नवरात्रि के नौवें दिन - राम नवमी - किसकी पूजा करें – श्री राम या मां सिद्धिदात्री?

भाई प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी।
हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।

इस दोहे का यह अर्थ है की मां कौशल्या के जीवन में खुशहाली और कृपा बरसाने के लिए स्वयं दीनदयाल प्रभु प्रकट हुए हैं। उनका अद्भुत स्वरूप ऋषि मुनियों का भी मनमोह लेने वाला है। 
चैत्र के नवरात्रे में नवमी को केवल मां सिद्धिदात्री की ही पूजा नहीं होती वरन् उस दिन को श्री राम के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यही कारण है कि इस नवमी को रामनवमी भी कहा जाता है। 
चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन रामनवमी के नाम से जाना जाता है और हिंदुओं का यह एक प्रमुख त्यौहार है। श्री राम जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, विश्व में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से भी जाने जाते हैं, और चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को उनके जन्म दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

By: RevivingCultures
Published on: 24 March 2026 at 2:04 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
नवरात्रि के नौवें दिन - राम नवमी - किसकी पूजा करें – श्री राम या मां सिद्धिदात्री?

श्री राम का जन्म 

अयोध्या में राजा दशरथ और मां कौशल्या के घर त्रेता युग में दोपहर के वक्त राम जी का जन्म हुआ था। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी सनातन धर्म में मनाया जाता है। 

रामनवमी का महत्व
श्री
रामाया नमः

यह तो सभी जानते हैं की चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है पर क्या आपको पता है भगवान राम का जन्म धरती पर धर्म की स्थापना के लिए हुआ था?

  • श्री राम को इस संसार में मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से जाना जाता है। इन्होंने संसार को आदर्श, त्याग, और नैतिकता का पाठ पढ़ाया है। 

रामनवमी किस तरह मनाई जाती है?

  • भगवान श्री राम का जन्म दोपहर के 12:00 बजे हुआ था इसीलिए उसे समय पूजा, कीर्तन, और आरती करने से विशेष लाभ होता है। 
  • इस दिन सारे राम भक्त उपवास रखते हैं और घरों और मंदिरों में रामायण का पाठ होता है। 
  • श्री राम को पीले फूल अत्यंत पसंद है इसलिए उन्हें पीले फूल चढ़ाए जाते हैं। 
  • इसके बाद उन्हें भोग अर्पित किया जाता है। 
  • राम नवमी देश विदेश में मनाई जाती है और यह दिन खासकर अयोध्या में अत्यधिक हर्षोल्लास से मनाया जाता है। 

श्री राम के जीवन, भक्तों को उनके आदर्शों का पालन कर और उनके दिखाए हुए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। 

मंगल भवन अमंगल हारी। 
द्रवहु सुदसरथ
अजीर बिहारी।।

मां सिद्धिदात्री 

नवरात्रि के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां अपने भक्तों को हर तरह की सिद्धियों के साथ मोक्ष प्रदान करने में भी सक्षम है। घरों में इस दिन हवन, 9 दिन के व्रत का समापन, और कन्या पूजन कराया जाता है। 

ओम सिद्धिदात्र्यै नमः
नौवें नवरात्रि की मुख्य बातें

  • नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। 
  • इस दिन भक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, हवन करते हैं, और कन्या पूजन भी कराते हैं। 
  • मां को इस दिन तिल का भोग लगाया जाता है। 

सिद्धिदात्री मां को कौन सा रंग पसंद है? नवरात्रि के नौवे दिन कौन से रंग के वस्त्र पहने? 

इन दोनों सवालों के जवाब एक ही है। इस दिन बैंगनी या जामुनी रंग या मोर हरा रंग पहनना मां को बहुत पसंद आता है। इस दिन आप लाल या मैरून रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं। 

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप कैसा है?

  • मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान है। 
  • मां की सवारी सिंह है। 
  • मां का मुख शांत और तेज से भरा है। 
  • मां के चार हाथ हैं जिसमें शंख, गदा, कमल, और चक्र है। मां के दाहिने तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल और ऊपर वाले हाथ में शंख है। बाएं हाथ में ऊपरी तरफ चक्र है और नीचे हाथ में गदा है।
  • मां कमल के फूल पर विराजमान रहतीहै। 

माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां की पूजा करती हूं उन्हें आठों सिद्धियां प्रदान होती है और साथ ही साथ वह ज्ञान और मोक्ष के अधिकारी होतेहैं। 

अष्ट सिद्धि कौन सी है जो मां सिद्धिदात्री प्रदान करती है?

मां सिद्धिदात्री देवी लघिमा, अणिमा, प्राकाम्य, प्राप्ति, ईशित्व, महिमा, वशित्व, और सर्वकामावसायिता जैसी अष्ट सिद्धियां प्रदान करती हैं। 

मां सिद्धिदात्री की क्या कहानी है?

पुराणों में लिखा है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की पूजा की थी और सिद्धियां प्राप्त की थी। इसी पूजा के बाद महादेव का आधा शरीर देवी का हो गया था जिसे हम अर्धनारीश्वर के रूप में जानते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन इसी देवी की पूजा होती है। 

मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से क्या होता है? 

  • माना जाता है की मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के बाद ही 9 दिनों की पूजा का फल मिलता है।  माता के इसी रूप ने सभी देवी देवताओं को अलग-अलग सिद्धियां प्रदान की थी। 
  • जो भक्त पूर्ण मन से मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं उनके कठिन से कठिन काम भी सफल हो जाते हैं। 
  • साथ ही साथ यह भी माना जाता है की मां के भक्तों को हर तरह की सिद्धियां मिल जाती है। 

नवरात्रि के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा किस तरह करें? 

  • सुबह स्नान करने के बाद मां सिद्धिदात्री को कमल के फूल चढ़ाएं। 
  • ॐ ह्लीं दुर्गाय नमः।। इस मंत्र का पूरे दिन जाप करना ना भूले। 
  • इस दिन कन्या पूजन करने का विशेष महत्व है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराना, उनके पैर धोना, और उन्हें उपहार देना बहुत अच्छा माना जाता है। कहते हैं उन कन्याओं में ही मां सिद्धिदात्री आपके आशीर्वाद देने आती है। 

मां सिद्धिदात्री के साथ इस दिन श्री राम की भी पूजा की जाती है और काफी जगह रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म स्थापना का दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन श्री राम ने जन्म लेकर धरती को पवित्र किया था। 

काफी लोग इस दिन उपवास की रखते हैं। माता-पिता का आशीर्वाद लेना इस दिन को और भी पावन बना देता है।

आध्यात्मिक रूप से यह दिन दुगनी खुशी का है और इस दिन मां सिद्धिदात्री और श्री राम दोनों की ही पूजा करनी चाहिए। 

जय माता दी।।
जय श्री राम।।

मां सिद्धीदात्रिका प्रमुख मंदिर कहां है? 

मां सिद्धिदात्री के प्रमुख मंदिर में दर्शन के लिए आपको वाराणसी में मैदागिन के सिद्ध माता गली में जाना पड़ेगा। वहां नवदुर्गा के सारे 9 स्वरूप उपस्थित हैं। नवरात्रि में यहां खास भीड़ होती है। 

श्री राम के दर्शन के लिए प्रमुख मंदिर कौन सा है?

यूं तो जहां हनुमान का वास है उनके हृदय में ही श्री राम का मंदिर है पर अयोध्या का राम मंदिर जो कि उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तटके किनारे स्थित है वह प्रमुख ही नहीं बल्कि श्री राम की जन्म भूमि के नाम से जाना जाता है। 

नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व

नवरात्रि दिन क्रम देवी का स्वरूप
प्रथम मां शैलपुत्री
द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी
तृतीय मां चंद्रघंटा
चतुर्थ मां कूष्मांडा
पंचम मां स्कंदमाता
षष्ठ मां कात्यायनी
सप्तम मां कालरात्रि
अष्टम मां महागौरी
नवम मां सिद्धिदात्री / राम नवमी