बिगड़ी मेरी बना दे - Bigdi Meri Bana De
“बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरों वाली मैया” एक करुणा और विनती से भरा भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता से अपनी बिगड़ी किस्मत सुधारने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जगराते में गाया जाता है।
|| दोहा ||
सदा पापी से पापी को तुम भव सिंधु तारी हो
कश्ती मझधार में नैया को भी पल में उभारी हो
ना जाने कौन ऐसी भूल मेरे से हो गयी मैया
तुमने अपने इस बालक को मैया मन से विसारी हो
बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरों वाली मैया
अपना मुझे बना ले ए मेहरों वाली मैया
दर्शन को मेरी अखियाँ कब से तरस रहीं हैं
सावन के जैसे झर झर अखियाँ बरस रहीं हैं
दर पे मुझे बुला ले ए शेरों वाली मैया
दर पे मुझे बुला ले ए शेरों वाली मैया
आते हैं तेरे दर पे दुनिया के नर और नारी
सुनती हो सब की विनती मेरी मैया शेरों वाली
मुझको दर्श दिखा दे ए मेहरों वाली मैया
मुझको दर्श दिखा दे ए मेहरों वाली मैया
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परिचय यह भजन माँ जगदंबा के स्वागत और उनके घर आगमन की आनंदमयी भावना को अत्यंत सरल और मधुर शैली में प्रस्तुत करता है। इसमें भक्त पूरे प्रेम और श्रद्धा से माँ का स्वागत करता है—दीप जलाकर, गंगाजल से चरण पखारकर, आरती उतारकर और भोग लगाकर। भजन में गाँव की सादगी और भक्ति का सुंदर मेल दिखाई देता है, जहाँ हर क्रिया में माँ के प्रति अटूट प्रेम झलकता है। भावार्थ इस भजन में भक्त यह व्यक्त करता है कि माँ के घर आने से उसका जीवन धन्य हो गया है। वह पूरे मन से माँ की सेवा करता है और उनके स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ता। गंगाजल से चरण धोना, दीप जलाना और भोग लगाना—ये सभी उसके समर्पण और प्रेम के प्रतीक हैं। भजन यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में बाहरी वैभव से अधिक महत्व भाव और श्रद्धा का होता है, और जब भक्त सच्चे मन से माँ का स्वागत करता है, तो उनका आशीर्वाद उसके जीवन को सुख-समृद्धि से भर देता है।

परिचय यह भजन माँ की असीम ममता, करुणा और उनके विभिन्न दिव्य रूपों की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करता है। इसमें माँ को सृष्टि की सर्वोच्च शक्ति और जीवन की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनके स्नेह के सामने समस्त संसार फीका प्रतीत होता है। भजन में यह भी दर्शाया गया है कि माँ केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि हर कठिन परिस्थिति में अपने बच्चों की रक्षक, मार्गदर्शक और सहारा भी होती हैं। उनके अलग-अलग रूप—काली, दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी—जीवन के विभिन्न पहलुओं में उनकी महत्ता को उजागर करते हैं। भावार्थ इस भजन में भक्त माँ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करता है। वह कहता है कि माँ का नाम लेते ही उसके सारे दुःख और कष्ट दूर हो जाते हैं, क्योंकि माँ हर समय अपने बच्चों की रक्षा के लिए तत्पर रहती हैं। जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, तब माँ ही मरहम बनकर उसे संभालती हैं और उसे सही राह दिखाती हैं। भजन यह भी बताता है कि जीवन एक चादर की तरह है, जिसे माँ अपने प्रेम और संस्कारों से बुनती हैं। अंततः यह संदेश मिलता है कि माँ के स्नेह और आशीर्वाद से ही भाग्य जागृत होता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।

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परिचय यह भजन माँ के प्रति भक्त की सरल, पवित्र और गहरी इच्छा को व्यक्त करता है, जिसमें वह अपने घर को ही एक मंदिर के रूप में देखना चाहता है। इसमें वह माँ से प्रार्थना करता है कि उसके घर में ऐसा वातावरण बने, जहाँ हर समय भक्ति, सेवा और श्रद्धा का वास हो। भजन में माँ की कृपा, उनके सान्निध्य और उनके नाम की ज्योति को जीवन का सबसे बड़ा सुख बताया गया है। यह भजन भक्ति और सेवा के आदर्श जीवन की प्रेरणा देता है। भावार्थ इस भजन में भक्त माँ से यह वरदान मांगता है कि उसका घर ऐसा हो, जहाँ हर समय माँ का वास हो और उनकी ज्योति निरंतर जलती रहे। वह चाहता है कि उसके घर से कोई भी खाली हाथ न लौटे और सभी को समान सम्मान और प्रेम मिले। भजन यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे घर और व्यवहार में भी झलकनी चाहिए। अंततः यह संदेश देता है कि यदि हम अपने जीवन और घर को सेवा, दया और श्रद्धा से भर दें, तो वही स्थान एक पवित्र मंदिर बन जाता है, जहाँ स्वयं माँ का निवास होता है।

परिचय यह भजन माँ दुर्गा को अपने घर आमंत्रित करने की एक भावपूर्ण और सच्ची पुकार है, जिसमें भक्त नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ को अपने घर पधारने की विनती करता है। इसमें माँ के विभिन्न स्वरूपों, उनकी सवारी, उनके श्रृंगार और उनकी महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। भजन में भक्त का प्रेम, उसकी श्रद्धा और माँ के दर्शन पाने की तीव्र इच्छा स्पष्ट रूप से झलकती है, जो इसे अत्यंत मधुर और भक्तिमय बनाती है। भावार्थ इस भजन में भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे उसके घर आकर उसे अपने दर्शन दें और उसके जीवन को धन्य करें। वह कहता है कि वह पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करेगा, भोग लगाएगा और आरती करेगा। भजन यह भी दर्शाता है कि माँ के नौ रूपों की उपासना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अंततः यह संदेश मिलता है कि सच्चे मन से माँ को बुलाने पर वे अवश्य अपने भक्त के पास आती हैं और उसकी हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।

