तेरा सिंहासन - Tera Singhaasan
परिचय
यह अत्यंत भावपूर्ण और हृदय को स्पर्श करने वाला भजन भगवान श्याम और उनके भक्त के बीच के गहरे प्रेम संबंध को दर्शाता है। इसमें भक्त कल्पना करता है कि किसी भक्त की सच्ची पुकार, आंसुओं और प्रेमभरी अर्जी ने स्वयं भगवान श्याम को भी व्याकुल कर दिया है। प्रभु का सिंहासन हिल रहा है, उनकी आंखें नम हैं और उनका हृदय भक्त के भावों से भर उठा है। यह भजन इस सत्य को प्रकट करता है कि भगवान केवल पूजा या शब्दों से नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, समर्पण और भाव से प्रसन्न होते हैं।
भावार्थ
इस भजन में भक्त यह दर्शाता है कि जब कोई सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, तो उसकी पुकार सीधे प्रभु के हृदय तक पहुंचती है। भक्त के आंसू, उसकी विनती और उसकी निष्कपट भक्ति भगवान को भी भावविभोर कर देती है। यही कारण है कि यहां भगवान का सिंहासन तक डोलता हुआ प्रतीत होता है।
भजन यह भी बताता है कि भगवान संसार के स्वामी होते हुए भी अपने भक्त के प्रेम के सामने स्वयं को हार मान लेते हैं। जिस भक्त को संसार समझ नहीं पाता, उसी भक्त का निर्मल प्रेम भगवान को सबसे अधिक प्रिय हो जाता है। यह रचना भक्त और भगवान के बीच उस अद्भुत आत्मिक संबंध को दर्शाती है, जहां केवल भाव, प्रेम और समर्पण का महत्व होता है।