एक मंदिर, चार पहचान – देखकर रह जाएंगे हैरान

गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णुः, गुरुदेवो महेश्वरः।।
भारत के इतिहास में आपने शिष्यों को गुरुओं के लिए बहुत कुछ करते हुए देखा है पर क्या आपको पता है बेलूर मठ की स्थापना भी एक ऐसे ही शिष्य ने अपने गुरु के लिए की। स्वामी विवेकानंद जी ने यह मंदिर अपने गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस की याद में बनाया था। 

By: RevivingCultures
Published on: 8 April 2026 at 4:25 pm / Updated on: 24 May 2026 at 11:09 pm
एक मंदिर, चार पहचान – देखकर रह जाएंगे हैरान

बेलूर मठ कहां है?

बेलूर मठ की अगर हम बात करें तो वह पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे स्थित है। यह राज्य के सारे रामकृष्ण मठ और श्री रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय भी है। 

बेलूर मठ कब बना था?

बेलूर मठ की स्थापना 1897 से 1898 के दौरान हुई थी। यह स्थान वास्तुकला संभव और आध्यात्मिक शांति से ओत प्रोत है। सबसे मुख्य बात यह है कि यहां आपको हिंदू, बौद्ध, और ईसाई वास्तुकला का संपूर्ण मिश्रण मिलेगा जो यह दर्शाता है कि सभी धर्म एक है। 

बेलूर मठ के बारे में जाने यह बातें

  • इस मंदिर का निर्माण स्वामी विवेकानंद ने अपनी गुरु श्री राम कृष्ण परमहंस की याद में किया था। 
  • इस मंदिर की स्थापना 9 दिसंबर 1898 को हुई थी। 
  • यह मंदिर श्री रामकृष्ण परमहंस के अवशेषों के साथ स्थापित किया गया था। 
  • इसके बाद मुख्य मंदिर जिसका दर्शन हम आज करते हैं उसका निर्माण 1938 में हुआ।
  • आंकड़ों की माने तो यह मंदिर 40 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है। 
  • यहां आपको स्वामी विवेकानंद का कमरा भी मिलेगा जहां उन्होंने महा समाधि ली थी। 
  • इस मंदिर में मां शारदा देवी का भी एक मंदिर है। 
  • यहां का सबसे बड़ा आकर्षण रामकृष्ण संग्रहालय है। 
  • दुर्गा पूजा के दौरान यहां होने वाली कुमारी पूजा को देखते लोग दूर-दूर से आते हैं। 

बेलूर मठ के खुलने और बंद होने का समय 

  • बेलूर मठ सुबह 6:00 बजे से लेकर 11:30 बजे तक खुला रहता है। 
  • इसके बाद यह दोबारा शाम को 4:00 बजे से लेकर रात के 8:30 बजे तक खुला रहता है। 
  • सर्दियों में यह शाम को 7:30 बजे ही बंद हो जाता है। 

त्योहार के मुख्य दिनों में मंदिर परिसर के खुलने और बंद होने का समय में बदलाव हो सकता है इसीलिए पूछताछ करके ही जाए। 
यह मंदिर अपने शांत वातावरण और अनेक धर्म में एकता के आदर्श के लिए जाना जाता है। 

पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का बेलूर मठ के बारे में क्या विचार था? 

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने बेलूर मठ को एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बताया था। 

बेलूर मठ से जुड़े आदर्श

  • 20वीं शताब्दी में निर्मित यह मठ मनुष्य में ईश्वर की निस्वार्थ सेवा जैसे सिद्धांत को मानता है। 
  • इस मंदिर का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। 
  • यह मठ शांत वातावरण से परिपूर्ण है और इसके चारों ओर उद्यान और ताड़ के वृक्ष हैं। 

पोइला बैशाख और बेलूर मठ

  • इस जगह का इतिहास इतना प्रभावशाली है कि कोलकाता में आने वाले पर्यटक खुद को इस स्थान पर जाने से रोक नहीं पाते। 
  • बंगाल का सबसे मुख्य दिन पोइला वैशाख को यहां विशेष भीड़ नजर आती है। 
  • हर धर्म के लोग आपको इधर इस दिन नजर आएंगे। 
  • बंगाल के लोग अपना नया वर्ष इस शांत वातावरण में मां काली, श्री रामकृष्ण परमहंस, और मां शारदा के आशीर्वाद से शुरू करना शुभ मानते हैं। 

बेलूर मठ मंदिर और यहां की अद्भुत वास्तुकला 

जब आप इस मंदिर में जाएंगे तो यहां की दीवार, कलाकृति, और वास्तु कला को देखकर स्तब्ध रह जाएंगे। 

