मोहन तुम ही सहारा - Mohan Tum Hi Sahara

यह भावपूर्ण कृष्ण भजन एक भक्त के हृदय की गहन पुकार और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उसकी पूर्ण शरणागति को व्यक्त करता है। भजन में संसार की कठिनाइयों, मोह-माया और संघर्षों से थके हुए जीव की व्यथा का सुंदर चित्रण किया गया है, जो अंततः अपने जीवन का एकमात्र सहारा श्रीराधा-कृष्ण को मान लेता है। वृंदावन की पावन गलियों, राधा नाम की महिमा तथा श्रीकृष्ण के प्रेममय स्वरूप का अत्यंत मधुर वर्णन इस भजन को विशेष बनाता है। प्रत्येक पंक्ति भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाती है, जहाँ भक्त अपने समस्त दुख, चिंता और असहायता को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। यह भजन श्रद्धा, प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण की भावना को जागृत करने वाला एक सुंदर भक्तिगीत है।

जय जय राधे राधे, जय जय श्यामा श्यामा।
जय मुरलीधर मोहन, जय मुरलीधर कान्हा।।

जय जय राधे राधे, जय जय श्यामा श्यामा।
जय मुरलीधर मोहन, जय मुरलीधर कान्हा।।

दुनियादारी से मैं हारा, दुनियादारी से मैं हारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

दुनियादारी से मैं हारा, दुनियादारी से मैं हारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

अब हो मोहन तुम ही सहारा, अब हो मोहन तुम ही सहारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

वृंदावन की इन गलियों में, कान्हा तुमको मिलेंगे जब।
धड़कनें थम जाएँगी, पास तुम्हारे होंगे जब।।

वृंदावन की इन गलियों में, कान्हा तुमको मिलेंगे जब।
धड़कनें थम जाएँगी, पास तुम्हारे होंगे जब।।

पास तुम्हारे होंगे जब, मेरी नैया का हो किनारा।
मेरी नैया का हो किनारा, अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

दुनियादारी से मैं हारा, दुनियादारी से मैं हारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

श्याम सुंदर कदम-कदम पर, साथ तुम्हारा निभाएँगे।
जब पुकारोगे राधा-राधा जप कर कान्हा दौड़े आएँगे।।

ना रहा मैं मेरा, मैं तो बस हूँ तेरा।
ओ मेरे साँवरिया, कैसा जादू किया।।

मेरी आँखें इतनी तरसी हैं, याद बनके बरसी हैं।
ओ मेरे कन्हैया, मेरा दिल ले लिया।।

मैंने रो के तुमको पुकारा, मैंने रो के तुमको पुकारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

दुनियादारी से मैं हारा, दुनियादारी से मैं हारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

अब हो मोहन तुम ही सहारा, अब हो मोहन तुम ही सहारा।
अब हो मोहन तुम ही सहारा।।

जय जय राधे राधे, जय जय श्यामा श्यामा।
जय मुरलीधर मोहन, जय मुरलीधर कान्हा।।

जय जय राधे राधे, जय जय श्यामा श्यामा।
जय मुरलीधर मोहन, जय मुरलीधर कान्हा।।

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किस लिए आस छोड़ें कभी ना कभी - Kis Liye Aas Chordhe Kabhi Na Kabhi
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परिचय यह भजन प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास, धैर्य और प्रेमपूर्ण प्रतीक्षा की भावना को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की व्यथा और आशा दोनों को एक साथ प्रकट करता है, यह विश्वास रखते हुए कि प्रभु अपने सच्चे भक्तों को कभी निराश नहीं करते। भजन में रामायण के प्रसंगों का उल्लेख कर यह बताया गया है कि प्रभु ने हमेशा अपने भक्तों की पुकार सुनी है और उनके पास स्वयं पहुँचकर उन्हें कष्टों से मुक्त किया है। भावार्थ इस भजन में भक्त यह संदेश देता है कि कभी भी प्रभु से मिलने की आशा नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि विरह के क्षण एक दिन मिलन में अवश्य बदलते हैं। शबरी, केवट, जटायु और अहिल्या जैसे भक्तों के उदाहरण देकर यह विश्वास दिलाया गया है कि प्रभु अपने भक्तों के प्रेम से बंधे होते हैं और उनके आँसुओं से अवश्य पिघल जाते हैं। भक्त यह भी भाव व्यक्त करता है कि जब प्रभु दर्शन देने आएंगे, तो वह उन्हें प्रेमपूर्वक रोक लेगा और अपने मन की सारी बात कहेगा। अंततः वह प्रभु से प्रार्थना करता है कि वे उस पर कृपा करें और उसके जीवन को सफल बनाएं, क्योंकि जीवन अनिश्चित है और प्रभु की कृपा ही उसका सच्चा आधार है।

