मन रे कृष्ण नाम कह लीजिये - Man re Krishna Nam Keh Lijiye
यह अत्यंत मधुर और ज्ञानमयी भजन भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के पवित्र नाम-स्मरण की महिमा का वर्णन करता है। इस भजन में मनुष्य को प्रेरणा दी गई है कि वह अपने मन को संसारिक मोह से हटाकर भगवान के नाम जप, सत्संग और भक्ति में लगाए।
मन रे कृष्ण नाम कह लीजै, राम नाम कह लीजै।
गुरु के वचन अटल कर सत्य कर मानो, साधू समागम कीजै॥
पढ़िए सुनिए भक्ति भागवत।
और कहा कछु कीजै॥
मन रे कृष्ण नाम कह लीजै।
राम नाम कह लीजै॥
कृष्ण नाम रस बह्यो जात है।
त्रिशावंत व्है पीजै॥
हे सूरदास हरी शरण ता किए।
जनम सफल कर लीजै॥
मन रे कृष्ण नाम कह लीजै।
राम नाम कह लीजै॥
मन रे कृष्ण नाम कह लीजै।
बांके बिहारी कह लीजै॥
मन रे कृष्ण नाम कह लीजै।
राम नाम कह लीजै॥
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परिचय यह अत्यंत मधुर और भक्तिरस से परिपूर्ण भजन श्रीराधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की महिमा का सुंदर गुणगान करता है। इस भजन में भक्त अपने आराध्य जुगल किशोर श्रीराधा-कृष्ण को अपना सर्वस्व मानते हुए उनके चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट करता है। भजन में भक्त कहता है कि वह जन्म-जन्मांतर तक श्रीराधा-कृष्ण का सेवक बनकर उनके चरणों की सेवा करना चाहता है। प्रभु की असीम दया, करुणा और भक्तवत्सलता का अत्यंत सुंदर वर्णन इस भजन की विशेषता है। इस भजन में श्रीराधारमण, राधावल्लभ, कुंजबिहारी और गिरिधरलाल जैसे श्रीकृष्ण के प्रिय स्वरूपों का स्मरण करके भक्त अपने प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करता है। यह भजन प्रेम, समर्पण और निष्काम भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। भावार्थ इस भजन में भक्त श्रीराधा-कृष्ण को अपना स्वामी और जीवन का आधार मानते हुए कहता है कि वह सदैव उनके चरणों का सेवक बना रहना चाहता है। भक्त का विश्वास है कि प्रभु अपने भक्तों की भूलों को क्षमा कर उन पर सदैव कृपा करते हैं। भजन यह भी दर्शाता है कि भगवान अपने शरणागत भक्तों का पालन और उद्धार करते हैं। उनके अनेक सुंदर स्वरूप भक्त के हृदय में प्रेम और आनंद उत्पन्न करते हैं। अंत में भक्त पूर्ण प्रेम और समर्पण के साथ स्वीकार करता है कि उसके लिए भगवान ही सब कुछ हैं और वही उसके सच्चे ठाकुर हैं। यही इस भजन का मुख्य भाव है।

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