Durga

तेरे दर को माई छोड़ काहा जाऊ - Tere Dar Ko Mai Chhod Kaha Jau
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तेरे दर को माई छोड़ काहा जाऊ - Tere Dar Ko Mai Chhod Kaha Jau

परिचय यह भजन माँ दुर्गा माता के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है, जिसमें भक्त कहता है कि वह संसार की हर चीज़ छोड़ सकता है, लेकिन माँ का दरबार नहीं। भावार्थ इस भजन में भक्त माँ से अपनी गहरी आस्था व्यक्त करता है। वह कहता है कि दुनिया में उसे कोई सहारा नहीं दिखता, इसलिए वह पूरी तरह माँ पर निर्भर है। माँ ही उसके दुखों को सुन सकती हैं और उसे जीवन में मार्ग दिखा सकती हैं।
धरती गगन में होती है - Dharti Gagan Mein Hoti Hai
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धरती गगन में होती है - Dharti Gagan Mein Hoti Hai

परिचय  “धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार” एक अत्यंत लोकप्रिय माता भजन है, जो माता दुर्गा माता की महिमा और उनकी सर्वव्यापक शक्ति का गुणगान करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जगराते और मंदिरों में गाया जाता है। भावार्थ  इस भजन में बताया गया है कि माता की महिमा धरती से लेकर आकाश तक फैली हुई है। सृष्टि के सभी देवता, ग्रह-नक्षत्र और जीव माता की शक्ति से ही संचालित होते हैं। भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वह उसके जीवन में कृपा और प्रेम बरसाए, ताकि वह संसार रूपी सागर से पार हो सके।
मां मुरादे पूरी कर दे - Maa Murade Puri Kar De
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मां मुरादे पूरी कर दे - Maa Murade Puri Kar De

परिचय  “माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी” एक भावपूर्ण भक्ति भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता से अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से जगराते, कीर्तन और नवरात्रि के दौरान गाया जाता है। भावार्थ  इस भजन में भक्त माता से कहता है कि यदि उसकी मुराद पूरी हो जाए, तो वह पूरे श्रद्धा भाव से भोग, जगराता और सेवा करेगा। यह भजन सच्ची श्रद्धा, विश्वास और माता के प्रति समर्पण को दर्शाता है, जहाँ भक्त पूरी आस्था के साथ माँ के दरबार में अपनी प्रार्थना रखता है।
लेके पूजा की - Leke Pooja Ki Thali
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लेके पूजा की - Leke Pooja Ki Thali

परिचय  “ले के पूजा की थाली, ज्योत मन की जगाली” एक अत्यंत भावपूर्ण आरती-भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता के चरणों में अपनी भक्ति और समर्पण अर्पित करता है। यह भजन विशेष रूप से आरती के समय, जगराते और नवरात्रि के दौरान गाया जाता है। भावार्थ  इस भजन में भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वह उसे जीवन में सहारा और सुख प्रदान करें। भक्त यह भी कहता है कि माता की कृपा से उसका जीवन सफल हो गया है और वह अपना संपूर्ण जीवन माता की सेवा और भक्ति में समर्पित करना चाहता है।
बिगड़ी मेरी बना दे - Bigdi Meri Bana De
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बिगड़ी मेरी बना दे - Bigdi Meri Bana De

परिचय  “बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरों वाली मैया” एक करुणा और विनती से भरा भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता से अपनी बिगड़ी किस्मत सुधारने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जगराते में गाया जाता है। भावार्थ  इस भजन में भक्त अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए माता से क्षमा और कृपा की याचना करता है। वह कहता है कि माता हर संकट से उबारने वाली हैं, इसलिए उसे भी अपने चरणों में स्थान देकर उसकी जीवन-नैया पार लगाएं।
चरणों में रखना मैया जी - Charno Mein Rakhna Maiya Ji
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चरणों में रखना मैया जी - Charno Mein Rakhna Maiya Ji

