को अर्क देकर उनके आशीर्वाद का लाभ उठाते है।

कपिलमुनि मन्दिर— क्या आप जानते है गंगासागर में कौनसा मंदिर है?

माना जाता है कि गंगासागर में एक कपिल मुनि का मंदिर हैं। अगर पौराणिक कथाओं की बात करें तो यहां विष्णु भगवान जी ने कपिल मुनि के रूप में अवतार लिया था।

गंगासागर के पीछे का रहस्य

  • कपिल मुनि इस जगह पर एक आश्रम बना कर रहते थे।
  • राजा सगर के 60 हज़ार पुत्रों ने अश्वमेध यज्ञ किया और अपने घोड़ों को छोड़ दिया जो कपिल मुनि के आश्रम आ पहुंचा। कपिल मुनि ने उन्हें एक तरफ बांध कर खाना दिया।
  • जब राजा के पुत्र वहां पहुंचे तो उन्हें लगा कपिल मुनि उनके यज्ञ में विघ्न डालना चाहते हैं इसलिए उनपर उन्होंने हमला कर दिया।
  • इस पर कपिल मुनि ने गुस्सा होकर उन्हें श्राप देकर भस्म कर दिया था।
  • आगे चलकर राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के पिंडदान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए तपस्या की ओर मां भागीरथ गंगा को स्वर्ग से बुलाया, जिससे गंगा जी का जल कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर से जा मिला।
  • इसी से उनके पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण इस स्थान का नाम गंगासागर पड़ा।

तबसे माना जाता है कि इस स्थान पर मकर संक्रांति के दिन पिंडदान और स्नान के लिए अत्यंत पवित्र हैं।

कपिल मुनि का मंदिर

  • 1437 में इस जगह पर स्वामी रामानंद जी ने आकर कपिल मुनि की मूर्ति स्थापित करी थी।
  • शायद काफी लोग यह नहीं जानते की असली मंदिर समुद्र की लहरों के कारण काफी बार नष्ट हो चुका है।
  • अगर हम इतिहास के पन्ने पलट कर देखे तो जानेंगे कि जिस मंदिर में अभी पूजा की जाती हैं वो 1973– 1974 के बीच बनाया हुआ सातवां मंदिर है।
  • इस मंदिर को बनाने में अयोध्या के हनुमानगढ़ी के आश्रम का बहुत बड़ा योगदान है।

सारे तीर्थ बार बार, गंगासागर एक बार।

यह कहावत आपने काफी बार सुनी होगी पर एक बार उधर जाकर ही आप समझ पाओगे कि ऐसा क्यों कहा जाता है।

गंगासागर मेला 2026

  • इस वर्ष गंगासागर मेला 10 जनवरी से शुरू होकर 17 जनवरी तक चलेगा।
  • स्नान का शुभ समय 14 जनवरी को शुभ से ही है।

कपिल मुनि मंदिर की आवश्यक सूचना

साधारणतया मंदिर के खुलने का समय सुबह 4 बजे ओर बंद होने का समय रात को 8 बजे है पर त्यौहार के समय समयसूची बदल सकती है। ऐसे में इन दिनों मंदिर में पूछताछ कर लेना सही होगा।

मंदिर खुलने का समय: सुबह 4:00 बजे
आरती का समय: सुबह 7:00 बजे
मंदिर बंद होने का समय: रात 8:00 बजे
प्रवेश शुल्क: मुफ्त, कोई भी मंदिर में बिना किसी शुल्क के जा सकता है।

मंदिर में अपने साथ फूल, फल, प्रसाद, चंदन, कुमकुम ओर हल्दी ले जाएं। गंगासागर में डुबकी लगाने के बाद कपिल मुनि के मंदिर में आकर दर्शन करें

इन बातों को याद रखें!

मंदिर जाते वक्त शालीन वेशभूषा रखें। अपनी मूल्यवान वस्तुओं का ध्यान रखें और बच्चे एवं बुर्जुगों का खास ध्यान रखें।

गंगासागर कैसे पहुंचे?

  • गंगासागर पहुंचने के लिए पहले आपको बंगाल पहुंचना होगा। वहां पर न्यू बैरकपुर से ट्रेन लेकर सियालदह और वहां से आगे ट्रेन लेकर कीर्णहर पहुंचाना पड़ेगा।
  • आगे जाने के लिए आपको लोकल टैक्सी या वहां के साधारण यातायात का प्रयोग करना होगा
  • आप चाहे तो बंगाल के किसी भी किनारे से अपनी गाड़ी या अन्य किसी वाहन द्वारा सीधा भी जा सकते हैं
  • साथ ही साथ काफी बंगाल के काफी सारे बस अड्डे से गंगासागर के लिए बस भी निकलती है आप वहां से बस लेकर भी गंगासागर पहुंच सकते हैं।

मकर संक्रांति– शुद्धि और मोक्ष का द्वार

सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर गंगासागर का स्नान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत ही शुभ, पवित्र, ओर फलदाई माना जाता है। अपने जीवनकाल में एक बार गंगासागर में ज़रूर स्नान करें।