Maa

माँ - Maa
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माँ - Maa

परिचय यह भजन माँ की असीम ममता, करुणा और उनके विभिन्न दिव्य रूपों की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करता है। इसमें माँ को सृष्टि की सर्वोच्च शक्ति और जीवन की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनके स्नेह के सामने समस्त संसार फीका प्रतीत होता है। भजन में यह भी दर्शाया गया है कि माँ केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि हर कठिन परिस्थिति में अपने बच्चों की रक्षक, मार्गदर्शक और सहारा भी होती हैं। उनके अलग-अलग रूप—काली, दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी—जीवन के विभिन्न पहलुओं में उनकी महत्ता को उजागर करते हैं। भावार्थ इस भजन में भक्त माँ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करता है। वह कहता है कि माँ का नाम लेते ही उसके सारे दुःख और कष्ट दूर हो जाते हैं, क्योंकि माँ हर समय अपने बच्चों की रक्षा के लिए तत्पर रहती हैं। जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, तब माँ ही मरहम बनकर उसे संभालती हैं और उसे सही राह दिखाती हैं। भजन यह भी बताता है कि जीवन एक चादर की तरह है, जिसे माँ अपने प्रेम और संस्कारों से बुनती हैं। अंततः यह संदेश मिलता है कि माँ के स्नेह और आशीर्वाद से ही भाग्य जागृत होता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।
माँ अंजनी का लाला है - Maa Anjani Ka Lala Hai
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माँ अंजनी का लाला है - Maa Anjani Ka Lala Hai

परिचय यह भजन भगवान हनुमान जी की अपार शक्ति, भक्ति और उनके चमत्कारी स्वरूप का अत्यंत सुंदर वर्णन करता है। इसमें उन्हें माँ अंजनी के लाल, राम-नाम में लीन और भक्तों के संकट हरने वाले देव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन हनुमान जी की महिमा का गुणगान करते हुए भक्त के मन में साहस, विश्वास और भक्ति का संचार करता है। भावार्थ भजन में बताया गया है कि जो भी भक्त हनुमान जी की शरण में आता है, उसे सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं और उसके जीवन के भय, रोग, बाधाएँ और संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान जी भूत-प्रेतों को दूर करने वाले, रोगों का नाश करने वाले और अपने भक्तों पर कृपा बरसाने वाले हैं। यह भजन विश्वास दिलाता है कि हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से जीवन की हर कठिनाई सरल हो जाती है और भक्त निर्भय होकर जीवन जीता है।
मां वेदों ने जो तेरी महिमा कही है - Maa Vedo Ne Jo Teri Mahima Kahi Hai
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मां वेदों ने जो तेरी महिमा कही है - Maa Vedo Ne Jo Teri Mahima Kahi Hai

परिचय यह भजन माँ दुर्गा माता की महिमा का गुणगान करता है। इसमें वेदों में वर्णित माँ की महानता, उनकी करुणा और सृष्टि की रचना में उनकी भूमिका का वर्णन किया गया है। भावार्थ इस भजन में बताया गया है कि माँ ही सम्पूर्ण सृष्टि की रचयिता हैं और विभिन्न नामों से पूजी जाती हैं। भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि उसे भक्ति, ज्ञान और कृपा का आशीर्वाद मिले। माँ की ममता और दया ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।
माई नी माई - Maai Ni Maai
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माई नी माई - Maai Ni Maai

परिचय यह भजन माँ दुर्गा माता के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को दर्शाता है, जिसमें भक्त माँ से केवल उनका स्नेह और कृपा मांगता है। भावार्थ इस भजन में भक्त दुनिया के झूठे रिश्तों और अस्थायी सुखों से निराश होकर माँ की शरण में आता है। वह कहता है कि उसे किसी भौतिक वस्तु की चाह नहीं, केवल माँ का प्रेम और आशीर्वाद चाहिए। माँ की कृपा से ही उसका जीवन सफल और सुखमय हो सकता है।
मां मुरादे पूरी कर दे - Maa Murade Puri Kar De
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मां मुरादे पूरी कर दे - Maa Murade Puri Kar De

