छम छम बाजे पायलिया छवि दिखलाए कान्हा - Cham Cham Baje Payaliya Chavi Dikhalye Kanha
यह अत्यंत मधुर और वात्सल्य रस से भरा श्रीकृष्ण भजन भगवान श्रीकृष्ण के घर आगमन की आनंदमयी भावना को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त अपने घर आए बाल गोपाल की मनमोहक छवि का वर्णन करता है। श्रीकृष्ण की पायल की मधुर ध्वनि, उनकी सांवली सूरत और मोहक मुस्कान पूरे वातावरण को प्रेम और आनंद से भर देती है।
छम छम बाजे पायलिया, छवि दिखलाए कान्हा।
मेरे घर आए लाला मेरे घर आए॥
ओ कान्हा मेरे घर आए।
रुम झुम बाजे पायलिया, छवि दिखलाए कान्हा॥
मेरे घर आए लाला मेरे घर आए।
ओ कान्हा मेरे घर आए॥
रैन अंधेरी चन्द्र-चकोरी आ गए, आ गए।
मात यशोदा और सखियन को भा गए, भा गए॥
कांधे काली कामरिया, मुरव मलकावे कान्हा।
मेरे घर आए लाला मेरे घर आए॥
छम छम बाजे पायलिया, छवि दिखलाए कान्हा।
मेरे घर आए लाला मेरे घर आए॥
ओ कान्हा मेरे घर आए।
सुनकर रुण झुण सखियां सुध बुध खो गई, खो गई॥
मैं तो दर्शन करके पावन हो गई, हो गई।
ऐसे प्यारे सांवरिया, मुख मलकावे कान्हा॥
मेरे घर आए लाला मेरे घर आए।
छम छम बाजे पायलिया, छवि दिखलाए कान्हा॥
मेरे घर आए लाला मेरे घर आए।
ओ कान्हा मेरे घर आए॥
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परिचय यह अत्यंत पवित्र और दिव्य मंत्र भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की शरणागति एवं रक्षा की प्रार्थना का सुंदर स्वरूप है। इस मंत्र में भक्त भगवान राम को “राघव” और भगवान कृष्ण को “केशव” कहकर पुकारता है तथा उनसे अपनी रक्षा और कृपा की याचना करता है। यह मंत्र वैष्णव भक्ति परंपरा में अत्यंत प्रसिद्ध है और इसका जप मन को शांति, शक्ति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। “रक्षाम्” और “पाहिमाम्” शब्द भक्त की उस भावना को व्यक्त करते हैं जिसमें वह स्वयं को पूर्ण रूप से भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है। इस मंत्र का उच्चारण भक्त के हृदय में भक्ति, विश्वास और आत्मिक शांति का संचार करता है तथा भगवान के नाम स्मरण की महिमा को प्रकट करता है। भावार्थ इस मंत्र में भक्त भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से अपनी रक्षा और कृपा की प्रार्थना करता है। “राम राघव रक्षाम्” का अर्थ है — हे भगवान राम, मेरी रक्षा कीजिए। वहीं “कृष्ण केशव पाहिमाम्” का अर्थ है — हे भगवान कृष्ण, मुझे अपनी शरण में लेकर मेरी रक्षा कीजिए। यह मंत्र यह संदेश देता है कि भगवान का नाम ही भक्त का सबसे बड़ा सहारा है। जब भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रभु का स्मरण करता है, तब उसे भय, दुख और चिंता से मुक्ति प्राप्त होती है। यह मंत्र भक्ति, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट विश्वास का अत्यंत सुंदर प्रतीक है।

परिचय यह अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानमयी भजन मानव जीवन के सत्य, वैराग्य और ईश्वर की कृपा का गहन संदेश देता है। इस भजन में बताया गया है कि मनुष्य जिस शरीर, धन और संसारिक वस्तुओं को अपना समझता है, वे वास्तव में परमात्मा की देन हैं। भजन अहंकार और “मैं” तथा “मेरा” की भावना को त्यागने की प्रेरणा देता है। इसमें जीवन की नश्वरता और संसार की अस्थिरता का अत्यंत सरल और प्रभावशाली वर्णन किया गया है। यह भजन मनुष्य को सेवा, भक्ति और साधना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा यह सिखाता है कि सच्ची शांति और संतोष केवल ईश्वर प्रेम में ही प्राप्त होता है। भावार्थ इस भजन में कहा गया है कि मनुष्य का शरीर, धन और जीवन सब भगवान की देन हैं। इसलिए किसी भी वस्तु पर अहंकार करना उचित नहीं है, क्योंकि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है। भजन यह समझाता है कि जीवन में प्राप्त सभी सुख और साधन क्षणिक हैं और एक दिन सब कुछ छूट जाने वाला है। इसलिए मनुष्य को मोह और अभिमान छोड़कर प्रेम, सेवा और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। अंत में यह संदेश दिया गया है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य साधना और ईश्वर की सेवा है। जो व्यक्ति इस सत्य को समझ लेता है, उसका जीवन सफल और शांतिमय बन जाता है।

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