शैलपुत्री माता की पूजा विधि । नवरात्रि का पहला दिन क्यों है खास?
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्य, नमस्तस्य, नमस्तस्य नमो नमः।।
नवरात्रि में मां दुर्गा के जिस रूप की सबसे पहले पूजा की जाती है वह है शैलपुत्री। आपमें से काफी लोग सोचते होंगे कि इनका नाम शैलपुत्री क्यों पड़ा। यह पर्वत राज हिमालय की पुत्री है इसीलिए उन्हें शैल की पुत्री यानी पर्वत की बेटी के नाम से संबोधित किया जाता है।
By: RevivingCultures
Published on: 18 March 2026 at 11:26 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
Published on: 18 March 2026 at 11:26 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

शैलपुत्री का स्वरूप देखने में कैसा है?
शैलपुत्री का वाहन बैल है जिसमें सवार वह बाएं हाथ में कमल का फूल और दाएं हाथ में त्रिशूल लिए भक्तों को दर्शन देती है। इसी कारण इन्हें स्थिरता और शक्ति का स्वरूप माना जाता है।
शैलपुत्री के और क्या-क्या नाम है?
- इन्हें काफी लोग वृषभरूढ़ा देवी के नाम से भी संबोधित करते हैं क्योंकि इनका वाहन वृषभ यानी की बैल है।
- इन्हें काफी लोग मां सती के नाम से भी जानते हैं।
- इन्हें पार्वती और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है।
प्रथम दिन नवरात्रि में किस चीज का भोग लगता है?
प्रथम दिन मां शैलपुत्री को खीर का भोग लगाना चाहिए।
शैलपुत्री के साथ कौन सी कहानी जुड़ी है?
- शैलपुत्री को मां सती का रूप माना जाता है, मां सती जी दक्ष प्रजापति की पुत्री थी।
- राजा दक्ष इस बात से बड़े ही ना खुश थे कि उनकी बेटी ने महादेव से शादी की थी और ऐसे में उनका अपमान करने हेतु उन्होंने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया जिसमें उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रण दिया पर भगवान शंकर को नहीं।
- मां सती को निमंत्रण तो नहीं मिला पर अपने मायके में हो रहे यज्ञ में जाने के लिए वह अत्यंत ही विचलित हो उठी। उन्हें इस तरह देखकर महादेव ने उन्हें जाने की अनुमति दे दी।
- मां सती जब वहां पहुंची तो सिवाय उनकी मां के सभी ने उनको उनके तरफ बड़ा ही गलत व्यवहार किया और उनका उपहास उड़ाया।
- भगवान शिव के प्रति भी उनके भाव तिरस्कार से भरा था।
- यहां तक की राजा दक्ष ने भी उनके लिए बड़े ही अपमानजनक शब्द कहे।
- सती को यह सब सुनकर बड़ा ही दुख पहुंचा और वह अपने पति का यह अपमान बर्दाश्त ना कर सकी।
- यज्ञ में उन्होंने खुद को समर्पित कर दिया।
- इस दुख से दुखी होकर भगवान शिव ने केवल इस यज्ञ को विध्वंश नहीं किया बल्कि पूरे विश्व में एक घनघोर ज्वाला छा गई।
- सती ने जब पूर्ण जन्म लिया तो वह हिमालय की पुत्री के रूप में धरती पर वापस आई और शैलपुत्री कहलाई।
मां शैलपुत्री के बारे में जान यह सारी बातें
- माता का यह रूप शक्ति, तपस्या, धैर्य और शांति का प्रतीक है।
- मां सती इस रूप के बाद पार्वती के रूप में जन्मी।
- नवरात्रि का प्रथम दिन होने के कारण योगी मां शैलपुत्री में अपना ध्यान लगाते हैं जोकि मूलाधार चक्र में स्थित हैं।
मां शैलपुत्त्री का प्रमुख मंदिर कौन सा है?
वाराणसी के मढ़िया घाट में मां शैलपुत्री का सबसे प्राचीन मंदिर है। यहां पर मां के अत्यंत ही सुंदर दर्शन होते हैं।
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।।
नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व
| नवरात्रि दिन क्रम | देवी का स्वरूप |
|---|---|
| प्रथम | मां शैलपुत्री |
| द्वितीय | मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीय | मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थ | मां कूष्मांडा |
| पंचम | मां स्कंदमाता |
| षष्ठ | मां कात्यायनी |
| सप्तम | मां कालरात्रि |
| अष्टम | मां महागौरी |
| नवम | मां सिद्धिदात्री / राम नवमी |