मकर संक्रांति और एकादशी एक ही दिन - कैसे करें खिचड़ी का दान?
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, मकर संक्रांति 2026 का यह पावन दिन एकादशी के साथ आ रहा है और श्रद्धालुओं के मन में काफी सवाल भी ला रहा है। उन सवालों के बारे में बात करने से पहले क्या आप जानते हैं इस दिन सूर्य और विष्णु भगवान जी की पूजा होती हैं।
Published on: 5 January 2026 at 12:32 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm

साथ ही साथ इस दिन–
- तिल और गुड़ का दान
- खिचड़ी का दान
- सूर्य और विष्णु भगवान की पूजा
- गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है|
अब काफी लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि क्या वह एकादशी के दिन चावल का दान कर सकते हैं?
इसका हल बड़ा ही सहज है। इस दिन आप निश्चित रूप से चावल को किसी भी रूप में ना ही खा नहीं सकते और ना ही दान कर सकते। ऐसे में सवाल अभी भी वही है कि क्या करें?
इसका आसान सा उपाय है। इस साल तिल से बनी हुई चीजों का दान करें, गुड़ के साथ और ग्रहदोष से खुद को और अपने परिवार को मुक्त करें। यह उपाय सुख और समृद्धि भी देता है|
मकर संक्रांति के बारे में यह बातें ज़रूर जाने
- मकर संक्रांति को उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को अत्यंत ही शुभ माना गया हैं।
- इस दिन गंगा में स्नान कर सूर्य देवता की पूजा की जाती है और दान धर्म किया जाता है।
- काफी लोग इस दिन गंगासागर जाकर गंगा में डुबकी लेकर ओर फिर कपिल मुनि के मंदिर के दर्शन करते हैं।
- 2026 में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का समय 14 जनवरी, बुधवार दोपहर 3:13 मिनट पर है।
- यह शुभ मुहूर्त दोपहर 3:13 से लेकर शाम 5:45 तक है।
- यह पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति ओर इस दिन दान करने से सुख और समृद्धि मिलती है।
षटतिला एकादशी ओर मकर संक्रांति
विष्णु भगवान जी को समर्पित माघ मास में आने वाली इस कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस दिन तिल को अलग अलग तरीकों से इस्तेमाल करके भक्त बहुत सारे पुण्य काम सकते हैं। तिल का इस्तेमाल इन सब तरह से किया जा सकता हैं–
- उबटन में
- स्नान में
- दान में
- भोजन में
- तर्पण कार्य में
- हवन में
इस दिन तिल के दान से वर्षों की दरिद्रता नाश होकर धन और यश की प्राप्ति होती है|
मकर संक्रांति 2026 को क्या करें?
- इस दिन सूर्योदय से पहले अगर आप गंगासागर में स्नान नहीं कर रहे है तो खुद के घर के पानी में गंगाजल मिलकर स्नान करें।
- इस दिन तिल, गुड़, कोई भी अन्न केवल चावल को छोड़ कर ओर कंबल का वितरण करें। अच्छा होगा अगर आप तिल के लड्डू बनाकर दान कर सके तो।
- इस दिन भूल से भी चावल का सेवन या दान न करें क्योंकि इस वर्ष मकर संक्रांति का आगमन एकादशी के साथ हो रहा हैं।
मकर संक्रांति 2026 को करने वाला मंत्र
इन तीन मंत्रों का जाप इस दिन ज़रूर करें –
- ॐ सूर्याय नमः
- ॐ पितृदेवाय नमः
- ॐ घृणि सूर्याय नमः
मकर संक्रांति सनातन धर्म में एक ऐसा नाम है जो हर सनातनी के घर में अलग अलग नियमों के साथ मनाया जाता है। भारत के मुख्य पर्वों में से एक, इस त्यौहार के साथ अनेकों कहानी जुड़ी हैं|
अगर हम मुख्य कहानियों की बात करें तो –
- यह याद दिलाती है भीष्म पितामह के सबसे बड़े त्याग का। यह वही दिन था जिस दिन पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे। इस दिन भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के वरदान के अंतर्गत मोक्ष की इच्छा में अपने प्राण त्यागे थे।
- इसी दिन सूर्य देवता का अपने पुत्र शनि देव से मिलन हुआ था।
- और सबसे प्रमुख मां गंगा जिनकी पावनता हम सभी को कृतज्ञ कर देती है उनका धरती पर अवतरण हुआ था यह माना जाता है कि इस दिन महापुण्यकाल के समय गंगा में डुबकी लेने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है
- काफी लोग इस दिन दान पुण्य के महत्व पर जोर देते हैं पर सबसे अधिक इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है क्योंकि इसी दिन विष्णु भगवान ने असुरों का अंत किया था।
- इस दिन मां गंगा स्वर्ग से आकर राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम को पार करते हुए सागर तक पहुंची थी। और इसी जल से राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए उनका तर्पण किया था।
काफी प्रांतों में इस दिन किसान अपनी नई फसल के उत्सव में प्रकृति को अपना आभार व्यक्त करते हुए मनाते हैं। कहानी तो अनेक जुड़ी है पर जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण है वह है इस दिन का इतना लाभदायक और पुण्य से भरा होना।