श्री वृंदावन तोहे करूं प्रणाम - Shree vrindavan tohe karu pranam
परिचय
यह अत्यंत मधुर और रसपूर्ण वृन्दावन भजन श्रीधाम वृन्दावन की दिव्य महिमा और राधा-कृष्ण की प्रेममयी लीलाओं का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भक्त वृन्दावन धाम को प्रणाम करते हुए उसकी अलौकिक शोभा, यमुना तट की पावनता और राधा-श्याम के रंगमय प्रेम का भावपूर्ण चित्रण करता है।
भजन की प्रत्येक पंक्ति में वृन्दावन की कुंज गलियों, लताओं, वृक्षों और पक्षियों तक में राधारानी के नाम का मधुर स्वर गूंजता हुआ दिखाई देता है। सम्पूर्ण वातावरण प्रेम, भक्ति और दिव्य आनंद के रंग में डूबा हुआ प्रतीत होता है।
यह भजन केवल वृन्दावन की सुंदरता का वर्णन नहीं बल्कि उस निष्काम प्रेम और भक्ति का भी संदेश देता है, जिसमें भक्त अपने हृदय को श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम रंग में रंग देना चाहता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त श्रीवृन्दावन धाम को प्रणाम करते हुए कहता है कि वहाँ प्रतिदिन राधा और श्रीकृष्ण प्रेममयी लीलाएँ करते हैं। यमुना तट, वृन्दावन की कुंजें, वृक्ष और सम्पूर्ण वातावरण उनके प्रेम के रंग में रंगा हुआ है।
भक्त अनुभव करता है कि वृन्दावन का प्रत्येक कण राधारानी के नाम का स्मरण कर रहा है। वहाँ के पक्षी, वृक्ष और लताएँ भी मानो भक्ति और प्रेम का संगीत गा रहे हों।
अंत में भक्त प्रभु से प्रार्थना करता है कि उसके भोले हृदय को भी उसी दिव्य प्रेम रंग में रंग दें और उसे निष्काम प्रेम एवं सच्ची भक्ति प्रदान करें। यही इस भजन का मुख्य भाव है।