मोहन तुम ही सहारा - Mohan Tum Hi Sahara
परिचय
यह भावपूर्ण कृष्ण भजन एक भक्त के हृदय की गहन पुकार और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उसकी पूर्ण शरणागति को व्यक्त करता है। भजन में संसार की कठिनाइयों, मोह-माया और संघर्षों से थके हुए जीव की व्यथा का सुंदर चित्रण किया गया है, जो अंततः अपने जीवन का एकमात्र सहारा श्रीराधा-कृष्ण को मान लेता है। वृंदावन की पावन गलियों, राधा नाम की महिमा तथा श्रीकृष्ण के प्रेममय स्वरूप का अत्यंत मधुर वर्णन इस भजन को विशेष बनाता है। प्रत्येक पंक्ति भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाती है, जहाँ भक्त अपने समस्त दुख, चिंता और असहायता को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। यह भजन श्रद्धा, प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण की भावना को जागृत करने वाला एक सुंदर भक्तिगीत है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त अपनी जीवन-यात्रा के संघर्षों और दुनियादारी से मिली निराशाओं को व्यक्त करते हुए भगवान श्रीकृष्ण से सहायता की प्रार्थना करता है। वह स्वीकार करता है कि संसार के सहारे क्षणिक हैं और अंततः केवल प्रभु का आश्रय ही स्थायी एवं सच्चा सहारा है। भजन का संदेश है कि जब मनुष्य अपने अहंकार, मोह और सांसारिक अपेक्षाओं को त्यागकर भगवान की शरण में आता है, तब उसे वास्तविक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।
वृंदावन की गलियों का वर्णन इस बात का प्रतीक है कि जहाँ प्रभु का स्मरण और प्रेम है, वहीं दिव्यता का अनुभव होता है। भक्त को विश्वास है कि राधा नाम का स्मरण करने पर स्वयं कान्हा उसकी पुकार सुनकर उसके पास आते हैं। भजन में व्यक्त प्रेम इतना गहरा है कि भक्त स्वयं को पूर्णतः भगवान का मान लेता है और अपने अस्तित्व को उनके चरणों में अर्पित कर देता है। अंततः यह रचना सिखाती है कि जीवन रूपी नैया को भवसागर से पार लगाने वाला सच्चा नाविक केवल भगवान ही हैं, और उनकी भक्ति ही जीवन का वास्तविक आधार तथा परम सहारा है।