Kashi Vishwanath

Bhajans
श्री काशी विश्वनाथ अष्टकम् - Shree Kashi Vishwanath Ashtakam
परिचय
श्री विश्वनाथ अष्टकम् भगवान शिव के काशी स्वरूप — श्री विश्वेश्वर / विश्वनाथ की स्तुति में रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध अष्टकम् है।
इस अष्टकम् में भगवान शिव को गंगा-जटाधारी, पार्वती सहित, त्रिनेत्रधारी, करुणामय और मोक्षदाता रूप में स्मरण किया गया है।
काशी में इसका पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
भाव-सार
इस अष्टकम् का मूल भाव यह है कि
भगवान विश्वनाथ का स्मरण और भजन करने से
पापों का नाश होता है
वैराग्य और शांति प्राप्त होती है
अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है
गायन / पाठ का समय
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त
सोमवार
महाशिवरात्रि
सावन मास
काशी यात्रा के समय
शिवलिंग पूजन के बाद
पाठ से मिलने वाला फल (फलश्रुति का भाव)
विद्या और बुद्धि की वृद्धि
ऐश्वर्य और सुख की प्राप्ति
यश और कीर्ति
देह त्याग के पश्चात शिवलोक की प्राप्ति

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महारानी अहल्याबाई ने 1780 में वर्तमान के काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना की थी। लोग इसे विशेश्वर के नाम से भी जानते हैं। संतो की माने तो यहां दर्शन करने वाले प्रत्येक भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।

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