नवरात्रि का सातवां दिन- क्या मां कालरात्रि का रूप डरावना है

देवी कालरात्र्यै नमः
कुछ मंत्रों के उच्चारण से ही भक्तों को अत्यंत ही लाभ होता है और मां कालरात्रि का यह मंत्र एक ऐसा अचूक मंत्र है जो अपने भक्तों को हर तरह की मुसीबत से बचाता है। 
दुर्गा मां की सबसे ज्यादा उग्र रूप में मां कालरात्रि का रूप माना जाता है और सातवें दिन इन्हीं की पूजा की जाती है। भक्तों को भय, डर, अंधकार और खासकर नकारात्मकता से बचाकर मां अपने भक्तों को खुशहालता की ओर ले जाती है। आश्चर्यचकित हो गए ना?
बात हो रही थी मां के डरावने रूप की और यहां यह रूप अपने भक्तों की रक्षा करता है।

By: RevivingCultures
Published on: 24 March 2026 at 10:51 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
नवरात्रि का सातवां दिन- क्या मां कालरात्रि का रूप डरावना है

क्या यह सच है की मां कालरात्रि का वाहन सिंह नहीं है? 

यह सुनकर आप आश्चर्य चकित हो जाओगे की मां दुर्गा के इस रूप का वाहन सिंह ना होकर गधा है। 

मां कालरात्रि का स्वरूप कैसा है?

  • मां कालरात्रि अपने वाहन गड्ढे पर सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देने आती है। 
  • मां की चार भुजाएं हैं और उनका रंग अंधकार से भी काला है पर वह अपने हर भक्त को कभी भी किसी भी तरह के अंधकार में खोने नहीं देती। 
  • मां की चार भुजाओं में से ऊपर का दाहिना हाथ हमेशा व्रत मुद्रा में होता है और नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में। 
  • जब आप बाएं तरफ के ऊपर के हाथ की तरफ देखोगे तो पाओगे कि उसमें एक लोहे का कांटा है और इसी तरफ के नीचे की हाथ में एक खड़ग है। 
  • मां के बाल बिखरे हुए हैं और उनके तीन नेत्र हैं। 
  • माना जाता है कि यह नेत्र पूरे ब्रह्मांड पर नजर रखते हैं और हर दिशा की ओर इशारा करते हैं। 
  • मां का रूप भले ही देखने में भयानक लगे या फिर सोच कर मन घबरा जाए पर असल में यह रूप बड़ा ही शुभ और फलदायक है। 
  • इनका नाम लेने से हर तरह के भूत पिशाच दूर भाग जाते हैं। 

मां कालरात्रि को प्रसाद में क्या चढ़ाएं? 

कुछ लोग यह सवाल इस तरह भी पूछते हैं की नवरात्रि के सातवें दिन मां को क्या भोग लगाए? 

  • मां बहुत ही सरल है, और गुड़ या गुड़ से बनी हुई चीजों को प्रसाद के रूप में प्रकार खुश हो जाती है। 
  • इसके साथ मां को उसे दिन चंद का भी भोग लगाना चाहिए। 
  • भक्त शहद की चीजे भी बनाकर मां को इस दिन भोग लगा सकते हैं। 

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा किस तरह करें

  •  यूं तो नवरात्रि के हर दिन ही सवेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर मां की पूजा करनी चाहिए पर सातवें दिन लाल रंग के फूल से मां की पूजा करना ना भूले। 
  • नीला, कत्थई या छाई वस्त्र पहनकर मां की पूजा थाली सजाए। उसमें रोली, चावल, रातरानी फूल, हल्दी, चंदन, धूप दीप, और लाल जवा फुल मां को अर्पित करने के लिए रखे। 
  • महाकाल रात्रि को काले रंग की चुनरी चढ़ती है। 
  • मां को गुड़ या गुड़ से बनी हुई चीज भोग में लगाकर उन्हें खुश करें। इससे मां आपके हर दुखों को दूर करती है। 
  • मां के मंत्र का पूरे दिन जाप करें। 
  • काफी भक्त यह मानते हैं की मां की पूजा करने से उन्हें हर तरह के डर से मुक्ति, उनके शत्रुओं का नाश, और अकाल मृत्यु से बचाव होता है। 
  • दुर्गा सप्तशती पाठ या दुर्गा चालीसा मां के मंत्रों के साथ पढ़ने से भक्तों को ज्यादा लाभ होता है। 
  •  इस दिन मां की पूजा रात में करने से विशेष लाभ मिलता है। 

कालरात्रि मां के पीछे छुपी कहानी

  • शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज नामक दैत्यों ने पृथ्वी और ब्रह्मलोक में हाहाकार मचा दिया था। 
  • सारे देवता मिलकर महादेव के पास गए और उन्हें मदद करने का आग्रह किया। 
  • ऐसे में महादेव ने मां पार्वती को सब की रक्षा करने के लिए आगे आने को कहा।
  • शुंभ निशुंभ को करने के लिए उन्होंने मां दुर्गा का रूप लिया। 
  • लेकिन जब रक्तबीज को मारने की बारी आई तो उन्होंने देखा की रक्तबीज के हर एक खून के बूंद से नए रक्तबीज पैदा हो रहे थे। 
  • रक्तबीज को यह वरदान था कि जब भी उसके रक्त की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उसके जैसे और रक्तबीज पैदा हो जाएंगे। 
  • ऐसे में मां ने अपने पेट से मां कालरात्रि को प्रकट किया।
  •  उन्होंने अपने सुंदर काया को त्याग कर एक भयंकर रूप अपनाया जिसकी अट्टहास से ही दैत्यों की पूरी सेना भय से कांप गई। 
  • महाकाल रात्रि ने रक्तबीज के शरीर से गिरी हर बूंद को अपने मुख में भर लिया और इस प्रकार रक्तबीज का अंत हुआ। 
  • उनका यह रूप ही कालरात्रि कहलाया। 

नवरात्रि के सातवें दिन का रंग कौनसा है? 

नीला, कत्थई, और छाई रंग मन को अत्यंत पसंद है। माना जाता है कि यह रंग बुराइयों का अंत करते हैं और साथ ही साथ सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।  

मां कालरात्रि का मंदिर कहां स्थित है?

मां कालरात्रि का प्रमुख मंदिर कहां है इस बात को जानने से पहले यह रोचक बात जानना ना भूले। क्या आपको पता है इस मंदिर जीसकी हम बात करने जा रहे हैं उसे मंदिर का निर्माण क्यों हुआ था? इस स्थान पर मां पार्वती शिवजी से नाराज होकर तपस्या करने आई थी और फिर वहीं पर मां का मंदिर बन गया। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित महाकाल रात्रि के मंदिर की जो की चौक क्षेत्र के कालिक गली में है। 

मां कालरात्रि के मंत्रों के जाप करने से उनके भक्तों को हर तरह की नकारात्मकता से छुटकारा मिलता है और साथ ही साथ जिंदगी में सफलता। भक्तों को आत्मविश्वास और शक्ति भी इन मंत्रों के लगातार उच्चारण से मिलती है। 

जय सार्वगते देवी कालरात्रि नमोस्तु ते।।

नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व

नवरात्रि दिन क्रम देवी का स्वरूप
प्रथम मां शैलपुत्री
द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी
तृतीय मां चंद्रघंटा
चतुर्थ मां कूष्मांडा
पंचम मां स्कंदमाता
षष्ठ मां कात्यायनी
सप्तम मां कालरात्रि
अष्टम मां महागौरी
नवम मां सिद्धिदात्री / राम नवमी