यशोदा मैया खोल किवडीया लाला आयो - Yashoda Maiya khol kivadiya Lala aayo
परिचय
“यशोदा मैया खोल किवड़िया” एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण श्रीकृष्ण भजन है। इसमें बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण के गऊ चराकर घर लौटने का सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन विशेष रूप से जन्माष्टमी, नंदोत्सव, ब्रज कीर्तन और सत्संग में गाया जाता है। भजन में यशोदा मैया का वात्सल्य भाव, गोपियों का प्रेम और श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ अत्यंत सरल और मनोहर शब्दों में प्रस्तुत की गई हैं।
भावार्थ
इस भजन में श्रीकृष्ण के गऊ चराकर लौटने का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। वे मधुर बंसी बजाते हुए आते हैं, जिसे सुनकर गोपियाँ आनंदित होकर अटारी पर चढ़ जाती हैं। यशोदा मैया आरती उतारती हैं और प्रेम से बलैयाँ लेती हैं। श्रीकृष्ण की बाल सुलभ चंचलता, सखियों से संवाद, गाय दुहने की लीला और माखन की माँग — सब मिलकर उनके स्नेहपूर्ण बाल स्वरूप को दर्शाते हैं। यह भजन वात्सल्य रस और माधुर्य रस का सुंदर संगम है, जो भक्त के हृदय में प्रेम और आनंद भर देता है।