Shivratri

महाशिवरात्रि स्तुति – Maha Shivratri Stuti - Lord Shiva Bhajan
Bhajans

महाशिवरात्रि स्तुति – Maha Shivratri Stuti - Lord Shiva Bhajan

परिचय यह दिव्य स्तुति भगवान शिव के अनेक मंगलमय नामों और स्वरूपों का गुणगान करती है। इसमें शिवजी को आशुतोष, शशांक शेखर, त्रिलोचन, विश्वनाथ, नागेश्वर, महायोगी और सदाशिव के रूप में वंदित किया गया है। भक्त इस स्तुति के माध्यम से भगवान शिव को सृष्टि के सर्जक, पालनकर्ता और संहारकर्ता रूप में स्मरण करता है तथा उनके चरणों में अनन्य भक्ति और क्षमा की याचना करता है। भावार्थ इस स्तुति में शिवजी के निराकार और साकार दोनों स्वरूपों का वर्णन है। वे ओंकार स्वरूप, अविनाशी, काल के भी स्वामी तथा समस्त जगत के आधार हैं। भक्त प्रार्थना करता है कि उसके जीवन के पाप, शाप, संताप और दुःख दूर हों तथा उसका मन सदैव “ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षरी मंत्र का जप करता रहे। अंततः वह अपने समस्त अपराधों के लिए क्षमा मांगते हुए शिवभक्ति की कामना करता है। पाठ का फल जीवन के संताप और मानसिक अशांति का शमन पाप और नकारात्मकता का क्षय शिव कृपा की प्राप्ति भक्ति, शांति और आत्मबल में वृद्धि
हर रात्रि शिवरात्रि है - Har Ratri Shivratri Hai
Bhajans

हर रात्रि शिवरात्रि है - Har Ratri Shivratri Hai

भजन का परिचय यह भजन “हर दिन शिव का दिन है बंदे” भगवान शिव की सर्वव्यापकता और करुणा को अत्यंत सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करता है। भजन यह संदेश देता है कि शिव केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि प्रकृति, जीवन, श्वास और प्रत्येक कण में विद्यमान हैं। शिव को इस भजन में मार्गदर्शक, पालक और अंतिम सहारा बताया गया है। भजन का भावार्थ इस भजन का मूल भाव यह है कि शिव हर समय, हर स्थान और हर परिस्थिति में उपस्थित हैं। बारिश की बूंदों से लेकर पत्तों की सरसराहट तक, गाँव से लेकर शहर और विदेश तक — हर जगह शिव का वास है। भजन यह सिखाता है कि जो व्यक्ति शिव को अपने तन, मन और कर्म में बसा लेता है, उसके लिए हर दिन पावन हो जाता है और हर रात शिवरात्रि के समान हो जाती है। यह भजन भक्त के भीतर श्रद्धा, विश्वास और आत्मसमर्पण का भाव जाग्रत करता है। यह भजन कब और कहाँ गाया जाता है यह भजन विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन माह, सोमवार व्रत, शिव भजन संध्या और कांवड़ यात्रा के समय गाया जाता है। मंदिरों, भजन-कीर्तन, जागरण और व्यक्तिगत साधना में यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है और शिव-भक्ति के भाव को गहराई से स्थापित करता है।
महाशिवरात्रि 2026: व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत कैसे रखें
Article

महाशिवरात्रि 2026: व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत कैसे रखें

2026 महा शिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी शाम को 5:04 बजे से 16 फरवरी शाम 5:34 तक हैं। फाल्गुन महीने के चतुर्दर्शी को महाशिवरात्रि मनाई जाती हैं। इस वर्ष यह 15 फरवरी शाम को 5:04 बजे से 16 फरवरी शाम 5:34 तक हैं। इस व्रत में पूजा मध्यरात्रि अर्थात् निशिता काल में की जाती हैं इसीलिए व्रत करनेवाले महा शिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखेंगे। पूजा करने का शुभ समय 15 फरवरी को रात 11:55 से 12:56 तक हैं।