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Tere Bagair Sawariya Jiya Nahi Jaye
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तेरे बगैर सांवरिया जिया नहीं जाये - Tere Bagair Sawariya Jiya Nahi Jaye
परिचय यह भजन श्रीकृष्ण के प्रति गहरे प्रेम और विरह की भावना को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने प्रिय सांवरे श्रीकृष्ण से विनती करता है कि उनके बिना उसका जीवन अधूरा है। वह चाहता है कि भगवान उसे अपनाकर अपने पास स्थान दें और अपनी सेवा का अवसर प्रदान करें। भावार्थ भजन का भाव यह है कि भक्त का हृदय पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में डूब चुका है। वह कहता है कि प्रभु के बिना जीवन व्यर्थ और अधूरा लगता है। भक्त चाहता है कि उसे वृंदावन में राधा-कृष्ण के चरणों में बैठने और उनकी सेवा करने का अवसर मिले। वह फूल लाकर उनकी पूजा करना चाहता है और आठों याम उनका गुणगान करना चाहता है। यह भजन भक्त और भगवान के प्रेमपूर्ण मिलन की आकांक्षा को दर्शाता है।