चौथा नवरात्रा – क्या आप जानते है इस दिन होती है सृष्टि के रचनाकार की पूजा?
यह तो आप सभी जानते हैं की चौथे नवरात्रे को मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है, पर क्या आपको पता है इस दिन सृष्टि के रचनाकार की भी पूजा होती है? अब आप सोच रहे होंगे कि वह कौन है? वह और कोई नहीं हमारी मां कुष्मांडा ही है। यह माना जाता है की कुष्मांडा मां ने अपनी मीठी मुस्कान से इस ब्रह्मांड को उत्पन्न किया।
उनका निवास स्थान सौर्य मंडल था। इसी कारण जब आप उनकी आठ भुजाओं को देखेंगे तो उसमें आपको अलग-अलग चीज जैसे कि चक्र, अमृत कलश, गदा, कमंडल, बाण, इत्यादि नजर आएंगे।
Published on: 21 March 2026 at 11:10 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा करने से क्या होता है?
यह तो आप सभी ने सुना होगा की मां की पूजा करने से मन को शांति मिलती है, पर क्या आज तक आपको किसी ने बताया है की मां कुष्मांडा की पूजा करने से आपकी आयु बढ़ती है? साथ ही साथ आपकी काया आरोग्य होकर आपके यश में वृद्धि करती है।
मां की पूजा करने वाले भक्त बल और बुद्धि का वरदान पाते है।
मां कुष्मांडा का स्वरूप कैसा है?
मां का रूप कोई भी हो पर वह मन को शीतलता प्रदान करने वाला ही होता है और अगर हम बात करें मां कुष्मांडा की तो उनका स्वरूप आपको कुछ इस तरह नजर आएगा:
- मां के आठ भुजाएं हैं और हर भुजा में अलग-अलग शस्त्र है।
- मां की सवारी सिंह है और वह तेज़ से भरपूर नज़र आती है।
- मां की आठ भुजाओं में कलश, धनुष, बाण, चक्र, गदा, अमृत पूर्ण कलश, और जपमाला है।
- यह अमृत पूर्ण कलश भक्तों के लिए वैभव प्रदान करने वाला है।
- मां के नाम का अर्थ कुछ इस प्रकार है– कु अर्थात छोटा, ऊष्मा यानी गर्मी, और अंडा अर्थात ब्रह्मांडीय अंडा। इसीलिए मां को ब्रह्मांड का निर्माणकर्ता कहा जाता है ।
क्या आपको मां कुष्मांडा और सूर्य देव के संबंध के बारे में पता है?
जो लोग यह नहीं जानते वह यह जान ले की सूर्य के तेज के पीछे मां कुष्मांडा की शक्ति ही है। यूँ भी माना जाता है की मां कुष्मांडा सूर्य देव के केंद्र में रहती है।
मां कुष्मांडा की रहस्यमय कहानी क्या है?
- ब्रह्मांड के बारे में तो सभी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पर क्या आप जानते हैं एक वक्त ऐसा था जब इस ब्रह्मांड में केवल अंधकार था।
- ब्रह्मांड अर्थात ब्रह्मा जी का अंश इसकी जब रचना हुई तो यह पूर्णतया खाली था। आप ही सोच रहे होंगे ऐसा फिर क्या हुआ कि इसमें इतनी रोशनी भर गई और साथ ही साथ यह इस तरह भर गया।
- ब्रह्मांड की रचना के बाद मां कुष्मांडा ने इसे देखा और प्यार से मुस्कुरा दिया।
- मां की मुस्कुराहट में इतना तेज था कि खाली पड़े हर स्थान में रोशनी पनप पड़ी।
- यही कारण है मां कुष्मांडा को शक्ति और रोशनी का प्रतीक माना जाता है।
चौथी नवरात्रि पर पूजा किस तरह करें?
नवरात्रि का कोई भी दिन हो पर आपको शुद्ध का ख्याल हर दिन रखना है। सो व्हाय इसकी और भी कुछ चीज हैं जो करने से आपको नवरात्रि की पूजा का ज्यादा से ज्यादा फल मिलता है।
- नवरात्रि के चौथे दिन अगर हो सके तो हरे रंग के वस्त्र पहने। हरा रंग खुशहाली और समृद्धि लेकर आता है और यह दिन क्योंकि मां कुष्मांडा की मुस्कुराहट से ओतप्रोध है, ऐसे में इस रंग से बेहतर मां का आशीर्वाद लेने के लिए कुछ हो ही नहीं सकता।
- यूं तो मां बहुत ही सरल है और हर तरह के भोग को स्वीकार करती हैं। पर अगर इस दिन मां को मालपुआ चढ़ाया जाए जिसके साथ दही और हलवा भी अर्पित किया जाए तो वह बहुत खुश होती है।
- नवरात्रि की पूजा में यूं भी लाल रंग का फूल सर्वश्रेष्ठ आया है और मां को भी लाल रंग के फूल ही सबसे ज्यादा भातें हैं।
मां कुष्मांडा की पूजा हेतु उनके प्रमुख मंदिर कौन सा है?
यूं तो मां की पूजा आप कहीं भी कर सकते हैं पर दो मंदिरो में मां की पूजा का विशेष महत्व आया है।
- अगर आपको मां के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिर में मां के स्वरूप को दर्शन करना है तो आपको वाराणसी जाना पड़ेगा। यहां का कुष्मांडा मंदिर जिसे लोग दुर्गा मंदिर के नाम से जानते हैं अत्यंत ही प्रसिद्ध है। इस मंदिर के निकट दुर्गाकुंड है।
- अगर आपको मां के चमत्कार को साक्षात देखना है तो आपको कानपुर के घाटमपुर में स्थित मां कुष्मांडा की विशाल मंदिर में जाना होगा। यहां एक पिंडी है जिससे 24 घंटे जल गिरता रहता है यह जल नेत्र रोगियों के लिए अमृत सा काम करता है।
मां की लीलाएं अपरमपार है। पर एक बात जो हर लीला में आम है वह यह कि वह अपने भक्तों पर अपनी कृपा हमेशा बनाए रखती है।
नवरात्रि के दिन यह मंत्र दोहराना ना भूले–
या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
नवरात्रि के नौ दिन और नवदुर्गा का महत्व
| नवरात्रि दिन क्रम | देवी का स्वरूप |
|---|---|
| प्रथम | मां शैलपुत्री |
| द्वितीय | मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीय | मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थ | मां कूष्मांडा |
| पंचम | मां स्कंदमाता |
| षष्ठ | मां कात्यायनी |
| सप्तम | मां कालरात्रि |
| अष्टम | मां महागौरी |
| नवम | मां सिद्धिदात्री / राम नवमी |