Tum Sambhalne Aaoge

 तुम संभालने आओगे - Tum Sambhalne Aaoge
Bhajans

तुम संभालने आओगे - Tum Sambhalne Aaoge

परिचय  यह भजन एक भक्त के हृदय की गहरी पुकार और भगवान के प्रति उसके अटूट विश्वास को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने जीवन के सुख-दुख को प्रभु को समर्पित करते हुए उनसे अपनाने की विनती करता है। भजन में भगवान के विभिन्न रूपों—श्रीकृष्ण और श्रीराम—का स्मरण करते हुए यह दर्शाया गया है कि भक्त के लिए प्रभु किसी भी रूप में आएं, वह उन्हें उसी प्रेम और श्रद्धा से स्वीकार करता है। यह रचना भक्त और भगवान के बीच के भावनात्मक संबंध को बहुत ही सरल और मार्मिक शब्दों में प्रस्तुत करती है। भावार्थ  इस भजन में भक्त यह कहता है कि उसने अपने जीवन के सभी सुख और दुख भगवान को अर्पित कर दिए हैं और अब उसे पूर्ण विश्वास है कि प्रभु स्वयं आकर उसे संभालेंगे। वह प्रभु के दर्शन के लिए व्याकुल है और उनसे बार-बार विनती करता है कि वे किसी भी रूप में आकर उसे अपने सान्निध्य का सुख दें। भक्त स्वयं को शबरी के समान मानता है, जो वर्षों से प्रभु की प्रतीक्षा कर रही है। उसकी जीवन नैया कठिनाइयों के भंवर में फंसी हुई है और वह प्रभु से उसे पार लगाने की प्रार्थना करता है। इस भजन का सार यह है कि सच्चे मन से की गई भक्ति और अटूट विश्वास के साथ प्रभु का स्मरण करने से वह अवश्य ही अपने भक्त की पुकार सुनते हैं और उसे सही मार्ग दिखाते हैं।