परिचय यह भजन माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों और उनकी असीम शक्ति, करुणा और महिमा का अत्यंत भव्य और भक्तिपूर्ण वर्णन करता है। इसमें माँ को “सर्व मंगल मांगल्ये” कहकर उनकी सार्वभौमिक शक्ति और कृपा को प्रणाम किया गया है। भजन में नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाने वाले माँ के विभिन्न रूपों—शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक—का सुंदर उल्लेख है, जो भक्तों को उनके विविध स्वरूपों और उनकी महत्ता से परिचित कराता है। यह भजन भक्ति, श्रद्धा और उत्सव का अद्भुत संगम है। भावार्थ इस भजन में यह भाव प्रकट किया गया है कि माँ दुर्गा ही समस्त संसार की रक्षक और पालनकर्ता हैं, जो अपने विभिन्न रूपों में भक्तों के कष्टों को दूर करती हैं। उनके नाम का स्मरण ही सबसे बड़ा सहारा है, जो जीवन के हर संकट को समाप्त कर सकता है। भजन यह भी दर्शाता है कि माँ के दरबार में सच्चे मन से झुकने पर हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है। माँ के नौ रूपों के माध्यम से यह सिखाया गया है कि वे हर रूप में अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाती हैं। यह भजन हमें माँ के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

परिचय यह भजन माँ के दरबार की महिमा, वहाँ मिलने वाले स्नेह, अपनापन और दिव्य आनंद का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें एक भक्त की वर्षों की प्रतीक्षा और उसकी पूर्ण हुई इच्छा का वर्णन है, जब उसे माँ के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। भजन यह दर्शाता है कि माँ का आंगन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि प्रेम, शांति और आध्यात्मिक आनंद का केंद्र है, जहाँ पहुँचकर हर भक्त अपने सभी दुख भूल जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त अपनी प्रसन्नता और कृतज्ञता व्यक्त करता है कि उसे माँ के दरबार में हाजिरी लगाने का अवसर मिला। वह बताता है कि माँ के दरबार में हमेशा प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा रहती है, और वहाँ जाने वाला हर व्यक्ति एक नई अनुभूति प्राप्त करता है। माँ की कृपा से उसकी झोली भर गई और उसके जीवन की सभी इच्छाएं पूरी हो गईं। भजन यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ को पुकारने पर वे अवश्य अपने भक्त को दर्शन देती हैं और उसे अपने आशीर्वाद से धन्य करती हैं।

परिचय यह भजन मां के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना को अत्यंत भावुक और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें मां को जीवन का आधार, शक्ति का स्रोत और सच्चे अर्थों में संसार का रूप बताया गया है। भजन में यह भाव प्रकट होता है कि मां की ममता, उसका आंचल और उसकी दुआएं ही संतान के जीवन को दिशा, सुरक्षा और सुकून प्रदान करती हैं। यह भजन हर व्यक्ति को अपनी मां के महत्व और उसके अनमोल प्रेम का एहसास कराता है। भावार्थ इस भजन में संतान अपनी मां के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता है और स्वीकार करता है कि जीवन के हर कठिन क्षण में मां ही उसका सहारा बनी है। जब-जब दुख और पीड़ा आई, मां के आंचल ने उसे संभाला और उसकी दुआओं ने उसे बचाया। मां की गोद को स्वर्ग के समान बताया गया है, जहां सुकून और शांति मिलती है। भजन यह भी दर्शाता है कि मां की शक्ति और आशीर्वाद से ही संतान हर चुनौती का सामना कर पाती है। अंततः यह संदेश दिया गया है कि हमें हमेशा अपनी मां के प्रति सम्मान, प्रेम और समर्पण बनाए रखना चाहिए, क्योंकि वही हमारे जीवन की सबसे बड़ी ताकत और सच्चा सहारा है।

परिचय यह भजन माँ दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें माँ को सृष्टि की जननी, शक्ति का स्रोत और अपने भक्तों की सच्ची रक्षक के रूप में स्मरण किया गया है। भजन में भक्त माँ की ममता, उनकी कृपा और उनके विभिन्न रूपों—जगदंबा, भवानी, रुद्राणी, ब्रह्माणी—का गुणगान करते हुए उनसे अपने जीवन में मार्गदर्शन और संरक्षण की प्रार्थना करता है। यह भजन भक्त और माँ के बीच के गहरे भावनात्मक संबंध को उजागर करता है। भावार्थ इस भजन में भक्त यह स्वीकार करता है कि संसार में माँ की ममता से बढ़कर कुछ भी नहीं है और वही उसके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति और सहारा है। जब भी वह डरता है या जीवन में भटकता है, वह माँ से हिम्मत और सही रास्ता दिखाने की प्रार्थना करता है। भजन यह भी दर्शाता है कि संसार के धोखे और दुखों से थककर भक्त अंततः माँ की शरण में आता है और उनसे अपने जीवन की नैया पार लगाने की विनती करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से माँ को पुकारने पर वे अवश्य अपने भक्त की रक्षा करती हैं, उसे साहस देती हैं और जीवन की हर कठिनाई में उसका मार्गदर्शन करती हैं।