दक्षिणेश्वर काली मंदिर- जहां होती है सारी इच्छाएं पूरी
मां काली तुम्हारी वहां भी रक्षा करती है, जहां तुमने कभी सोचा भी ना था!
कलकत्ता में हुगली नदी के किनारे टहलते हुए अगर मां काली के अद्भुत दर्शन करने हैं तो आप सीधा दक्षिणेश्वर काली मंदिर चले जाए। मां काली का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर, जिसे रानी राशमोनी ने बनाया था। यह मंदिर 1855 में बना था और इसे पूरे तरह से मां काली के भवतारिणी रूप को समर्पित किया गया है। इस मंदिर में पैर रखने के साथ-साथ आपको बंगाली वास्तुकला के साक्षात उदाहरण मिलेंगे।
आगे बढ़ने से पहले आपको यह बता दे कि यह वही स्थान है जहां स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने मां काली की साधना की थी।
Published on: 7 April 2026 at 2:57 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

दक्षिणेश्वर मंदिर में जाने के पहले यह बातें जरूर जाने
- कोलकाता में बसे इस मंदिर में मां काली भगवान शिव के ऊपर खड़ी है।
- यह मंदिर अत्यंत ही सुंदर है और नवरत्न शैली के अंतर्गत बना है।
- इस मंदिर के 9 गुंबद है।
- यह मंदिर 46 फुट चौड़ा और 100 फीट ऊंचा है।
- यहां पर सबसे अनोखी बात यह है कि जब आप मंदिर के पास गंगा के किनारे मां के दर्शन को जाएंगे तब आपको भगवान शिव की 12 छोटे मंदिर नजर आएंगे। हर शिवलिंग अपने में भव्य है।
- रामकृष्ण परमहंस जिनका नाम बंगाल में अत्यधिक आदर से लिया जाता है वह कथित तौर से यहां के पुजारी थे।
- कहानियों की माने तो इस मंदिर में एक पंचवटी है। इस पंच पवित्र वर्षों के समूह के नीचे ही रामकृष्ण परमहंस ने मां काली की साधना की थी और यह माना जाता है कि उन्होंने यहीं पर उनके साक्षात दर्शन किए थे।
दक्षिणेश्वर मंदिर खुलने और बंद होने का समय
- दक्षिणेश्वर मंदिर सुबह 6:00 बजे खुलता है और दोपहर के 12:30 बजे बंद होता है।
- यह मंदिर दोबारा दोपहर में 3:00 बजे खुल कर रात को 8:30 बजे बंद होता है।
- काली पूजा, नवरात्रि, पोयला बैशाख, और अन्य मुख्य दिनों में इसके खुलने और बंद होने का समय बदलता रहता है।
दक्षिणेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे?
- कोलकाता शहर में पहुंचने के बाद अगर आप ट्रेन से यहां आना चाहते हैं तो सियालदह डानकुनी लाइन पर काफी लोकल ट्रेन है जोआपको दक्षिणेश्वर स्टेशन तक पहुंचा देगी।
- कोलकाता शहर में आप आसानी से मेट्रो के द्वारा मंदिर परिसर में पहुंच सकते हैं।
- काफी लोकल बसें भी श्यामबाजार और अन्य रास्तों से मंदिर तक चलती है।
- निजी गाड़ी या टैक्सी से भी आप मंदिर तक आसानी से पहुंच सकतेहैं।
लोगों की माने तो कोलकाता की यात्रा दक्षिणेश्वर में मां काली के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है। यह मंदिर इतना सुंदर है की भक्तों का पूरी तरह से मन मोह लेता है।
दक्षिणेश्वर मंदिर से जुड़ी कहानी
कहानी शुरू करने से पहले यह बता दे कि इस मंदिर का पूरा इतिहास संत रामकृष्ण परमहंस और उनकी पत्नी शारदा देवी से जुड़ा है। आध्यात्मिक इतिहास के साथ-साथ इस मंदिर का राजनीतिक इतिहास भी है।
- 1855 में रानी राशमोनी इस मंदिर की स्थापना की थी। रानी, मां काली की परम भक्त थी।
- कहानियां की माने तो रानी, मां काली के दर्शन के लिए वाराणसी जाने वाली थी किंतु उसे एक दिन पूर्व ही मां ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि वह वहां जाने से अच्छा गंगा के किनारे उनका मंदिर बनाएं।
- फिर क्या था रानी ने तुरंत मंदिर निर्माण का आदेश दिया।।
- मंदिर के लिए काफी जमीनों का निरीक्षण किया गया पर कोई भी रानी को अनुकूल नहीं लगा।