परिचय  “माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी” एक भावपूर्ण भक्ति भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता से अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से जगराते, कीर्तन और नवरात्रि के दौरान गाया जाता है। भावार्थ  इस भजन में भक्त माता से कहता है कि यदि उसकी मुराद पूरी हो जाए, तो वह पूरे श्रद्धा भाव से भोग, जगराता और सेवा करेगा। यह भजन सच्ची श्रद्धा, विश्वास और माता के प्रति समर्पण को दर्शाता है, जहाँ भक्त पूरी आस्था के साथ माँ के दरबार में अपनी प्रार्थना रखता है।
 माई - Maai
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माई - Maai

परिचय  “हो माई री” एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है, जो माता दुर्गा माता की असीम ममता और करुणा का गुणगान करता है। इस भजन में एक भक्त अपने आप को मां का बालक मानकर उनके प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम व्यक्त करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जागरण में गाया जाता है। भावार्थ  इस भजन का मूल भाव मां और भक्त के अटूट संबंध को दर्शाना है। भक्त कहता है कि मां ने उसे बिना मांगे सब कुछ दिया, जीवन जीने की राह दिखाई और हर कठिनाई में उसका साथ दिया। यह भजन हमें यह सिखाता है कि मां की ममता सबसे बड़ी शक्ति है और जो उनके चरणों में समर्पित हो जाता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।
माँ का बुलावा आया है - Maa Ka Bulawa Aaya Hai
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माँ का बुलावा आया है - Maa Ka Bulawa Aaya Hai

परिचय “माँ का बुलावा आया है” एक प्रसिद्ध देवी भजन है जो विशेष रूप से माता वैष्णो देवी की यात्रा के समय गाया जाता है। यह भजन बताता है कि माँ जब अपने भक्त को बुलाती हैं, तभी उसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। भावार्थ इस भजन में पर्वतों की चढ़ाई, पाँव के छाले और “जय माता दी” के जयकारे के माध्यम से भक्त की श्रद्धा और समर्पण को दर्शाया गया है। भक्त मानता है कि माँ उसके दुःख को बिना कहे ही समझ लेती हैं और उसके कष्टों से पहले स्वयं रो पड़ती हैं। “माँ का बुलावा” यह संकेत है कि माता की कृपा के बिना उनके दरबार तक पहुँचना संभव नहीं। पाठ का फल इस भजन को श्रद्धा से गाने या सुनने से मन में उत्साह, विश्वास और भक्ति की वृद्धि होती है। यात्रा के दौरान इसे गाने से थकान कम महसूस होती है और मन में शक्ति आती है। माँ की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे - Kaisi Ye Der Lagai Maa Durge
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कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे - Kaisi Ye Der Lagai Maa Durge

यह भजन माँ दुर्गा माता की शरणागति और भक्त की विनम्र प्रार्थना को दर्शाता है। इसमें भक्त अपनी कमजोरी स्वीकार करते हुए माँ से कृपा और सहारे की याचना करता है।
श्री गंगा चालीसा - Shree Ganga Chalisa
Chalisa

श्री गंगा चालीसा - Shree Ganga Chalisa

गंगा चालीसा माँ गंगा के पावन रूप, उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व का सुंदर स्तवन है। यह चालीसा माँ गंगा की लीलाओं, उनकी पवित्रता और भक्तों पर कृपा का वर्णन करती है। इसमें उनके तीर्थों, जलधाराओं और धर्म-रक्षा करने वाले कार्यों का विशेष उल्लेख है। इसे पढ़ने से भक्तों के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।
नवरात्रि के नौवें दिन - राम नवमी - किसकी पूजा करें – श्री राम या मां सिद्धिदात्री?
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नवरात्रि के नौवें दिन - राम नवमी - किसकी पूजा करें – श्री राम या मां सिद्धिदात्री?