परिचय “चरणों में रखना मैया जी” एक अत्यंत भावपूर्ण देवी भजन है। इसमें भक्त अपने जीवन की कठिनाइयों और असहाय स्थिति को व्यक्त करते हुए माता से अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना करता है। यह भजन नवरात्रि, माता की चौकी और जागरण में गहरी श्रद्धा से गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त स्वयं को जीवन की भँवर में फँसी पुरानी नाव के समान बताता है, जिसकी पतवार छूट चुकी है। संसार के लोग साथ छोड़ देते हैं, पर माँ ही सच्चा सहारा और किनारा हैं। भक्त विनम्रता से प्रार्थना करता है कि माँ उसकी खाली झोली भर दें और उसे अपने चरणों में स्थान दें। यह भजन पूर्ण समर्पण, विश्वास और माँ की शरणागति का सुंदर उदाहरण है।
नवरात्रि के नौवें दिन - राम नवमी - किसकी पूजा करें – श्री राम या मां सिद्धिदात्री?
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नवरात्रि के नौवें दिन - राम नवमी - किसकी पूजा करें – श्री राम या मां सिद्धिदात्री?

भाई प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी। हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। इस दोहे का यह अर्थ है की मां कौशल्या के जीवन में खुशहाली और कृपा बरसाने के लिए स्वयं दीनदयाल प्रभु प्रकट हुए हैं। उनका अद्भुत स्वरूप ऋषि मुनियों का भी मनमोह लेने वाला है।  चैत्र के नवरात्रे में नवमी को केवल मां सिद्धिदात्री की ही पूजा नहीं होती वरन् उस दिन को श्री राम के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यही कारण है कि इस नवमी को रामनवमी भी कहा जाता है।  चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन रामनवमी के नाम से जाना जाता है और हिंदुओं का यह एक प्रमुख त्यौहार है। श्री राम जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, विश्व में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से भी जाने जाते हैं, और चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को उनके जन्म दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
मां महागौरी - नवरात्रि के आठवें दिन इस देवी को प्रसन्न करने से बच सकती है आपकी शादी
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मां महागौरी - नवरात्रि के आठवें दिन इस देवी को प्रसन्न करने से बच सकती है आपकी शादी

ॐ देवी महागौर्य नमः।। महा अष्टमी के दिन दुर्गा मां के आठवें स्वरूप यानी की मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां ज्ञान, शांति, और पवित्रता का प्रतीक है। अगर आप भी अपने दाम्पत्य जीवन में कुछ बुरे वक्त से गुजर रहे है तो इस दिन पूरे मन से मां की पूजा करने से तलाक की बात निश्चित रूप से टल सकती है। जानिए कैसे करें मां की पूजा :
शैलपुत्री माता की पूजा विधि । नवरात्रि का पहला दिन क्यों है खास?
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शैलपुत्री माता की पूजा विधि । नवरात्रि का पहला दिन क्यों है खास?

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्य, नमस्तस्य, नमस्तस्य नमो नमः।। नवरात्रि में मां दुर्गा के जिस रूप की सबसे पहले पूजा की जाती है वह है शैलपुत्री। आपमें से काफी लोग सोचते होंगे कि इनका नाम शैलपुत्री क्यों पड़ा। यह पर्वत राज हिमालय की पुत्री है इसीलिए उन्हें शैल की पुत्री यानी पर्वत की बेटी के नाम से संबोधित किया जाता है।
नवरात्रि का तीसरा दिन । मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और महत्व
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नवरात्रि का तीसरा दिन । मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और महत्व

ऐं श्री शक्तयै नमः नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के तीसरे रूप यानी की मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय मुक्त करती है और साथ ही साथ मानसिक शांति भी प्रदान करती है।
नवरात्रि का छठवां दिन – यह गलती आपके व्रत को कर सकता है खंड
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नवरात्रि का छठवां दिन – यह गलती आपके व्रत को कर सकता है खंड

