ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि । नवरात्रि का दूसरा दिन क्यों है खास?

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः।।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है और माना जाता है कि यह मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है। यह स्वरूप तपस्या, वैराग्य, और ज्ञान का प्रतीक है। 

By: RevivingCultures
Published on: 19 March 2026 at 11:11 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि । नवरात्रि का दूसरा दिन क्यों है खास?

ब्रह्मचारिणी का अर्थ क्या होता है?

ब्रह्म का शाब्दिक अर्थ है तपस्या और चारिणी अर्थात आचरण वाली। 

ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप कैसा है?

ब्रह्मचारिणी मां सफेद कपड़े पहनती है और उनके दाहिने हाथ में माला है और बाएं हाथ में उन्होंने कमंडल धारण किया हुआ है। जो भक्त सच्चे मन से उनकी भक्ति करते हैं उनके संयम और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। 

ब्रह्मचारिणी मां के और क्या नाम है?

  • अपर्णा 
  • ज्ञान दायिनी 
  • तपस्विनी 
  • तपचारिणी 

ब्रह्मचारिणी मां की पूजा करने से पहले जाने यह सारी बातें 

  • नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी मां की पूजा की जाती है। 
  • सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को उनके लक्ष्य को पूरा करने की शक्ति मिलती है। 
  • उनकी पूजा करने वालों के जीवन में सदाचार, अनुशासन, और संयम का ओत प्रोत होता है। 

ब्रह्मचारिणी मां को क्या भोग लगाया जाता हैं?

  • ब्रह्मचारिणी मां को चीनी या मिश्री का भोग लगाया जाता है। 
  • मां को पीले फूल, कमल के फूल, या गुड़हल चढ़ाए जाते हैं। 

नवरात्रि के दूसरे दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना चाहिए? 

नवरात्रि के दूसरे दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना चाहिए। 

ब्रह्मचारिणी मां का प्रमुख मंदिर कहां है? 

  • मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर आपको वाराणसी के दशाश्वमेध घाट के पास और बालाजी के घाट पर मिलेगा। नवरात्रि के दूसरे दिन यहां आपको खास भीड़ मिलेगी। 
  • मध्य प्रदेश के देवास जिले में भी जंगलों को पार करते हुए जहां भागोई माता का मंदिर है वहां भी आपको मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर मिलेगा। असल में यह पूरा मंदिर ही मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। 

ब्रह्मचारिणी मां की कथा क्या है?

  • काफी लोग यह नहीं जानते कि जिन देवी को वह दूसरे दिन नवरात्रि में पूजते हैं यानी कि ब्रह्मचारिणी मां, वह पार्वती मां का ही तपस्विनी रूप है। 
  • इसी रूप से उन्होंने शिव जी को अपने पति के रूप में पाने के लिए अखंड तपस्या की थी। 
  • यह तपस्या उन्होंने नारद जी के कहने पर की थी। 
  • यह तपस्या हजारों वर्षों तक चली।
  • इस दौरान उन्होंने खाना पीना सब त्याग दिया था और केवल एक बिल पत्र ही खाकर साधना करती थी। 
  • यही कारण है की वह अपर्णा नाम से भी जानी जातीहै। 
  • महादेव उनकी इस तपस्या से अत्यंत ही प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बना लिया। 
  • वे हिमाचल और मैना की पुत्री थी। 
  • क्योंकि इस तपस्या में उन्होंने बिना डरे सर्दी, बारिश, तूफान, धूप, इत्यादि सहन किया था इसीलिए उन्हें ब्रह्मचारिणी कहकर संबोधित किया गया।
  • विश्व में उन्हें वैराग्य की देवी के नाम से जाना जाता है। 

ज्ञान और तप की देवी कहलाने वाली मां ब्रह्मचारिणी की उपासना पूरे सच्चे मन से केवल दूसरे नवरात्रि को ही नहीं बल्कि आजीवन करना कभी ना भूले। 

देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।।

नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व

नवरात्रि दिन क्रम देवी का स्वरूप
प्रथम मां शैलपुत्री
द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी
तृतीय मां चंद्रघंटा
चतुर्थ मां कूष्मांडा
पंचम मां स्कंदमाता
षष्ठ मां कात्यायनी
सप्तम मां कालरात्रि
अष्टम मां महागौरी
नवम मां सिद्धिदात्री / राम नवमी