  • यह मंदिर कंक्रीट से बना है। 
  • इस मंदिर को बनाने में चुनार पत्थर का इस्तेमाल हुआ है।
  • इस मंदिर की ऊंचाई 112.5 सीट है और अगर क्षेत्र की बात करें तो यह 32,900 वर्गफ़ीट में फैला हुआ है। 
  • इस मंदिर की वास्तुकला असल में एक सोच है जिसकी कल्पना स्वामी विवेकानंद जी ने की थी। 
  • अगर इस मंदिर को ध्यान से देखा जाए तो यह मंदिर एक कोने से गिरजाघर, एक तरफ से महल, एक तरफ से मंदिर, और एक तरफ से मस्जिद नजर आता है। 
  • इस मंदिर की वास्तुकला में बौद्ध स्तूपों की शैलियों और प्राचीन मंदिरों की नींव से मिलती-जुलती शैलियों भी नजर आती है। 
  • जब आप मंदिर में प्रवेश करेंगे तो वहां पर बनी आकृतियां आपको सांची स्तूप और दक्षिण में बसे भारतीय मंदिरों के गोपुरमो जैसी लगेगी। 
  • ऊपर बने गुंबद पर जब आपकी नजर जाएगी तो वह आपको तीन छतरी नुमा लगेगा। आश्चर्य की बात यह है कि यह गांव के घरों के छप्पर वाली छत जैसा नजर आता है। यह छत श्री रामकृष्ण परमहंस के गांव कमरपुकुर के घरों की छप्पर जैसी है। 
  • मंदिर की बाहरी दिवार और भी शानदार है। इन पर आपको नवग्रह की जालीदार मूर्तियों के दर्शन होंगे। 
  • आगे जब आप केंद्रीय गुंबद पर ध्यान देंगे तो आपको उसकी नककाशी यूरोपीय पुनर्जागरण से प्रेरित लगेगी। 
  • इस मंदिर का फर्श पवित्र क्रॉस जैसा है। 
  • यहां की खिड़कियां और झूलती बालकनी आपके स्तब्ध कर देगी क्योंकि इसकी शैली राजस्थानी और मुगल स्थापत्य शैली से मिलती-जुलती है। 
  • नट मंदिर मुख्य मंदिर से भिन्न नहीं है और यह आपके रूम के सेंट पीटर चर्च की याद दिलाएगा। 
  • जब आप हाल में पहुंचेंगे तो वहां आपको ग्रीक और डोरिक शैली के स्तंभ दिखेंगे। 
  • हाल के ऊपर के बीन और ब्रैकेट में आपको चेन्नई के मदुरई में स्थित मीनाक्षी मंदिर की डिजाइन जैसे लगेंगे। 

बेलूर मठ का गर्भ मंदिर कैसा है?

  • गर्भ मंदिर में जाने के पहले जिस स्थान से आपको परिक्रमा करनी है वह मार्ग बहुत ही सुंदर और चौड़ा है। इस मार्ग की शैली बौद्ध चैत्यों से मिलती-जुलती है। 
  • अगर आप मंदिर के पश्चिम और पूर्वी प्रवेश द्वारों पर अपनी नजर घुमाएंगे तो वहां पर आपको गणेश जी और हनुमान जी की मूर्तियां नकाशी की भी नजर आएंगे। गणेश जी को सनातन धर्म में सफलता का प्रतीक और हनुमान जी को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। 
  • केंद्रीय गुंबद के आखिर में एक स्वर्ण कलश भी है और इसके नीचे एक पूर्णतया मिला हुआ कमल फूल है।

बेेलूर मठ कैसे पहुंचे?

कोलकाता शहर पहुंचने के बाद बेलूर मठ तक जाने का रास्ता बहुत ही सरल है। 

  • कोलकाता में बहुत सारी प्राइवेट और गवर्नमेंट बसें बेलूर मठ तक चलती है। 
  • यहां पर आप टैक्सी या प्राइवेट कार से भी आ सकते हैं। 
  • इस शहर में लोकल ट्रेन के द्वारा भी आप बेलूर मठ तक पहुंच सकते हैं पर स्टेशन से बेलूर मठ की दूरी लगभग आधा घंटा है। 
  • अगर आप दक्षिणेश्वर में मां काली के दर्शन करने गए हैं तो वहां से आप नौका द्वारा बेलूर मठ पहुंच सकते हैं। 

गंगा की पवित्र हवा, मां कालि का आशीर्वाद, और श्री रामकृष्ण परमहंस की मौजूदगी का एहसास बेलूर मठ को अपने में अनुपम बनता है।