नवरात्रि का तीसरा दिन । मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और महत्व
ऐं श्री शक्तयै नमः
नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के तीसरे रूप यानी की मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय मुक्त करती है और साथ ही साथ मानसिक शांति भी प्रदान करती है।
Published on: 20 March 2026 at 9:59 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

मां चंद्रघंटा का स्वरूप कैसा है?
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर आपको घंटे का आकार नजर आएगा जो की अर्धचंद्र के सामान लगता है। इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां शक्ति, शांति, और साहस का प्रतीक है। चंद्रघंटा मां शेर पर सवार 10 भुजाओं वाली है। मां दुष्टों का संघार करती है और अपने भक्तों को शक्ति प्रदान करतीहै।
मां चंद्रघंटा की पूजा करने के पहले उनके बारे में यह जरूर जाने
- जब आप मां के दर्शन करने जाओगे तो आपको मां का शरीर सोने के समान चमकीला नजर आएगा।
- मां के 10 हाथ हैं जिसमें अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र है। खड्ग, त्रिशूल, बाण, गदा, तलवार, इत्यादि शास्त्र उनके 10 हाथ में सुशोभित है।
- मां की सवारी सिंह है जो अपने में एक शक्ति का प्रतीक है।
नवरात्रि के तीसरे दिन किस तरह से पूजा करें
- नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह से ही भक्तों को ओम चंद्रघंटायै नमः का जाप करते रहना चाहिए।
- मां का प्रिय फूल लाल और पीला है। मां को यही फूल चढ़ाएं और भोग लगाए।
- मां को दूध से बनी खीर, रबड़ी, या कोई मिठाई का भोग लगाया जा सकता है।
चंद्रघंटा मां से जुड़ी कथा
- माना जाता है कि जब भगवान शिव ने भयानक रूप धारण कर लिया था तब उनके इस रूप को देखकर ही मां पार्वती ने चंद्रकांता का रूप लिया था।
- यह उन्होंने इसलिए किया था ताकि वह उन्हें शांत कर सके।
- ऐसा उन्होंने इसलिए भी किया था ताकि वह भोलेनाथ को विवाह के लिए मना सके।
- यह भी माना जाता है की मां चंद्रघंटा राक्षसों का विनाश करने वाली है।
- एक और कथा के अनुसार महिषासुर नामक राक्षस ने स्वर्ग लोक पर अपना पूर्णतया अधिकार कर लिया था और देवराज इंद्र को सिंहासन छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।
- उसने तीनों लोगों को जीत कर चारों तरफ हाहाकार मचा दिया।
- जब महिषासुर का आतंक हद से ज्यादा बढ़ गया तब सारे देवता, त्रिदेव यानी कि भगवान विष्णु, ब्रह्मा, और महेश की शरण में आए।
- देवताओं की बातों को सुनकर त्रिदेव अत्यंत ही क्रोधित हो गए और उनके मुंह से एक ऊर्जा निकली। इसी प्रचंड शक्ति ने मां चंद्रघंटा का रूप ले लिया।
- सारे देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र सौंपे। भगवान विष्णु जी ने अपना चक्र, इंद्रदेव ने अपना घंटा, महादेव ने अपना त्रिशूल, और अन्य देवताओं ने भी अलग-अलग शास्त्र दिए।
- मां चंद्रघंटा अपने वाहन पर सवार महिषासुर से युद्ध करने को उतरी। मां के घंटा नाद के स्वर को सुनकर पूरा असुर समुदाय कांप उठा। सिंह की दहाड़ ने सभी को डरा दिया।
- यह युद्ध काफी दिनों तक चला और आखिरकार मां ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उनका स्वर्ग वापस लौटा दिया।
- जो भक्त सच्चे मन से माता की पूजा करते हैं उनके मन में साहस, आत्मविश्वास, और शक्ति बढ़ती है।
- मां की पूजा करने से सभी पाप धुल जाते हैं और रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।
- मां के इस रूप में उनके 10 हाथ हैं और हर हाथ में एक अलग शास्त्र है।
- उन्होंने मुकुट धारण कर रखा है जिस पर एक घंटी के आकार में चंद्रमा है।
नवरात्रि के तीसरे दिन कौन से रंग के कपड़े पहने?
मां चंद्रघंटा को पीला रंग प्रिय है इसीलिए अगर भक्त पूजा में लाल या पीले रंग के फूलों का प्रयोग करते हैं या उस रंग के कपड़े पहनते है तो मां जल्दी खुश होती है।
मां चंद्रघंटा का मुख्य मंदिर कहां है?
मां चंद्रघंटा के दर्शन हेतु आपको वाराणसी के चौक क्षेत्र में जाना होगा। वहां मां चंद्रघंटा का मुख्य मंदिर है। इस मंदिर की बहुत ही महत्वता है।
ॐ ऐं ह्लीं क्लीं चंद्रघंटायै नमः
नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व
| नवरात्रि दिन क्रम | देवी का स्वरूप |
|---|---|
| प्रथम | मां शैलपुत्री |
| द्वितीय | मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीय | मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थ | मां कूष्मांडा |
| पंचम | मां स्कंदमाता |
| षष्ठ | मां कात्यायनी |
| सप्तम | मां कालरात्रि |
| अष्टम | मां महागौरी |
| नवम | मां सिद्धिदात्री / राम नवमी |