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परिचय यह भजन राधा-कृष्ण के मधुर प्रेम और उनकी सुंदर लीलाओं का वर्णन करता है। इसमें “परदा हटाना” भगवान के दर्शन और उनकी कृपा का प्रतीक है। भजन बताता है कि सच्चे प्रेम और भक्ति से ही भगवान का अनुभव किया जा सकता है। भावार्थ इस भजन में भक्त भगवान के दिव्य स्वरूप और उनकी मधुर अदाओं का वर्णन करता है। भगवान की एक झलक, मुस्कान और इशारे भक्त के मन को मोह लेते हैं। यहाँ “क़त्ल” का अर्थ यह है कि भगवान के प्रेम में भक्त अपना अहंकार भूलकर पूरी तरह उनकी भक्ति में डूब जाता है।

वृन्दावन वास चाहिए - Vrindavan Vaas Chahiye
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परिचय यह अत्यंत मधुर एवं रसपूर्ण भजन श्रीधाम वृंदावन की महिमा, श्रीराधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम तथा ब्रजवास की उत्कट अभिलाषा का भावपूर्ण वर्णन करता है। भजन में भक्त अपने जीवन की सबसे बड़ी कामना के रूप में वृंदावन धाम में निवास प्राप्त करने की प्रार्थना करता है। यमुना महारानी के पावन तट, निधिवन की दिव्यता, रसिक संतों की संगति तथा श्रीराधा रानी की असीम कृपा का सुंदर चित्रण इस रचना में किया गया है। भक्त मानता है कि संसार के समस्त सुखों से बढ़कर वृंदावन की धूल, वहाँ का वातावरण और भगवान के नाम का निरंतर स्मरण है। इस भजन में केवल धामवास की इच्छा ही नहीं, बल्कि ऐसा जीवन जीने की प्रार्थना भी है जिसमें मन, वचन और कर्म पूर्णतः श्रीराधा-कृष्ण की भक्ति में समर्पित हो जाएँ। भजन का प्रत्येक शब्द ब्रज प्रेम, वैराग्य, शरणागति और दिव्य रस की अनुभूति कराता है। भावार्थ इस भजन का मूल संदेश यह है कि श्रीवृंदावन धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी की दिव्य लीलाओं का शाश्वत धाम है, जहाँ पहुँचकर जीव को आध्यात्मिक शांति, प्रेम और परम आनंद की प्राप्ति होती है। भक्त प्रार्थना करता है कि उसे संसार की क्षणभंगुर इच्छाओं के स्थान पर वृंदावन में रहने का सौभाग्य प्राप्त हो, क्योंकि वहीं सच्चे संतों और रसिक भक्तों का संग मिलता है, जिनकी कृपा से भक्ति का विकास होता है और भगवान के प्रति प्रेम बढ़ता है। भजन में यह भावना भी व्यक्त की गई है कि जीवन की हर परिस्थिति में भक्त प्रभु की इच्छा को स्वीकार करने के लिए तैयार है, बस उसे वृंदावन और भगवान का स्मरण कभी न छूटे। वह श्यामा-कुंजबिहारी से धामवास की भिक्षा माँगता है और चाहता है कि उसका प्रत्येक श्वास वृंदावन की पावन भूमि में ही निकले। अंत में भक्त की सर्वोच्च इच्छा यह प्रकट होती है कि मृत्यु के समय भी उसके मन में केवल श्रीराधा-कृष्ण, उनके प्रिय धाम, गुरुदेव और ब्रज की लीलाओं का स्मरण रहे। यह भजन सिखाता है कि भगवान की भक्ति, संतों का संग और धाम का प्रेम ही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि और वास्तविक संपदा है।

