किस लिए आस छोड़ें कभी ना कभी - Kis Liye Aas Chordhe Kabhi Na Kabhi
परिचय
यह भजन प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास, धैर्य और प्रेमपूर्ण प्रतीक्षा की भावना को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की व्यथा और आशा दोनों को एक साथ प्रकट करता है, यह विश्वास रखते हुए कि प्रभु अपने सच्चे भक्तों को कभी निराश नहीं करते। भजन में रामायण के प्रसंगों का उल्लेख कर यह बताया गया है कि प्रभु ने हमेशा अपने भक्तों की पुकार सुनी है और उनके पास स्वयं पहुँचकर उन्हें कष्टों से मुक्त किया है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त यह संदेश देता है कि कभी भी प्रभु से मिलने की आशा नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि विरह के क्षण एक दिन मिलन में अवश्य बदलते हैं। शबरी, केवट, जटायु और अहिल्या जैसे भक्तों के उदाहरण देकर यह विश्वास दिलाया गया है कि प्रभु अपने भक्तों के प्रेम से बंधे होते हैं और उनके आँसुओं से अवश्य पिघल जाते हैं। भक्त यह भी भाव व्यक्त करता है कि जब प्रभु दर्शन देने आएंगे, तो वह उन्हें प्रेमपूर्वक रोक लेगा और अपने मन की सारी बात कहेगा। अंततः वह प्रभु से प्रार्थना करता है कि वे उस पर कृपा करें और उसके जीवन को सफल बनाएं, क्योंकि जीवन अनिश्चित है और प्रभु की कृपा ही उसका सच्चा आधार है।