भाई प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी। हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। इस दोहे का यह अर्थ है की मां कौशल्या के जीवन में खुशहाली और कृपा बरसाने के लिए स्वयं दीनदयाल प्रभु प्रकट हुए हैं। उनका अद्भुत स्वरूप ऋषि मुनियों का भी मनमोह लेने वाला है।  चैत्र के नवरात्रे में नवमी को केवल मां सिद्धिदात्री की ही पूजा नहीं होती वरन् उस दिन को श्री राम के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यही कारण है कि इस नवमी को रामनवमी भी कहा जाता है।  चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन रामनवमी के नाम से जाना जाता है और हिंदुओं का यह एक प्रमुख त्यौहार है। श्री राम जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, विश्व में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से भी जाने जाते हैं, और चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को उनके जन्म दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर- जहां होती है सारी इच्छाएं पूरी
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दक्षिणेश्वर काली मंदिर- जहां होती है सारी इच्छाएं पूरी

मां काली तुम्हारी वहां भी रक्षा करती है, जहां तुमने कभी सोचा भी ना था! कलकत्ता में हुगली नदी के किनारे टहलते हुए अगर मां काली के अद्भुत दर्शन करने हैं तो आप सीधा दक्षिणेश्वर काली मंदिर चले जाए। मां काली का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर, जिसे रानी राशमोनी ने बनाया था। यह मंदिर 1855 में बना था और इसे पूरे तरह से मां काली के भवतारिणी रूप को समर्पित किया गया है। इस मंदिर में पैर रखने के साथ-साथ आपको बंगाली वास्तुकला के साक्षात उदाहरण मिलेंगे।  आगे बढ़ने से पहले आपको यह बता दे कि यह वही स्थान है जहां स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने मां काली की साधना की थी।
मां महागौरी - नवरात्रि के आठवें दिन इस देवी को प्रसन्न करने से बच सकती है आपकी शादी
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मां महागौरी - नवरात्रि के आठवें दिन इस देवी को प्रसन्न करने से बच सकती है आपकी शादी

ॐ देवी महागौर्य नमः।। महा अष्टमी के दिन दुर्गा मां के आठवें स्वरूप यानी की मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां ज्ञान, शांति, और पवित्रता का प्रतीक है। अगर आप भी अपने दाम्पत्य जीवन में कुछ बुरे वक्त से गुजर रहे है तो इस दिन पूरे मन से मां की पूजा करने से तलाक की बात निश्चित रूप से टल सकती है। जानिए कैसे करें मां की पूजा :
शैलपुत्री माता की पूजा विधि । नवरात्रि का पहला दिन क्यों है खास?
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शैलपुत्री माता की पूजा विधि । नवरात्रि का पहला दिन क्यों है खास?

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्य, नमस्तस्य, नमस्तस्य नमो नमः।। नवरात्रि में मां दुर्गा के जिस रूप की सबसे पहले पूजा की जाती है वह है शैलपुत्री। आपमें से काफी लोग सोचते होंगे कि इनका नाम शैलपुत्री क्यों पड़ा। यह पर्वत राज हिमालय की पुत्री है इसीलिए उन्हें शैल की पुत्री यानी पर्वत की बेटी के नाम से संबोधित किया जाता है।
नवरात्रि का तीसरा दिन । मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और महत्व
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नवरात्रि का तीसरा दिन । मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और महत्व

ऐं श्री शक्तयै नमः नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के तीसरे रूप यानी की मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय मुक्त करती है और साथ ही साथ मानसिक शांति भी प्रदान करती है।
नवरात्रि का छठवां दिन – यह गलती आपके व्रत को कर सकता है खंड
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नवरात्रि का छठवां दिन – यह गलती आपके व्रत को कर सकता है खंड