- आखिरकार गंगा के पूर्वी तट पर एक 20 एकड़ भूमि रानी को पसंद आई।
- इस भूमि के एक हिस्से में एक मुस्लिम कब्रिस्तान था जिसकी आकृति कछुए के कूबड़ जैसी लगती थी और माना जाता था कि वह तंत्र परंपराओं के लिए अत्यंत उपयुक्त थी।
- इस भूमि का एक और हिस्सा एक यूरोपीय व्यक्ति जॉन हिस्ट्री का था और यह हिस्सा साहिबान बगीचे के नाम से मशहूर था।
- इस मंदिर को बनने में 7 साल लगे और इस पर कुल खर्च ₹9 लख रुपए का आया था।
- मूर्ति स्थापना के लिए 31 मई 1855 का दिन तय किया गया। स्नान यात्रा का यह दिन हिंदुओं में अत्यंत की शुभ माना जाता है।
- दूर-दूर से ब्राह्मण इस उत्सव में सम्मिलित होने के लिए आए।
- इस मंदिर का नाम श्री श्री जगदीश्वरी महाकाली मंदिर रखा गया।
- 1857 में जब बंगाल में सिपाही विद्रोह हुआ तब रानी ने इस मंदिर के द्वार आगंतुकों लिए खोल दिए। भारत के इतिहास के पन्ने पलटने पर यह कदम भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख भाग भी माना जाता है।
- अगर आप इस मंदिर की वास्तुकला को ध्यान से देखेंगे तो उसमें भी आपको बंगाल की वास्तुकला शैली नजर आएगी।
- 1800 के दशक में यहां एक छोटा सा गांव था जो कि जंगलों से घिरा था।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर और रामकृष्ण परमहंस का संबंध
- इस मंदिर के पुजारी श्री रामकृष्ण परमहंस के बड़े भाई रामकुमार चट्टोपाध्याय नियुक्त हुए थे।
- आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि रामकृष्ण परमहंस का असल नाम गदाधर है।
- मंदिर में रामकुमार की मदद रामकृष्ण और उनके भतीजे हृदय किया करते थे।
- मंदिर के उद्घाटन की एक वर्ष पूर्व ही मंदिर के पुजारी की मृत्यु हो गई और सारी जिम्मेदारी श्री रामकृष्ण परमहंस के कंधों पर आ गई।
- उनकी पत्नी शारदा देवी ने मंदिर की जिम्मेदारी निभाने में पूरा साथ दिया।
- मंदिर में शारदा देवी संगीत कक्ष के दक्षिण में रहती थी। आज भी वह स्थान अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है।
- रामकृष्ण परमहंस ने मां काली की सेवा में 30 वर्ष निकाले इस दौरान उन्होंने बंगाल में सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में भी काफी मदद की।
- यह वही स्थान है जहां रामकृष्ण और उनकी पत्नी मां शारदा को मां काली के दर्शन हुए थे।
- मंदिर मैं आपको आज भी श्री रामकृष्ण परमहंस और मां शारदा के दर्शन मां काली की मूर्ति के पास ही हो जाएंगे।
- अगर आप वहां पर बैठकर मां काली के साक्षात दर्शन के वार्तालाप को सुनेंगे तो आपको न केवल उनके होने का आभास होगा बल्कि श्री रामकृष्ण परमहंस और मां शारदा भी साक्षात नजर आएंगे।
दक्षिणेश्वर काली मन्दिर और रानी राशमोनी
रानी रश्मोनी चाहती थी कि इस मंदिर में हर वर्ग के लोग आए और इसी कारण यह मंदिर आज हर तरह की तीर्थ यात्रियों के लिए खुला है।
मंदिर के उद्घाटन के 5 वर्ष बाद ही फरवरी 1861 में उनका देहांत हो गया। इस मंदिर के रखरखाव के लिए उन्होंने दिनाजपुर में एक संपत्ति रख छोड़ी थी। यह जगह आज बांग्लादेश में है। आश्चर्य की बात यह है कि जिस दिन उन्होंने कानूनी दस्तावेज सौंपे उसी दिन उनकी मृत्यु भी हो गई।
मां काली की पूजा कैसे करें
- मां काली को लाल फूल अति प्रिय है इसीलिए वहां जाते वक्त जवा के लाल फूल की माला मां के लिए जरूर ले जाए।
- मां को नारियल और पेड़े का प्रसाद चढ़ाएं।
- मां को लाल रंग अति प्रिय है इसलिए उनके दर्शन अगर हो सके तो लाल वस्त्र में करें।
- मां पर विश्वास आपको आध्यात्मिक ज्ञान, मन की शांति, और सफलता की ओर ले जाएगा।
जय मां काली!!