नवरात्रि का छठवां दिन – यह गलती आपके व्रत को कर सकता है खंड
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः।
नवरात्रि का छठवां दिन महर्षि कात्यायन की पुत्री माता कात्यायनी को समर्पित है। दुर्गा मां के इस छठे रूप की पूजा करते वक्त आपको अत्यंत ही सावधानी बरतनी है।
मां कात्यायनी की पूजा करने से जिसके विवाह में बाधा आ रही हो उनका विवाह आसानी से हो जाता है, हर तरह के दुखों का नाश होता है और भक्तों को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। कुछ भक्त मां की पूजा करते तो है पर गलत तरीके से जिससे उन्हें इच्छानुसार फल नहीं मिलता।
Published on: 23 March 2026 at 10:05 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

मां का स्वरूप कैसा है?
- मां का स्वरूप अपने में अत्यंत ही भव्य, सुंदर, और शांत है।
- मां कात्यायनी की सवारी सिंह है।
- उनकी चार भुजाएं हैं। मां के दाएं तरफ वाला हाथ अभय मुद्रा में है तथा दाएं तरफ का निशा हाथ वर मुद्रा में है। बाई तरफ के ऊपर वाले हाथ में एक तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल होता है।
- कुंवारी युवतियों को इस दिन मां की पूजा ज़रूर करनी चाहिए। उन्हें इस दिन मां की पूजा करने से मनभावन वर मिलता हैं।
- मां का स्वरूप सोने से भी ज्यादा चमकीला और भास्वर है।
मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?
मां कात्यायनी की पूजा करने की विधि बहुत ही सरल है।
- मां की पूजा करते वक्त लाल या पीले रंग के कपड़े पहने। पूजा में पहने गए पीले वस्त्र सुख और समृद्धि को आकर्षित करते हैं।
- मां को पीले फूल अत्यंत प्रिय है इसीलिए मन को इस दिन पीले फूल चढ़ाएं।
- मां को भोग में शहद जरुर चढ़ाएं।
- मां को आप शहद मिलाकर कद्दू का हलवा बनाकर भी चढ़ा सकते हैं।
- ऐसा करने से भक्तों के जीवन में मधुरता आती है।
- इस दिन भक्ति मां कात्यायनी की कथा भी सुनते हैं
मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों के जीवन में आने वाले सभी कष्ट और चल रहे सभी कासन से मुक्ति मिलती है। साथ ही साथ जिन बस्तियों का विवाह ना हो रहा हो मां की इस दिन पूजा करने से उनका विवाह हो जाता है।
नवरात्रि के छठवें दिन उपवास क्यों करना चाहिए?
यूं तो पूरी नवरात्रि के उपवास लाभ के बारे में पुराणों में बहुत कुछ लिखा है पर छठे नवरात्रि पर उपवास करने से भक्तों का मन और आत्मा पवित्र हो जाती है। साथ ही साथ उनके मां को आध्यात्मिक और आत्मिक शांति भी मिलती है।
मां कात्यायनी के पीछे छुपी कहानी
सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है की मां कात्यायनी का नाम कात्यायनी क्यों पड़ा? इसका मुख्य कारण यह है कि उनके पिता महर्षि कात्यायन थे इसीलिए उन्हें विश्व में कात्यायनी के नाम से जाना गया।
- पुराणों के अनुसार वर्णिकत नामक एक महर्षि थे जिनका एक पुत्र था, कात्य।
- कात्य के वंशज में महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ। बहुत वर्ष बाद भी उनके कोई भी संतान नहीं थी और वे मां भगवती को ही अपने पुत्री के रूप में पाना चाहते थे।
- इसलिए उन्होंने घनघोर तपस्या की।
- उनकी तपस्या से मां भगवती बहुत प्रसन्न हुई और उन्हें दर्शन दिए। मां ने उन्हें वरदान मांगने को कहा।
- कात्यायन ऋषि ने मां को अपने मन की बात बताई।
- मां अपनी भक्त की बात सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुई और उन्होंने कात्यायन ऋषि को वचन दिया कि वह उनके घर में पुत्री के रूप में जरूर जन्म लेंगी।
- महिषासुर नामक एक राक्षस ने लोक परलोक में हा कर मचा रखा था और जब वह हद से बढ़ गया तब देवी देवता त्रिदेव पास मदद के लिए पहुंचे।
- ब्रह्मा विष्णु और महादेव के तेज से ओठ क्रोध महर्षि कात्यायन के घर मां कात्यायनी ने तब जन्म लिया।
- ऋषि कात्यायन ने मां के जन्म के बाद सप्तमी, अष्टमी, और नवमी तीनों दिन तक विधि विधान से मां कात्यायनी की पूजाकी।
- दशमी के दिन मां कात्यायनी में उसे महिषासुर नामक राक्षस का वध किया और तीनों लोग को उसके अत्याचार से छुटकारा दिलवाया।
- यह वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट हुई और वही पूजी गई।
माँ कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन करने से भक्तों को धर्म काम अर्थ और मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनमें समय रोग, संताप, भय, और शोक का नाश होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि जन्मो जन्मो का पाप मां की पूजा करने से कट जाता है।
मां कात्यायनी का ब्रज की गोपियों से क्या संबंध है?
ब्रज की सारी कॉपियां श्री कृष्ण को अपने पति के रूप में पाना चाहती थी और इसीलिए उन्होंने मां कात्यायनी की पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की थी। शायद आपको यह नहीं पता कि मां कात्यायनी को ब्रिज की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
कात्यायनी महामाये, महायोगीन्य धीश्वरी।
नंदगोपसुतंग देवी, पति में कुरु ते नमः।।
मां कात्यायनी का मुख्य मंदिर कहां है?
- मां कात्यायनी का मुख्य मंदिर उत्तर प्रदेश में स्थित वृंदावन के राधा बाग के निकट है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और नवरात्रि में यहां अत्यधिक भीड़ होती है।
- बिहार के खगड़िया जिले में भी मां कात्यायनी का एक प्रसिद्ध मंदिर है।
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व
| नवरात्रि दिन क्रम | देवी का स्वरूप |
|---|---|
| प्रथम | मां शैलपुत्री |
| द्वितीय | मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीय | मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थ | मां कूष्मांडा |
| पंचम | मां स्कंदमाता |
| षष्ठ | मां कात्यायनी |
| सप्तम | मां कालरात्रि |
| अष्टम | मां महागौरी |
| नवम | मां सिद्धिदात्री / राम नवमी |