क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः।  नवरात्रि का छठवां दिन महर्षि कात्यायन की पुत्री माता कात्यायनी को समर्पित है। दुर्गा मां के इस छठे रूप की पूजा करते वक्त आपको अत्यंत ही सावधानी बरतनी है।  मां कात्यायनी की पूजा करने से जिसके विवाह में बाधा आ रही हो उनका विवाह आसानी से हो जाता है, हर तरह के दुखों का नाश होता है और भक्तों को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। कुछ भक्त मां की पूजा करते तो है पर गलत तरीके से जिससे उन्हें इच्छानुसार फल नहीं मिलता।
ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि । नवरात्रि का दूसरा दिन क्यों है खास?
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ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि । नवरात्रि का दूसरा दिन क्यों है खास?

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है और माना जाता है कि यह मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है। यह स्वरूप तपस्या, वैराग्य, और ज्ञान का प्रतीक है।
चौथा नवरात्रा – क्या आप जानते है इस दिन होती है सृष्टि के रचनाकार की पूजा?
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चौथा नवरात्रा – क्या आप जानते है इस दिन होती है सृष्टि के रचनाकार की पूजा?

यह तो आप सभी जानते हैं की चौथे नवरात्रे को मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है, पर क्या आपको पता है इस दिन सृष्टि के रचनाकार की भी पूजा होती है? अब आप सोच रहे होंगे कि वह कौन है? वह और कोई नहीं हमारी मां कुष्मांडा ही है। यह माना जाता है की कुष्मांडा मां ने अपनी मीठी मुस्कान से इस ब्रह्मांड को उत्पन्न किया।  उनका निवास स्थान सौर्य मंडल था। इसी कारण जब आप उनकी आठ भुजाओं को देखेंगे तो उसमें आपको अलग-अलग चीज जैसे कि चक्र, अमृत कलश, गदा, कमंडल, बाण, इत्यादि नजर आएंगे।
नवरात्रि का सातवां दिन- क्या मां कालरात्रि का रूप डरावना है
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नवरात्रि का सातवां दिन- क्या मां कालरात्रि का रूप डरावना है

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः कुछ मंत्रों के उच्चारण से ही भक्तों को अत्यंत ही लाभ होता है और मां कालरात्रि का यह मंत्र एक ऐसा अचूक मंत्र है जो अपने भक्तों को हर तरह की मुसीबत से बचाता है।  दुर्गा मां की सबसे ज्यादा उग्र रूप में मां कालरात्रि का रूप माना जाता है और सातवें दिन इन्हीं की पूजा की जाती है। भक्तों को भय, डर, अंधकार और खासकर नकारात्मकता से बचाकर मां अपने भक्तों को खुशहालता की ओर ले जाती है। आश्चर्यचकित हो गए ना? बात हो रही थी मां के डरावने रूप की और यहां यह रूप अपने भक्तों की रक्षा करता है।
नवरात्रि का पांचवा दिन – क्या आप जानते है इस दिन भर सकता है आपके धन का भंडार
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नवरात्रि का पांचवा दिन – क्या आप जानते है इस दिन भर सकता है आपके धन का भंडार

अगर ज्ञान की माता की बात करें तो सभी के मन में मां सरस्वती का ही नाम आता है पर क्या आप जानते हो नवरात्रि की पांचवें दिन पूजे जाने वाली मां स्कंदमाता की पूजा करने से आपका ज्ञान का भंडार भर सकता है? स्कंदमाता की पूजा करने से जिन दंपतियों को संतान नहीं है उन्हें संतान की भी प्राप्ति होती है।  ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।। यह मां दुर्गा का पांचवा रूप हैं और यह ज्ञान और कर्म से ओत प्रोत है। मां के नाम मात्र से ही भक्तों के कष्ट मिट जाते है और वो मोक्ष के भागीदार होते है।