श्री वेदसार शिव स्तोत्र - Shree Vedsaar Shiv Stotra
परिचय
यह श्री शिव स्तोत्रम् है जिसमें भगवान शिव के निराकार और साकार दोनों स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इसमें उन्हें पशुपति, महेश, त्रिनेत्र, शूलपाणि तथा विश्वरूप के रूप में नमस्कार किया गया है। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और तत्त्व स्वरूप का गूढ़ वर्णन करता है।
भावार्थ
इस स्तोत्र में भगवान शिव को सृष्टि के आदि कारण, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में प्रणाम किया गया है। वे निराकार, निर्विकार और परम ब्रह्म स्वरूप हैं। समस्त जगत उन्हीं से उत्पन्न होकर उन्हीं में स्थित और उन्हीं में लीन होता है। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह पापों से मुक्त होकर परम शांति को प्राप्त करता है।
पाठ का फल
इस स्तोत्र का नित्य श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भय, क्लेश और सांसारिक बंधन दूर होते हैं। मन में अद्वैत भाव जागृत होता है तथा शिव कृपा से आत्मिक उन्नति और अंतःकरण की शुद्धि प्राप्त होती है।