श्री अमरनाथ अष्टकम् - Shree Amarnath Ashtakam
परिचय
श्री अमरनाथ अष्टकम् की रचना स्वामी वरदानन्द भारती ने की है। यह अष्टकम् हिमालय स्थित अमरनाथ ज्योतिर्लिंग में विराजमान भगवान शिव के दिव्य, करुणामय और सर्वव्यापक स्वरूप का वर्णन करता है। इसमें शिव के तपस्वी, लोकमंगलकारी और भक्तवत्सल रूप का अत्यंत सुंदर चित्रण है।
भावार्थ
इस अष्टकम् में साधक भगवान अमरनाथ से प्रार्थना करता है कि वे समस्त लोकों के कल्याण हेतु सदा उपस्थित रहने वाले, भक्तों के हृदय में वास करने वाले, और करुणा के सागर हैं। शिव ही जन्म-मृत्यु, भय और अज्ञान से रक्षा करने वाले परम आश्रय हैं।
अर्थ (संक्षिप्त व्याख्या)
अमरनाथ – अमरत्व के दाता शिव
भागीरथी सलिल – गंगाजल से युक्त जटाएँ
त्रिनेत्र – तीनों कालों के द्रष्टा
गिरिजासमेत – माता पार्वती सहित
भक्तकल्पतरु – भक्तों की कामनाएँ पूर्ण करने वाले
अद्वय प्रभु – एकमेव परब्रह्म