किस लिए आस छोड़ें कभी ना कभी - Kis Liye Aas Chordhe Kabhi Na Kabhi
यह भजन प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास, धैर्य और प्रेमपूर्ण प्रतीक्षा की भावना को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की व्यथा और आशा दोनों को एक साथ प्रकट करता है, यह विश्वास रखते हुए कि प्रभु अपने सच्चे भक्तों को कभी निराश नहीं करते। भजन में रामायण के प्रसंगों का उल्लेख कर यह बताया गया है कि प्रभु ने हमेशा अपने भक्तों की पुकार सुनी है और उनके पास स्वयं पहुँचकर उन्हें कष्टों से मुक्त किया है।
किस लिए आस छोड़े कभी ना कभी
क्षण विरह के मिलन में बदल जाएंगे॥
नाथ कब तक रहेंगे कड़े एक दिन
देख कर प्रेम आंसू पिघल जाएंगे॥
इसलिए आस छोड़ें कभी ना कभी
इसलिए आस छोड़ें कभी ना कभी॥
शबरी, केवट, जटायु, अहिल्या के पास
पहुँचे प्रभु त्याग करके अवध॥
ये हैं घटनाएं, सच तो भरोसा सा हमें
हमें आप खुद आकर के मिल जाएंगे॥
दर्श देने को रघुवर जी आएंगे जब
हम ना मानेंगे अपनी चलाए बिना॥
जाने ना देंगे वापस किसी शर्त पर
बस कमल पद पकड़कर मचल जाएंगे॥
फिर सुनाएंगे खोटी खरी आपको
और पूछेंगे देरी लगाई कहाँ॥
फिर निवेदन करेंगे – ना छोड़ो हमें
प्रभु की झूठन प्रसादी पे पल जाएंगे॥
इसलिए आस छोड़ें कभी ना कभी
इसलिए आस छोड़ें कभी ना कभी॥
सपना साकार होगा तभी राम जी
जन पे हो जाए थोड़ी कृपा आपकी॥
पूर्ण कर दो मनोरथ ये राजेश का
जाने कब प्राण तन से निकल जाएंगे॥
इसलिए आस छोड़ें कभी ना कभी
इसलिए आस छोड़ें कभी ना कभी॥
विरह के मिलन में बदल जाएंगे
नाथ कब तक रहेंगे कड़े॥
एक दिन देखकर प्रेम आंसू
आप भी तो पिघल जाएंगे॥
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