हे गोपाल राधा कृष्ण गोविंद गोविंद - Hey Gopal Radha Krishna Govind Govind Sankirtan
हे गोपाल राधा कृष्ण गोविंद गोविंद - Hey Gopal Radha Krishna Govind Govind Sankirtan

परिचय यह अत्यंत मधुर और भक्तिरस से परिपूर्ण श्रीकृष्ण नाम-स्मरण भजन भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न दिव्य नामों का संकीर्तन करता है। “गोपाल”, “राधा कृष्ण” और “गोविंद” जैसे पावन नाम भक्त के मन को भक्ति, प्रेम और शांति से भर देते हैं। इस भजन का सरल और मधुर स्वरूप सामूहिक संकीर्तन, भजन मंडली और ध्यान के समय विशेष आनंद प्रदान करता है। बार-बार भगवान के नामों का उच्चारण करते हुए भक्त अपने मन को संसारिक चिंताओं से हटाकर श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन कर देता है। यह भजन नाम-जप की महिमा को दर्शाता है और बताता है कि भगवान का नाम ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा और आत्मिक आनंद का स्रोत है। भावार्थ इस भजन में भक्त भगवान श्रीकृष्ण को उनके प्रिय नामों से पुकारते हुए उनका स्मरण करता है। “गोपाल” भगवान के उस रूप को दर्शाता है जो अपने भक्तों और समस्त जीवों का पालन करते हैं, जबकि “गोविंद” आनंद और करुणा के स्वरूप श्रीकृष्ण का नाम है। भजन यह संदेश देता है कि भगवान के नामों का निरंतर जप करने से मन शुद्ध होता है और भक्त के भीतर प्रेम, भक्ति और शांति का संचार होता है। यह संकीर्तन भक्त को श्रीराधा-कृष्ण की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कराते हुए उसे भक्ति रस में डुबो देता है।

मैं तो गोवर्धन कु जाऊ मेरी वीर - Mai To Govardhan Ku Jau Meri Veer
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परिचय यह अत्यंत मधुर और भक्तिरस से भरा गोवर्धन भजन भक्त के मन में बसे ब्रज प्रेम और गिरिराज गोवर्धन के प्रति अटूट श्रद्धा का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में भक्त अपने मन की तीव्र इच्छा व्यक्त करता है कि वह गोवर्धन धाम जाकर गिरिराज जी की परिक्रमा करे, मानसी गंगा में स्नान करे और संतों की सेवा कर भगवान के दर्शन प्राप्त करे। भजन में ब्रजभक्ति की सरलता और प्रेममयी भावना झलकती है। भक्त का मन संसार में कहीं नहीं लगता और वह बार-बार केवल गोवर्धन जाने की ही इच्छा प्रकट करता है। गिरिराज महाराज की परिक्रमा, संत सेवा और हरि दर्शन की लालसा इस भजन को अत्यंत भावपूर्ण बना देती है। यह भजन केवल तीर्थ यात्रा का वर्णन नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजधाम के प्रति गहरी भक्ति, प्रेम और समर्पण का दिव्य प्रतीक है। भावार्थ इस भजन में भक्त कहता है कि उसका मन किसी भी प्रकार से नहीं मानता और वह केवल गोवर्धन धाम जाना चाहता है। वह गिरिराज जी की सात कोस परिक्रमा करना, मानसी गंगा में स्नान करना और संतों को भोजन कराना चाहता है। भक्त के हृदय में श्रीकृष्ण के दर्शन की तीव्र लालसा है और वह ब्रजभूमि की सेवा को ही अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य मानता है। उसका मन संसारिक इच्छाओं से हटकर केवल हरि भक्ति में रम गया है। यह भजन दर्शाता है कि सच्चा भक्त भगवान और उनके धाम के प्रति इतना प्रेम रखता है कि उसका मन हर समय उसी स्मरण और दर्शन की अभिलाषा में लगा रहता है।

