सरयू किनारे - Saryu Kinare
यह अत्यंत मधुर और भावपूर्ण राम भजन भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के अयोध्या आगमन की दिव्य अनुभूति को प्रकट करता है। भजन में सरयू तट, अवध नगरी और प्रभु श्रीराम के स्वागत का इतना सुंदर चित्रण किया गया है कि सुनने वाला स्वयं को अयोध्या की उस पावन बेला में उपस्थित अनुभव करता है।
सरयू किनारे देखो, अवध नगरिया।
राम है पधारे, सिया लक्ष्मण पधारे।
इस आंगन में आंगन में, राम सिया जोड़ी देख।
भर आये अखियाँ, प्रभु घर आये।
संग खुशियाँ लाये, इस जीवन में जीवन में।।
राम है पधारे, सिया लक्ष्मण पधारे।
बीत गए युग कितने अब तक, राम सिया से बिछड़न को।
कब से खड़े है इंतजार में, अपने प्रभु के दर्शन को।
अब नगरी में आई है उजाला, दीप जले हर द्वार हो।
हर चेहरे पे छाये, मीठी मुसकनीया।
राम है पधारे, सिया लक्ष्मण पधारे।
इस आंगन में आंगन में।।
कितना अनोखा बंधन है ये, राम सिया और लक्ष्मण का।
सबके हृदय में बसते हैं रघुवर, मोती है सबके मन का।
अवधपुरी में अब रंग रलिया, हर घर में खुशहाल हो।
उनके दरश में ही, बीते ये उमरिया।
राम है पधारे, सिया लक्ष्मण पधारे।
इस आंगन में आंगन में।।
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परिचय यह भजन मानव जीवन के सच्चे उद्देश्य को सरल और प्रभावी शब्दों में समझाने वाला एक प्रेरणादायक भजन है। इसमें बताया गया है कि यह जीवन अनमोल है और इसे व्यर्थ न गंवाकर भगवान के गुणों का गान करते हुए सार्थक बनाना चाहिए। भजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भक्ति ही वह मार्ग है, जो जीवन को सही दिशा और सच्चा आनंद प्रदान करता है। भावार्थ इस भजन में कहा गया है कि यदि मनुष्य भगवान का भजन नहीं करता, तो उसका जीवन व्यर्थ हो जाता है और वह कहीं का नहीं रहता। इतिहास और पुराणों के उदाहरण देकर बताया गया है कि गणिका, अजामिल, गिद्ध (जटायु) और शबरी जैसे साधारण या पापी माने जाने वाले भी भगवान के गुण गाकर और उनकी शरण में आकर सिद्ध हो गए। इससे यह शिक्षा मिलती है कि चाहे कोई भी हो, यदि वह सच्चे मन से भगवान का स्मरण करे, तो उसका जीवन सुधर सकता है और उसे मुक्ति का मार्ग मिल सकता है।

परिचय यह एक अत्यंत भावपूर्ण और भक्ति से ओत-प्रोत भजन है, जिसमें भगवान श्रीराम के नाम की महिमा और अयोध्या धाम की पवित्रता का सुंदर वर्णन किया गया है। इस भजन में भक्त अपने हृदय की गहरी इच्छा व्यक्त करता है कि वह राम नाम का स्मरण करते हुए उनकी नगरी अयोध्या जाकर उनके दिव्य दर्शन प्राप्त करे। भजन में श्रीराम और माता सीता के पवित्र मिलन को भी दर्शाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान का प्रेम और उनकी कृपा जीवन के सभी पापों और दुखों को नष्ट कर सकती है। साथ ही, इसमें यह भी बताया गया है कि राम नाम का जप सबसे सरल और सर्वोत्तम साधन है, जो हर परिस्थिति में मनुष्य का साथ देता है। भावार्थ इस भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के नाम के प्रति अटूट श्रद्धा और उनके दर्शन की गहरी लालसा को व्यक्त करना है। भक्त यह मानता है कि राम नाम ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा और सच्चा धन है, जो अंत समय में भी मनुष्य के साथ रहता है। भजन यह भी सिखाता है कि संसार के सभी कष्टों और पापों से मुक्ति पाने का सबसे सरल मार्ग भगवान के नाम का स्मरण है। श्रीराम और माता सीता के प्रेम को आदर्श मानकर, भक्त अपने जीवन को भक्ति और समर्पण के मार्ग पर चलाने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

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