Siddhivinayak Aarti

Aarti
श्री सिद्धिविनायक मंत्र एवं आरती - Shree Siddhivinayak Mantra & Aarti
यह स्तोत्र भगवान श्री गणेश (गणपति) की महिमा का गुणगान है, जो 'वक्रतुंड' (टेढ़ी सूंड वाले), 'महाकाय' (विशालकाय), 'सूर्यकोटि समप्रभा' (करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी) कहे गए हैं। इसमें 'ॐ गं गणपतये नमः' बीज मंत्र है, तथा 'सिद्धिविनायक' (सिद्धि देने वाले), 'अस्तविनायक' (आठ प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के स्वामी) का स्मरण किया गया है। इस स्तोत्र में प्रसिद्ध गणेश आरती 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' का भी समावेश है, जो सर्वविदित है।

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श्री सिद्धिविनायक आरती - Shree Siddhivinayak Aarti
प्रस्तुत संग्रह हिंदू धर्मातील पाच प्रमुख आरती व भजनांचा आहे - श्री गणेश आरती (सुखकर्ता दुखहर्ता), श्री शंकर आरती (लवथवती विक्राळा), श्री देवी आरती (दुर्गे दुर्घट भारी), घालीन लोटांगण (संत नामदेव) व वैष्णव भजन (अच्युतं केशवं व हरे कृष्ण). यात गणपतीला विघ्नहर्ता, शंकराला संहारक व दयाळू, देवीला शक्तिस्वरूपा आणि विष्णूला पालनकर्ता म्हणून गायले आहे. ही सर्व गीते आरतीच्या वेळी, सकाळ-संध्याकाळच्या उपासनेत व विशेष सणांमध्ये गायली जातात.