अंत समय में श्याम - Ant Samay Mein Shyam
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परिचय यह अत्यंत भावपूर्ण कृष्ण-भक्ति गीत है, जिसमें भक्त अपने जीवन की समस्त भूलों, दुर्बलताओं और सांसारिक मोह-माया को स्वीकार करते हुए भगवान श्रीकृष्ण से अंतिम समय में अपने नाम का स्मरण कराने की प्रार्थना करता है। इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जीवन भर की सच्ची भक्ति और भगवान का नाम ही अंत समय में जीव का वास्तविक सहारा बनता है। भजन में वैराग्य, समर्पण, पश्चाताप और प्रभु-प्रेम का सुंदर संगम देखने को मिलता है। भावार्थ इस भजन में भक्त भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है। वह स्वीकार करता है कि जीवन में उससे अनेक भूलें हुई हैं, फिर भी उसे प्रभु की असीम करुणा पर विश्वास है। संसार की धन-दौलत, शरीर और संबंध सभी नश्वर हैं और अंततः साथ छोड़ जाते हैं, परंतु भगवान का नाम और उनकी कृपा ही जीव के साथ रहती है। भक्त प्रार्थना करता है कि मृत्यु के समय उसकी जिह्वा पर केवल श्रीकृष्ण का नाम हो और स्वयं श्याम उसे अपने धाम ले जाने आएँ। यह भजन भगवान के नाम-स्मरण, प्रेम और शरणागति के महत्व को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है।

छम छम बाजे पायलिया छवि दिखलाए कान्हा - Cham Cham Baje Payaliya Chavi Dikhalye Kanha
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परिचय यह अत्यंत मधुर और वात्सल्य रस से भरा श्रीकृष्ण भजन भगवान श्रीकृष्ण के घर आगमन की आनंदमयी भावना को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त अपने घर आए बाल गोपाल की मनमोहक छवि का वर्णन करता है। श्रीकृष्ण की पायल की मधुर ध्वनि, उनकी सांवली सूरत और मोहक मुस्कान पूरे वातावरण को प्रेम और आनंद से भर देती है। भजन में माता यशोदा, सखियों और भक्तों के हृदय में उत्पन्न होने वाले आनंद का सुंदर चित्रण किया गया है। कान्हा के आगमन से अंधेरी रात भी प्रकाशमय हो जाती है और हर कोई उनकी मोहिनी छवि में खो जाता है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के प्रेम, वात्सल्य और आत्मिक आनंद की मधुर अनुभूति कराता है। इसे सुनकर ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं बालकृष्ण भक्त के घर पधार गए हों। भावार्थ इस भजन में भक्त अत्यंत प्रसन्न होकर कहता है कि भगवान श्रीकृष्ण उसके घर पधारे हैं। उनकी पायल की मधुर ध्वनि और सुंदर छवि देखकर पूरा वातावरण आनंद से भर गया है। भक्त अनुभव करता है कि श्रीकृष्ण के आगमन से अंधकार मिट जाता है और जीवन पवित्र हो जाता है। माता यशोदा और सखियाँ भी कान्हा की मोहक अदाओं को देखकर आनंदित हो जाती हैं। भजन यह संदेश देता है कि जब भगवान भक्त के हृदय में आते हैं, तब जीवन प्रेम, शांति और दिव्य आनंद से भर जाता है। श्रीकृष्ण का दर्शन और स्मरण ही भक्त के जीवन को पावन बना देता है।

 कान्हा तेरी बांसुरी नींद चुराए - Kanha Teri Basuri Nind Churaye
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