Sacisutastaka

शचीसुताष्टकम् - Sacisutastaka -  Sri Sachi-Suta Ashtakam
Bhajans

शचीसुताष्टकम् - Sacisutastaka - Sri Sachi-Suta Ashtakam

शचीसुताष्टकम् श्री चैतन्य महाप्रभु की दिव्य महिमा का अत्यंत भावपूर्ण संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना सार्वभौम भट्टाचार्य ने की थी। इस स्तोत्र में श्री चैतन्य महाप्रभु को शचीमाता के पुत्र, नवगौर स्वरूप, प्रेमावतार और कलियुग के युगधर्म प्रवर्तक के रूप में प्रणाम किया गया है। इस स्तुति में महाप्रभु के नव-नव भाव, नव प्रेम, हरिनाम संकीर्तन, करुणा, नृत्य-कीर्तन और भक्तवत्सल स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। वे हरिनाम को धारण करने वाले, भक्तों के अश्रुओं से विगलित होने वाले और संसार के ताप को हरने वाले बताए गए हैं। शचीसुताष्टकम् यह स्पष्ट करता है कि कलियुग में हरिनाम संकीर्तन ही सर्वोच्च धर्म है। यह स्तोत्र वैष्णव साधकों के लिए श्रद्धा, विनय और प्रेम-भक्ति को जाग्रत करने वाला है। इसके पाठ और श्रवण से हृदय में नाम-रुचि, भक्ति-रस और चैतन्य महाप्रभु के चरणों में दृढ़ आश्रय उत्पन्न होता है।