क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः।  नवरात्रि का छठवां दिन महर्षि कात्यायन की पुत्री माता कात्यायनी को समर्पित है। दुर्गा मां के इस छठे रूप की पूजा करते वक्त आपको अत्यंत ही सावधानी बरतनी है।  मां कात्यायनी की पूजा करने से जिसके विवाह में बाधा आ रही हो उनका विवाह आसानी से हो जाता है, हर तरह के दुखों का नाश होता है और भक्तों को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। कुछ भक्त मां की पूजा करते तो है पर गलत तरीके से जिससे उन्हें इच्छानुसार फल नहीं मिलता।
ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि । नवरात्रि का दूसरा दिन क्यों है खास?
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ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि । नवरात्रि का दूसरा दिन क्यों है खास?

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है और माना जाता है कि यह मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है। यह स्वरूप तपस्या, वैराग्य, और ज्ञान का प्रतीक है।
चौथा नवरात्रा – क्या आप जानते है इस दिन होती है सृष्टि के रचनाकार की पूजा?
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चौथा नवरात्रा – क्या आप जानते है इस दिन होती है सृष्टि के रचनाकार की पूजा?

यह तो आप सभी जानते हैं की चौथे नवरात्रे को मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है, पर क्या आपको पता है इस दिन सृष्टि के रचनाकार की भी पूजा होती है? अब आप सोच रहे होंगे कि वह कौन है? वह और कोई नहीं हमारी मां कुष्मांडा ही है। यह माना जाता है की कुष्मांडा मां ने अपनी मीठी मुस्कान से इस ब्रह्मांड को उत्पन्न किया।  उनका निवास स्थान सौर्य मंडल था। इसी कारण जब आप उनकी आठ भुजाओं को देखेंगे तो उसमें आपको अलग-अलग चीज जैसे कि चक्र, अमृत कलश, गदा, कमंडल, बाण, इत्यादि नजर आएंगे।
नवरात्रि का सातवां दिन- क्या मां कालरात्रि का रूप डरावना है
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नवरात्रि का सातवां दिन- क्या मां कालरात्रि का रूप डरावना है

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः कुछ मंत्रों के उच्चारण से ही भक्तों को अत्यंत ही लाभ होता है और मां कालरात्रि का यह मंत्र एक ऐसा अचूक मंत्र है जो अपने भक्तों को हर तरह की मुसीबत से बचाता है।  दुर्गा मां की सबसे ज्यादा उग्र रूप में मां कालरात्रि का रूप माना जाता है और सातवें दिन इन्हीं की पूजा की जाती है। भक्तों को भय, डर, अंधकार और खासकर नकारात्मकता से बचाकर मां अपने भक्तों को खुशहालता की ओर ले जाती है। आश्चर्यचकित हो गए ना? बात हो रही थी मां के डरावने रूप की और यहां यह रूप अपने भक्तों की रक्षा करता है।
नवरात्रि का पांचवा दिन – क्या आप जानते है इस दिन भर सकता है आपके धन का भंडार
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नवरात्रि का पांचवा दिन – क्या आप जानते है इस दिन भर सकता है आपके धन का भंडार

अगर ज्ञान की माता की बात करें तो सभी के मन में मां सरस्वती का ही नाम आता है पर क्या आप जानते हो नवरात्रि की पांचवें दिन पूजे जाने वाली मां स्कंदमाता की पूजा करने से आपका ज्ञान का भंडार भर सकता है? स्कंदमाता की पूजा करने से जिन दंपतियों को संतान नहीं है उन्हें संतान की भी प्राप्ति होती है।  ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।। यह मां दुर्गा का पांचवा रूप हैं और यह ज्ञान और कर्म से ओत प्रोत है। मां के नाम मात्र से ही भक्तों के कष्ट मिट जाते है और वो मोक्ष के भागीदार होते है।