नवरात्रि का पांचवा दिन – क्या आप जानते है इस दिन भर सकता है आपके धन का भंडार
अगर ज्ञान की माता की बात करें तो सभी के मन में मां सरस्वती का ही नाम आता है पर क्या आप जानते हो नवरात्रि की पांचवें दिन पूजे जाने वाली मां स्कंदमाता की पूजा करने से आपका ज्ञान का भंडार भर सकता है? स्कंदमाता की पूजा करने से जिन दंपतियों को संतान नहीं है उन्हें संतान की भी प्राप्ति होती है।
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।।
यह मां दुर्गा का पांचवा रूप हैं और यह ज्ञान और कर्म से ओत प्रोत है। मां के नाम मात्र से ही भक्तों के कष्ट मिट जाते है और वो मोक्ष के भागीदार होते है।
Published on: 22 March 2026 at 10:19 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

स्कंद माता का स्वरूप कैसा है?
- स्कंदमाता चार भुजाओँ वाली है।
- स्कंद माता का वाहन सिंह है और उन्होंने अपनी गोद में कार्तिकेय जी को बैठा रखा है।
- मां का यह स्वरूप कमल पर विराजमान है।
जो भक्त सच्चे मन से उनकी उपासना करते हैं उन्हें खुशियां, शांति, मोक्ष और वैभव की प्राप्ति होती है।
स्कंद माता के बारे में जाने यह सारी बातें:
- माता दूध समान श्वेत है और इनके चार भुजाएं हैं।
- इनके दो हाथों में कमल के फूल है, एक हाथ में गोद के सहारे कार्तिकेय जी बैठे हैं, और चौथा हाथ अपने भक्तों को आशीर्वाद देने की मुद्रा में है।
- काफी लोगों मां को पद्मासना वाली देवी के नाम से भी जानते हैं।
- स्कंदमाता कार्तिकेय जी की माता है, और इसी कारणवस उनका नाम स्कंद माता पड़ा है। कार्तिकेय अर्थात स्कंद।
- माँ ने तारका सुर के वध के लिए कार्तिकेय भगवान को तैयार किया था।
स्कंद मां की पूजा कैसे करें?
मां आत्यंतिक भोली भाली है और जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं वह ऐसे ही खुश हो जाती है। मां को पीला रंग अत्यंत ही प्रिय है इसलिए भक्त अगर इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर, हाथों में कमल का फूल, और केले का भोग अर्पित करते हैं तो मां अत्यंत प्रसन्न होती है।
मां की पूजा करते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करें
सिंहासानगता नित्यं पद्मश्रीतकरद्व्या।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।।
इस मंत्र का यह अर्थ होता है की”है मां! मुझे आशीर्वाद दो कि मेरी सारी अभिलाषाऐं है पूरी हो जाए और साथ ही साथ मेरे सारे कष्टों का निवारण भी मिल जाए।
स्कंदमाता की पूजा करने से क्या लाभ प्राप्त होता है
स्कंद माता की पूजा करने वालों को बहुत सारे लाभ प्राप्त होते हैं।
- जिन्हें संतान नहीं है उसे संतान की प्राप्ति होती है।
- जो ज्ञान की तलाश में है उन्हें ज्ञान मिलता है।
- भटके हुए लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- मां को ममता का रूप माना जाता है।
स्कंदमाता से जुड़ी कौन सी पौराणिक कथा है
- पुराणों की माने तो तारकासुर नामक एक राक्षस था जिसने ब्रह्मा जी की अखंड तपस्या की।
- उसने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा।
- इस पर ब्रह्मा जी ने उसे सृष्टि के नियम बताएं कि इस धरती पर कोई भी अमर नहीं है। जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है।
- ऐसे में तारका सुर ने ब्रह्मा जी से यह वरदान मांगा की उसकी मृत्यु केवल महादेव के पुत्र के ही हाथों हो। उसने ऐसा इसीलिए किया क्योंकि उसे लगा की महादेव ना कभी शादी करेंगे और ना कभी उनके बच्चे होंगे। उसे लगा कि ऐसा करने से वह हमेशा अमर ही रहेगा।
- जब तारकासुर का अत्याचार जरूर से ज्यादा बढ़ गया तब सारे देवताओं ने आकर महादेव की पूजा अर्चना की। सभी ने मिलकर उनसे प्रार्थना की, की वो उनकी मदद करें।
- सभी ने उनसे अनुरोध किया कि वे विवाह करने ताकि उनसे जन्म पुत्र तारकासुर का वध कर सके।
- महादेव ने मां पार्वती से विवाह से विवाह किया।
- माता पार्वती ने अपने पुत्र को तारकासुर का वध करने के लिए तैयार किया। इसके लिए उन्होंने स्कंदमाता का रूप धारण कर उन्हें विद्या, ज्ञान और शस्त्र की सारी शिक्षा दी।
- स्कंदमाता के आशीर्वाद से ही भगवान कार्तिकेय तारकासुर का वध कर पाए।
- बोलो स्कंदमाता की जय।
स्कंदमाता का सबसे पुराना मंदिर कौन सा है?
स्कंदमाता की सबसे प्रसिद्ध और पुरानी मंदिर में मां के दर्शन के लिए आपको बनारस जाना पड़ेगा। वहां के जैतपुरा इलाके में मां का मंदिर स्थित है। अगर आप कभी बागेश्वरी देवी के मंदिर में गए हैं तो वहीं पर आपने इस मंदिर में मां के दुर्लभ दर्शन किए होंगे।
एस कंठ माता का पूरे भारतवर्ष में एकमात्र मंदिर है।
एक बार सारे पूरे मन से कह दो – हीं क्लीं स्वामिन्यै नमः।।
नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व
| नवरात्रि दिन क्रम | देवी का स्वरूप |
|---|---|
| प्रथम | मां शैलपुत्री |
| द्वितीय | मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीय | मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थ | मां कूष्मांडा |
| पंचम | मां स्कंदमाता |
| षष्ठ | मां कात्यायनी |
| सप्तम | मां कालरात्रि |
| अष्टम | मां महागौरी |
| नवम | मां सिद्धिदात्री / राम नवमी |